मानवता के बदले मानवता मिले, ये हर इंसान के लिए जरुरी नही

जिनेश

केरल के लोगों ने कुछ समय पहले सदी की सबसे भयानक बाढ़ देखी। इस बाढ़ ने केरल में तबाही मचा दी थी। किसी ने नही सोचा था की यह बाढ़ कई लोगो को उनके घर से बेघर कर देगी। केरल में बाढ़ के चलते कई लोगों ने बहादुरी और इंसानियत की मिसाल पेश की थी और अपनी परवाह किए बिना बड़ी संख्या में लोगों को बचाया था। हालांकि, उन लोगों में से कइयों की किस्मत इतनी अच्छी नहीं थी कि उन्हें अपने किए का सही फल मिलता। बाढ़ के पानी से लोगों को बचाने वाले ऐसे ही एक मछुआरे जिनेश ने सड़क हादसे के बाद तब दम तोड़ दिया, जब किसी राहगीर ने उनकी मदद करना जरूरी नहीं समझा।

जिनेश मछुआरे ने बाढ़ में फसे लोगों की बिना अपनी जान की परवाह किए बचाया था। उसका फल जिनेश को इनता बुरा मिला की आगे चलकर शायद कोई किसी परेशानी में फसे लोगों की मदद नही करेंगा। जी हां.. अगर लोग किसी के एहसान को भूल सकते हैं तो कोई मदद ही क्यों करेंगा। यह सुनकर तो हमारी या आपकी आंखे भी नम हो जाएगी की जिसने लोगों की जान बचाई वो ही लोग उसकी जान के गुनहगार बन गए।

पुंथुरा निवासी जिनेश जेरोन, उनके दोस्तो और उनके परिवार का विडियों कई बार देखा जा चुका हैं। उन्हें बाढ़ के दौरान तैरते हुए लोगों को किनारे लाने का काम किया था। जिनेश को हीरो बताने वाले अखबारों के पन्ने पलटते रहते हैं। घर से करीब 12 किलोमीटर दूर जिनेश को 30 सिंतबर रविवार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी। वह दर्द में कराहते मदद की गुहार लगाते रहे लेकिन कोई नहीं रुका। बल्कि उन्हें देखकर लोग आगे निकलने लगें। वह लोग यह भूल गए की जिनेश ने उस समय इन लोगों की मदद की जब इनकी जान मुसीबत में फसी हुई थी। अगर जिनेश अपनी बहादुरी और इंसानियत नही दिखाते तो ना जाने कितने लोग बाढ़ की चपेट में आ जाते और अपनी जान गवाह देते।

हादसे के दौरान जिनेश के साथ बाइक पर मौजूद जगन बताते हैं, की ‘मुझे विश्वास नहीं होता कि जिनेश जैसे व्यक्ति के साथ ऐसा हो सकता है। उसे दूसरों की मदद करना बेहद पसंद था। इसी से वह बाढ़ के दौरान हीरो बना था।’ हादसे के बाद उन तक ऐंबुलेंस पहुंचने में आधा घंटा लग गया। वहां कुछ देर तक संघर्ष करते रहें लेकिन वो अपनी इस लड़ाई में हार गए।

जिनेश और उनके दोस्तों ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित चेंगन्नूर में 100 से भी ज्यादा लोगों को बचाया था। जिनेश की मां ने बताया कि जब चर्च की ओर से मछुआरों से बचाव कार्य में मदद के लिए मीटिंग की गई तब जिनेश और उनके 6 दोस्त एक नाव लेकर निकल पड़े। उन्होंने किसी का इंतजार नहीं किया जबकि बाकी टीमें अगले दिन गईं। लोग यह कैसे भूल गए की जिसने उनकी जान बचाई हैं वो उन्ही की जान नही बचा पा रहें।

चलिए एक समय के लिए छोड़ देते की उन्होंने बाढ़ में लोगों की मदद की। लेकिन लोगों के अंदर इंसानियत कैसे खत्म हो सकती हैं। एक इंसान रोड़ पर तपड़ रहा हैं। मदद की भिख मांग रहें हैं और आप लोग क्या कर रहें हैं उसे नज़र अंदाज करके जा रहें हैं। आखिर क्या हो गए हैं हमारे समाज के लोगों को। अगर इस जगह कोई लड़का लड़की बात कर रहें हो ना तो उसमें लोगों को परेशानी हो जाती हैं।

लेकिन कई बार ऐसा देखा जा चुका हैं की लोगों को कभी गलत चीज़, गलत बात, या रोड़ पर पड़ा इंसान दिखाई नही देता। आज के लोग वो देखते हैं जो शायद कभी गलत नही होता। बता दे की अपने छोटे से घर में जिनेश एक कोने में डांस प्रैक्टिस करते थे। वह और उनके दोस्त खुद को शाइनिंग स्टार्स कहते थे। जिन लोगों को जिनेश ने बचाया था, उनमें के कई उनके घर आकर जिनेश की मां को उनके बेटे के लिए धन्यवाद देते हैं। उनमें से एक ने कहा, की ‘उनकी मौत से हमें सभी को इस बात का एहसास करना चाहिए कि भारत की खतरनाक सड़कों पर गाड़ियों से टक्कर खाए लोगों की मदद करने के लिए हमें रुकना चाहिए। हम उन्हें मरने के लिए छोड़ देते हैं। यह गलत हैं।

हमें भी यही कहते हैं किसी इसांन की मदद करके अगर आपको लगता हैं की आपका समय खराब हो रहा हैं तो गलत हैं चलिए आप उनकी मदद मत कीजिए लेकिन कम से कम पुलिस को फोन करके इस घटना की जानकरी तो दे ही सकते हैं

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