डॉक्टर अंसारी बने छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोगों और जवानों के लिए भगवान

डॉ अंसारी

छत्तीसगढ़ के बस्तर का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में बस एक ही छवि उभर कर सामने आती हैं, और वो है, हथियार, नक्सली, स्वास्थय और जुनसुविधाओं की बदहाली.. और ऐसी जगहों पर काम करने वाले केवल दो ही तरह के लोग बचले हैं, या तो जो बहुत मजबूर हैं, या वो जिन्हें वक्त के साथ इस इलाके से प्यार हो चला हों।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पोटाली, ब्लॉक कुंआकोण्डा, जिला दंतेवाड़ा में पोस्टेड सहायक चिकित्सा अधिकारी डॉ अतिक अहमद अंसारी दंतेवाड़ा के इस सुकमा सीमावर्ती क्षेत्र के स्थानिय लोगों और सुरक्षा बलों के जवानों के लिए डॉ. के रूप में भगवान हैं। आपको बता दें कि, डॉ. अंसारी साल 2009 से लगातार इस क्षेत्र के लोगों का इलाज करते आ रहे हैं। उनके इस नेक काम के लिए उन्हें कई बार सम्मानित भी किया जा चुका हैं।

शायद आपको याद हो, अभी हाल ही में, विधानसभा चुनावों से पहले एक नक्सली हमले में दूरदर्शन के एक मीडियाकर्मी की मौत कुंआकोण्ड ब्लाक में ही हुई थी। हालांकि, डॉ. अंसारी उस वक्त घटनास्थल से लगभग 4 किमीं की दूरी पर ही थे। डॉ. अंसारी ने बताया कि, जब 2009 में मैं यहां आया था तो सबसे बड़ी चुनौती थी स्थानीय जनजातीय लोगों को इलाज के लिए अस्पताल तक लेकर आना। ज्यादातर वो आज भी अस्पताल आने से पहले एक बार झाड़-फूंक करने वालों के पास ही जाते हैं। मगर उन दिनों यह स्थिति और भी ज्यादा बद्तर थी। दरअसल, झाड़-फूंक करने वाले, मलेरिया बुखार होने पर मरीज के भौंह के उपर हिस्से के पास गर्म लोहे से दागते थे। पहले तो मरीज मलेरिया बुखार से परेशान उसके बाद झाड़-फूंक करने वाले के पास पहुंचने पर घाव का संक्रमण भी पाल लेता था। इस तरह मरीज के जान बचने की संभावना कम हो जाती थी। हालांकि, ये स्थिति देश के कई औऱ इलाकों में आज भी बरकरार हैं।

दंतेवाड़ा-सुकमा बार्डर के एक कैंप में तैनात सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडर अमित कहते हैं कि डॉ अंसारी में गज़ब का जोश और सेवा भाव है। डॉ अंसारी और उनकी टीम की सक्रियता की वजह से आदिवासी लोगों के बीच स्वास्थ के प्रति जागरूकता में थोड़ा इजाफा हुआ है। हम जवानों को भी अपनी प्राथमिक स्वास्थय जरूरतों के लिए डॉ अंसारी की मौजूदगी एक पॉजिटिव एनर्जी देता है।

अमित आगे कहते हैं कि जब तक सरकारी महकमा जनता का दिल नहीं जीतेगा तब तक इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता। डॉ अंसारी जैसे युवाओं की मौजूदगी ने अस्पताल के प्रति आदिवासी लोगों का विश्वास बढ़ाया है। डॉ अंसारी बताते हैं कि इस इलाके में स्वास्थय हालातों में सुधार के लिए सीआरपीएफ की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इनकी उपस्थिति की वजह से सड़कें बनीं जिससे आज एंबुलेंस ज्यादातर गांवों में पहुंच जाती है।

इस इलाके में कुपोषण, मच्छर के काटने से होने वाली बिमारियां, साफ-सफाई नहीं रखने के कारण होने वाली त्वचा संबंधी बिमारियां और महिलाओं में एनिमिक आम हैं। इनसे निपटने के लिए जरूरी सावधानी बरतना और खान-पान में थोड़ा सुधार के लिए जागरूकता इस इलाके की आवश्यकता है जिसपर डॉ अंसारी जैसे चिकित्सक पूरे मन के साथ काम कर रहे हैं।

डॉ अंसारी कहते हैं कि शुरुआत में मैं भी इस क्षेत्र की संवेदनशीलता के चलते अपने करिअर को लेकर बहुत चिंतित था। लेकिन यहां के लोगों से मिलने के बाद बेइंतेहां प्यार और इसी क्षेत्र में तीस साल से कार्यरत एक नर्स गंगा जी मोटिवेशन का स्त्रोत बनीं। एक समय था जब मुख्य सड़क से कटे गांवों में हेल्थ कैंप लगाने के लिए पहले कई बार सात से आठ किलोमीटर पैदल भी चलकर जाना पड़ता है। फिर दो से तीन बार विजिट के बाद हेल्थ कैंप लग पाता था। आज गांव वाले हेल्थ कैंप लगाने के लिए खुद से आमंत्रित करते हैं।

 

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