गांव की महिलाओं ने बना दी तीन दिन में सड़क, प्रशासन तो बस देता रह गया आश्वासन

इन महिलाओं ने बना दी तीन में सड़क, प्रशासन तो बस देता रह गया आश्वासन

इन महिलाओं ने बना दी तीन दिन में सड़क, प्रशासन तो बस देता रह गया आश्वासन

ये कहना शायद ग़लत नहीं होगा कि हमारे देश में विकास का रास्ता रोकने का काम काफ़ी हद तक ख़राब रास्ते ही करते हैं। मतलब ये कि आज भी देश के कई गांव कई कस्बे ऐसे हैं जहां सड़क नहीं पहुंच पाई है। सड़क ना पहुंचने से इन गांव कस्बों का विकास भी अवरोध हुआ है। पटना से दक्षिण-पूर्व में 276 किलोमीटर दूर बांका जिले के बौंसी ब्लॉक के तीन गांव भी कई सालों से इस दंश को झेल रहे हैं। नीमा, जोरारपुर और दुर्गापुर इन तीनों गांव में मात्र 2,000 की आबादी है। यहां तक आज भी कोई सड़क नहीं है, जिस वजह से लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मगर क्या आप यकीन कर पाएंगे कि जो काम सरकार और प्रशासन नहीं कर पाया वो काम महिलाओं ने कर दिखाया है। दरअसल महिलाओं ने अब सड़क सम्बन्धी दिक्कतों का अंत कर दिया है। सभी महिलाओं ने तीन दिन के अंदर यहां सड़क बना कर तैयार कर दी।

इन महिलाओं ने बना दी तीन में सड़क, प्रशासन तो बस देता रह गया आश्वासन

इस गांव के लोगों को बारिश के दिनों में परेशानी का सामना करना पड़ता था। इस गांव में कई लोगों की मौत तो बस इसलिए हो गई क्योंकि वे सड़क न होने के चलते समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच सके। तो कई माँओ ने अपने बच्चे खस्ता हाल रास्ते की वजह से खो दिए। इसलिए जब इस साल भी सरकार की तरफ़ से कोई उम्मीद नहीं दिखी तो महिलाओं ने अपने हाथ में कमान संभाली और सिर्फ़ तीन दिन में सड़क बना दी। इस काम में 130 से ज्यादा महिलाओं की भागीदारी रही। सबसे बड़ी तो ये है कि इस सड़क का 70 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय लोगों की निजी भूमि से होकर गुजरता है। इन लोगों ने सड़क बनाने के लिए अपनी ज़मीन का हिस्सा सिर्फ़ इसलिए दे दिया कि जब महिलाएं इतनी हिम्मत दिखा सकती हैं तो वो भी अपनी ज़मीन दे ही सकते हैं। अब हल्के वाहन आसानी से इस सड़क पर चल सकते हैं। वाकई में महिलाओं ने एकबार फिर ऐसा कर के अपनी ताकत दिखा दी है।

 

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