चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की सख्त हिदायत न ले बिना मतलब की छुट्टियां

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने कोर्ट में लंबित करोड़ों मामलों को खत्म करने के लिए एक नया फॉर्मूला निकाला है. अदालत में पड़े लंबित मामलों के बोझ को घटाने के लिए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कार्यदिवस के दौरान ‘कोई छुट्टी नहीं’ के फॉर्मूले को निकाला है. देश की न्यायपालिका की त्रिस्तरीय व्यस्था में करोड़ों मामले लंबित हैं. यही वजह है कि न्याय की आश में लोगों को लंबे समय का इंतजार करना पड़ता है.

पूर्व चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश के तौर पर शपथ लेने के बाद चीफ जज रंजन गोगोई ने कोर्ट और ट्रायल कोर्ट में लबिंत पड़े 3 करोड़ मामलों को जल्द निपटाने के लिए इस कदम को उठाया है. इसके लिए जस्टिस गोगोई ने उच्च न्यायालयों के कॉलेजियम सदस्यों (मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठ जज) के साथ मीटिंग की थी.

इसके अलावा रंजन गोगोई ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी बात कर न्यायालयों में लंबित मामलों के निपटाने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही थी. साथ ही चीफ जज रंजन गोगोई ने उन जजों के लिए कड़े लहजे में कहा कि, जो जज नियमित तौर से कार्य से पीछे हटते हैं, उन्हें हटाया जाये. इसके साथ ही रंजन गोगोई ने कहा कि, जो जज अदालती कार्रवाई के दौरान अनुशासन की अवहेलना करते हैं उच्च न्यायालय उसकी भी जानकारी उनको दी जाये. उन्होंने वादा किया कि, सुप्रीम कोर्ट ऐसा करने वाले जजों से व्यक्तिगत तौर पर खुद मुलाकात करेगा.

जस्टिस रंजन गोगोई ने इसके अलावा सख्त लहजे में ये निर्देश दिये हैं कि, आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर उच्च न्यायालय या फिर निचली अदालतों का कोई भी जज कार्यदिवस के दिन छुट्टी नहीं लेगा. इस दौरान उन्होंने कहा कि, जजों को सेमिनार या अधिकारिक कार्यक्रमों से भी दूरी बनानी चाहिए. क्योंकि इसकी वजह से अगले दिन की सुनवाई के मामलों में समय बर्बाद होता है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई को अपनी केस फाइलों के प्रति समर्पण के लिए जाना जाता है. क्योंकि रंजन गोगोई दलीलों के बीच वकीलों की किसी तरह की कहानी बनाने का मौका नहीं देते बल्कि सभी तथ्यों को सही ढंग से पेश करने के लिए कहते हैं. वहीं वीडियो कांफ्रेंसिंग के बाद जस्टिस गोगोई ने आधिकारिक पत्र के जरिए जजों के एलटीसी लेने पर पूरी तरह रोक लगा दी है. जिसका मतलब ये निकलता है कि, जजों को अपनी पारिवारिक छुट्टियों की पहले से ही योजनाएं बनानी पडेंगी, अपने सभी जज साथियों के साथ ही सामंजस्य बैठाने के बाद ही छुट्टी मिल पायेगी.

वर्तमान समय में उच्चतम न्यायालय के जजों को पूरे साल में तीन एलटीसी मिलती है. जबकि शीर्ष नौकरशाहों को चार साल में दो बार एलटीसी दी जाती है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई से पहले 2013-14 में मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम ने इस तरह का फैसला लेते हुए अपने कार्यदिवस के समय में विदेश दौरे न करने की सलाह दी थी.

 

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