Thu. Jul 18th, 2019

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बसंत पंचमी के दिन जानिए क्यों की जाती हैं मां सरस्वती की पूजा

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बसंत पंचमी

जब फूलों पर बहार आ जाती है, खेतों में सरसों का सोना चमकने लगता है, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगती हैं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाती है और हर तरफ तितलियाँ मँडराने लगती हैं, तब समझिए कि वसंत पंचमी का त्योहार आ गया है।

भारतीय संस्कृति के उल्लास का, ज्ञान के पदार्पण का, विद्या व संगीत की देवी के प्रति समर्पण का त्योहार बसंत पंचमी बसंत ऋतु में मनाया जाता है। बसंत पंचमी शरद ऋतु के जाने और बसंत ऋतु के आगमन का त्योहार है। इस दिन बुद्धि और विद्या की देवी मां सरस्वती की जन्म हुआ था। बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की विशेष रूप से पूजा की जाती है। हिंदुओं के पौराणिक ग्रंथों में भी इस दिन को बहुत ही शुभ माना गया है। हर नए काम की शुरुआत के लिए ये बहुत ही मंगलकारी माना जाता है। इसलिए इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना और मांगलिक कार्य किए जाते हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, साथ ही पीले रंग के पकवान भी बनाते हैं।

बसंत पंचमी के दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। इसके पीछे दो महत्वपूर्ण कारण माने जाते हैं। पहला बसंत को ऋतुओं का माना जाता है। बसंत पंचमी के दिन से कड़कड़ाती ठंड खत्म होकर मौसम सुहावना होने लगता है। हर तरफ पेड़-पौधों पर नई पत्तियां, फूल-कलियां खिलने लग जाती हैं। गांव में इस मौसम में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नज़र आती है।  इस पीली धरती को ध्यान में रख लोग बसंत पंचमी का स्वागत पीले कपड़े पहनकर करते हैं। वहीं, दूसरी मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता है. जिसकी पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए। इन्हीं दो वजहों से बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व रहता है। इतना ही नहीं बसंत पंचमी के दिन पीला प्रसाद और खाना भी पीले रंग का ही बनता है।

इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विशेष महत्‍व होता है। हिंदू धर्म में मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना गया है। छात्र इस दिन अपनी किताब-कॉपी और कलम की भी पूजा करते हैं। इस दिन कई लोग अपने शिशुओं को पहला अक्षार लिखना सिखाते हैं। ऐसा इसलिए क्‍योंकि इस दिन को लिखने पढ़ने का सबसे उत्‍तम दिन माना जाता है। वहीं कलाकारों में इस दिन का विशेष महत्व है। कवि, लेखक, गायक, वादक, नाटककार, नृत्यकार अपने उपकरणों की पूजा के साथ मां सरस्वती की वंदना करते हैं।

बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व है। दरअसल, वसंत ऋतु में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नजर आती है। इसे ध्यान में रखकर इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनकर बसंत पंचमी का स्वागत करते हैं।

माना जाता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना तो कर दी, लेकिन वे इसकी नीरसता को देखकर असंतुष्ट थे। फिर उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का जिससे धरा हरी-भरी हो गई और साथ ही विद्या, बुद्धि, ज्ञान और संगीत की देवी प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। तभी से बुद्धि और संगीत की देवी के रुप में सरस्वती जी पूजी जाने लगीं।

सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण वह संगीत की देवी भी हैं। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पचंमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी। इस कारण हिंदू धर्म में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है।

 

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