आईएएस अशोक खेमका जिनका 28 साल में 52 बार हुआ तबादला

आईएएस अशोक खेमका

किसके हितों की रक्षा करूं? तुम्हारा या उनका जिनका आप प्रतिनिधित्व का दावा करते हैं? दम्भ है हमें पैरों तले रौंदोगे. शौक से, कई बार सहा है, एक बार और सही। ये पंक्तिया किसी शायर ने नहीं लिखी बल्कि ये शब्द दर्द बनकर उभरें हैं उन आईएएस के जिनका 28  साल के करियर में करीब 52 बार तबादला किया जा चुका है। हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका का एक बार फिर से तबादला कर दिया गया है।

आईएएस अशोक खेमका का एक और तबदला हो गया है और ये अब हैरान नहीं करता, न लोगों को और न ही खुद खेमका को। उनका अपनी 28 साल की नौकरी में 52 बार तबादला हो चुका है। इस पर खेमका का दर्द यूं बाहर आया है, ‘ हर तबादले के बाद कुछ खोने जैसा अहसास होता है…लगता है, हार गया हूं…लेकिन फिर लगता है कि मैं सिर्फ स्वयं से हार सकता हूं। शुरू में बुरा लगता है, लेकिन फिर जिंदगी अपनी रफ्तार पर लौट आती है।’

आईएएस अशोक खेमका 1991 बैच के हरियाणा काडर के  आईएएस हैं। नवंबर 2014 में तत्‍कालीन हुड्डा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा और डीएलएफ के लैंड डील से जुड़े खुलासे के बाद खेमका का तबादला परिवहन विभाग में कर दिया था। सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन सौदे से जुड़ी जांच के कारण अशोक खेमका सुर्खियों में रहे। वो भूपिंदर सिंह हुड्डा के शासनकाल में बतौर व्हिसिल ब्लोवरकई घोटालों का खुलासा कर चुके हैं। कहा जाता है कि अशोक खेमका जिस भी विभाग में जाते हैं, वहीं घपले-घोटाले उजागर करते हैं, जिसके चलते अक्सर उन्हें ट्रांसफर झेलना पड़ता है।

अब फिलहाल हरियाणा सरकार ने 1991 बैच के वरिष्ठ नौकरशाह अशोक खेमका समेत नौ आईएएस अधिकारियों के तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और तैनाती आदेश जारी किए हैं। खेल और युवा मामलों के विभाग के प्रधान सचिव अशोक खेमका को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है, जहां उन्हें पहले भी तैनात किया गया था। विज और खेमका दोनों की छवि ईमानदार अफसर और ईमानदार मंत्री की है, लेकिन विज भी खेमका को अपने खेल विभाग में नहीं रोक सके। बताया जाता है कि डॉ. अशोक खेमका को मनोहरलाल सरकार के उस फैसले के विरोध की सजा मिली है, जिसमें फरीदाबाद के कोट गांव की अरावली के दायरे में आने वाली जमीन की चकबंदी कराने को मंजूरी दी गई है। वर्ष 2012 में खेमका जब चकबंदी महानिदेशक थे, तब उन्होंने चकबंदी पर रोक लगा दी थी।

अशोक खेमका पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पैदा हुए। फिर आईआईटी खड़गपुर से 1988 में बीटेक की और बाद में कंप्यूटर साइंस में पीएचडी की।  बिजनेस एडिमिनिस्ट्रेशन में उनके पास एमबीए की डिग्री भी है। 53 वर्ष के हो चुके अशोक खेमका पश्चिम बंगाल के कोलकाता के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 1988 में आइआइटी खडग़पुर से स्नातक और टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान मुंबई से कंप्यूटर साइंस में पीएचडी और एमबीए किया हुआ है। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से कानून की भी पढ़ाई की है। रिटायरमेंट के बाद उनका वकालत करने का इरादा है।

‘भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्ध’ के लिए अशोक खेमका को वर्ष 2011 एसआर जिंदल पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उच्च पदों पर भ्रष्टाचार को उजागर करने में उनके निडर प्रयासों के लिए आइएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के साथ 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार मिला है।

दरअसल, कोई भी राजनीतिक दल जब विपक्ष में होता है, तब खेमका के फैसले उसे खासे पसंद आते हैं। सत्ता में आते ही खेमका का यह विरोध इन राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी बाधा बन जाता है।

1991 बैच के आइएएस खेमका को अब तबादलों की आदत सी हो गई है। उनकी पत्नी और बच्चे भी तबादलों की खबर पर हैरान-परेशान नहीं होते। बंसीलाल से लेकर लेकर मनोहर लाल तक, कोई ऐसी सरकार नहीं बची, जिसमें खेमका का व्यवस्था से सीधे टकराव नहीं हुआ। भजनलाल, ओमप्रकाश चौटाला हों या फिर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, हर राज में खेमका सीधे व्यवस्था से टकराते रहे। बदले में उन्हें धड़ाधड़ तबादलों का इनाम मिलता रहा।

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