अब केन्द्रीय विद्यालयों में होने वाली हिंदी-संस्कृत प्रार्थना पर उठे सवाल 

देश में पिछले लम्बे समय से साम्प्रदायिक बहस सी छिड़ी हुई है। धर्म जाति इन दिनों सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। मगर अब इस बार तो केन्द्रीय विद्यालयों में होने वाली हिंदी और संस्कृत भाषा की प्रार्थना पर ही लोग आपत्ति जता रहे हैं।
आपको बता दें कि केंद्रीय विद्यालयों में हिंदी ऋचाएं दैनिक की प्रार्थना में शामिल होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्‍द्र सरकार और केन्‍द्रीय विद्यालयों को नोटिस जारी कर इस पर जवाब भी मांगा है। कोर्ट ने सवाल किया है कि क्या रोजाना सुबह स्कूल में होने वाली हिंदी और संस्कृत की प्रार्थना से किसी धार्मिक मान्यता को बढ़ावा मिल रहा है? इसकी जगह कोई सर्वमान्य प्रार्थना क्यों नहीं कराई जा सकती? इन सभी सवालों के जवाब कोर्ट ने 4 हफ्ते में मांगे हैं। कोर्ट इस याचिका पर अगली सुनवाई में केंद्र के जवाब पर विचार करेगा।
मतलब साफ़ है कि सालों से अब स्कूल में होने वाली प्राथनाओं पर भी भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इन प्राथनाओं को भी धर्म से जोड़कर देखा जा रहा है। ये प्रार्थनाएं अगर बंद हुई तो सम्प्रदायों के बीच नफरत कम हो जाएगी या और भी ज्यादा नफरत बढ़ेगी ये देखने वाली बात होगी।

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