Grameen News

True Voice Of Rural India

सुपेबेड़ा गांव में 70 लोगों का कातिल बना ‘काला पानी’ 

1 min read
सुपेबेड़ा गांव

Sharing is caring!

हम कई बार अपनी ख़बरों में ऐसे गांव या कस्बों की हक़ीकत आपको दिखा चुके हैं जहां पानी की किल्लत है या जहां बिजली स्वास्थ्य सेवाओं जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। इस बार भी हम आपको ऐसे ही एक गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जो इस वक़्त गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का सुपेबेड़ा गांव जहां हर घर में लगभग हर दूसरे दिन किसी ना किसी ग्रामीण की किडनी की बीमारी से मौत हो रही है। हाल ही में एक और ग्रामीण की मौत किडनी की बीमारी के चलते हो गई। जिसके बाद अब मौतों का आंकड़ा 70 के पार हो गया है। किडनी की बीमारी से हो रही मौतों से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण डरे हुए हैं कि अब अगला नंबर उनमें से किसका होगा।

 इस गांव में होने वाली मौतों के बाद 7 घरों से पानी के 15 सैंपल लिए गए थे, जिन सभी में किडनी के लिये घातक कैडमियम और क्रोमियम जैसी धातु मिला।

ये जांच रिपोर्ट 2017 में बनाई गई थी बावजूद इसके न रिपोर्ट सार्वजनिक की गई और न ही क्रोमियम और कैडमियम जैसे धातु से निपटने के लिए शासन के स्तर पर कोई इंतजाम किए गए। बल्कि शासन ने करोड़ों रुपए खर्च कर आर्सेनिक और फ्लोराइड रिमूवल प्लांट लगाकर खानापूर्ति कर दी। लेकिन उससे कोई ख़ास फायदा गांव को नहीं मिला। जिन घरों से पानी और मिट्‌टी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था वहां 38 से ज्यादा किडनी के मरीज मिले थे। इनमें से 30की मौत हो चुकी है और 8 अब भी जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं। 5 पेज की रिपोर्ट में अंतिम पेज पर दर्ज अनुशंसा को गांव को विस्थापन करने की सलाह तक दी गई थी। बावजूद इसके गांव के लोगों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही उन्हें निदान के बारे में कुछ बताया गया।

इस बारे में जब नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने भी माना है कि जांच रिपोर्ट में पाए गए हैवी मैटल किडनी की बीमारी को बढ़ाते हैं। इनका कहना था कि इससे बचाने के उपाय पीएचई ने क्यों नहीं किए, ये उसी विभाग से पूछा जाना चाहिए जबकि पीएचई के ईई फिलिप एक्का बोले कि सुपेबेड़ा के पानी में जांच के दौरान कैडमियम व क्रोमियम पाया गया है, ऐसी कोई रिपोर्ट हमारे पास नहीं है। मतलब ये कि जांच ही सवालों के घेरे में है और अधिकारी अपनी तरफ से पल्ला झाड़ने के लिए एक दूसरे के ऊपर जिम्मेदारी की गेंद उछाल रहे हैं।

राज्य के गरियाबंद ज़िले के दो हजार की आबादी वाले सुपेबेड़ा गांव में फैल रही किडनी की बीमारी का खौफ अब सिर्फ उसी गाँव में नहीं बल्कि आस-पास के गांवों में इतना फैल गया है कि अब लोग इस गांव के युवक-युवतियों से रिश्ते जोड़ने में भी कतरा रहे हैं। यहीं वजह है कि इस गांव के लोग बीमारी के साथ ही मौतों को भी छुपाने में लगे हुए हैं। वहीं बीमारी की वजह से इस गांव के लोग किसी तरह का काम भी करने में असमर्थ हैं और तो और किसी एक व्यक्ति को बीमार घरवाले की देखरेख में हमेशा मौजूद रहना पड़ता है। जिससे गांव में बेरोजगारों की भी कमी नहीं है।

 कभी कभी हैरानी होती है ये सोच कर कि सरकार को क्यों कभी ऐसे गांव दिखाई नहीं देते क्यों नहीं आखिर इन गांव की तस्वीर कभी नहीं बदलती है। क्या एक गांव में साफ़ पानी स्वास्थ्य सेवाएं या फिर सड़क बनवाना इतना मुश्किल काम है कि ना तो पुरानी ना ही नई सरकार इस ओर कोई कदम उठाती है।

 

Grameen News के खबरों को Video रूप मे देखने के लिए ग्रामीण न्यूज़ के YouTube Channel को Subscribe करना ना भूले  ::

https://www.youtube.com/channel/UCPoP0VzRh0g50ZqDMGqv7OQ

Kisan और खेती से जुड़ी हर खबर देखने के लिए Green TV India को Subscribe करना ना भूले ::

https://www.youtube.com/user/Greentvindia1

Green TV India की Website Visit करें :: http://www.greentvindia.com/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *