वेनेजुएला में आर्थिक संकट के बीच, बने गृहयुद्ध जैसे हालात, भूखे मर रहे लोग

वेनेजुएला में आर्थिक संकट

पूरी दुनिया में जहां एक तरफ आर्थिक मंदी की बात करें तो वो किसी से छिपी नहीं है. इसके साथ ही अगर वेनेजुएला की आर्थिक की बात करें तो इस समय वेनेजुएला का आर्थिक संकट दुनिया के लिए भी सबब बनता जा रहा है. क्योंकि वेनेजुएला में आलम ये है कि, वहां पर लोगों को खाने के लाले पड़ रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वहां पर भुखमरी का चारों ओर आलम है. यहां तक की एक किलो चावल के लिए लोग एक दूसरे की हत्या करने से भी चूक नहीं रहे हैं. इन सबके बावजूद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने अंतरराष्ट्रीय मदद को ये कहते हुए इंकार कर दिया कि उनका देश भिखारी नहीं है. आज अगर वेनेजुएला की आर्थिक तौर पर बदहाली की बात करें तो वेनेजुएला की मुद्रास्फीति की दर 13 लाख फीसद तक बढ़ चुकी है.

वेनेजुएला में आर्थिक संकट के चलते फैली भुखमरी

हाल ये है कि, वेनेजुएला की मार्किट में आज के दौर में एक किलो चिकन की कीमत करीब 10 हजार 277 रुपये, कहीं बाहर सामान्य खाना 34 हजार रुपये व 5 हजार रुपये लीटर दूध जबकि 17 हजार रुपये किलो आलू वेनेजुएला में बिक रहा है. ऐसे में अगर बात करें, वेनेजुएला की तो, वहां के लोगों की परेशानियों को देखते हुए अमेरिका ने सहायता सामग्री वेनेजुएला में भेजी थी. हालांकि वेनेजुएला के राष्ट्रपित ने उस जहाज को वेनेजुएला आने से पहले ही रोक दिया. इस समय वो जहाज कोलंबिया के कुकटा में है. मादुरो ने जहाज को प्रवेश से रोकने का संकल्प जताते हुए इसे अमेरिकी आक्रमण का अग्रदूत बताया. इसके अलावा वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो ने कोलंबिया-वेनेजुएला सीमा पर बने पुल को भी अवरुद्ध कर दिया ताकि कोई भी अंतराष्ट्रीय सहायता वहां तक ना पहुंचे. इसके साथ अमेरिका को सख्त हिदायत दी कि, अमेरिका हमारे निजी मामलों पर हस्ताक्षेप ना करे.

वहीं दूसरी तरफ अमेरिाक ने मादुरो की बातों का खंडन करते हुए वेनेजुएला से पुल खोलने की अपील की है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने ट्वीट कर कहा कि, मादुरो सरकार को मानवीय सहायता भूखे लोगों तक पहुंचने देनी चाहिए. इस समय वेनेजुएला की स्थिति की फिकर करनी चाहिए. इसके साथ ही अमेरिका ने यूएन की सुरक्षा परिषद में एक मसौदा प्रस्ताव पेश करने की बात कही है.  इस प्रस्ताव में वेनेजुएला में अंतर्राष्ट्रीय मदद पहुंचाने के लिए सभी देशों से एक साथ आने की मांग की है.

आपको बता दें कि, इस समय वेनेजुएला की आर्थिक संकट के साथ राजनीतिक संकट से भी गुजर है. वहां पर मादुरो के अलावा विपक्षी नेता जुआन गुएदो ने भी खुद को राष्ट्रपति घोषित कर रखा है.  इस दौरान कई पश्चिमी देशों ने गुएदो को समर्थन देने का ऐलान किया है. जिसके चलते वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो जिन्होंने अंतराष्ट्रीय सहायता लेने से इंकार कर दिया था. इस समय वो अंतरराष्ट्रीय मदद मांग रहे हैं. जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति की अगर बात करें तो वो खराब हो चुकी है.

बन रहे गृहयुद्ध जैसे हालात

वहीं दूसरी तरफ अगर देखें तो, वेनेजुएला की सेना में डॉक्टर कर्नल रुबेन पाज जिमेनेज ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से अपनी वफादारी खत्म करने की घोषणा की. उन्होंने कहा है कि, इस समय के हालात के चलते 90 फीसदी लोग सरकार से नाखुश हैं. हमें उन्हें सत्ता में बनाए रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. गौरतलब है कि, करीब एक सप्ताह पहले ही वायु सेना जनरल फ्रांसिस्को यानेज ने भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति से अपनी वफादारी खत्म करने का ऐलान किया था. ऐसे में ये अंदेशा लगाया जा रहा है कि, यदि वेनेजुएला में राजनीतिक संकट यदि जल्द खत्म नहीं होता है तो, वहां पर गृहयुद्ध जैसे हालात हो सकते हैं.

 

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