Happy woman’s day: क्या आपको पता हैं की 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता हैं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

महिला दिवस

देवी का दामन है बड़ा,

दिया उसने अपना प्यार सारा,

कहलाई वो स्त्री, कहलाई वो नारी,

बनकर एक आदर्श उसने किया जग को उजियारा

आज देश भर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा हैं…. इस समाज में महिलाएं उनती ही महत्वपूर्ण हैं जितना पुरुष जरुरी हैं… लेकिन फिर भी दुनियां की आधी आबादी से ना जाने क्यों महिलाओं को सम्मान और अपने ही अधिकार के लिए लड़ना पड़ता हैं… महिलाएं अपने अधिकार और सम्मान प्राप्त करने के लिए काफी संघर्ष करती है…. साथ ही महिलाओं के बिना घर नही चल सकता… हर कोई महिलाओं के बिना अधूरे हैं…

8 मार्च को हम महिला दिवस मनाते तो हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की महिला दिवस 8 मार्च को ही क्यों मनाते हैं… अगर आपको नही पता की तो आईए आपको बताते हैं की महिला दिवस 8 मार्च को ही  क्यों मनाया जाता हैं….  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले 1909 में मनाया गया था… इसे आधिकारिक मान्यता तब दी गई जब 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक थीम के साथ इसे मनाना शुरू किया,…. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी ‘सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर।

विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्यार प्रकट करते हुए इस दिन को महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं लेकिन अतीत में ऐसा नहीं था। जिस प्रकार की आजादी आज हम महिलाओं को प्राप्त हुए देखते हैं, वे पहले नहीं थीं। न वे पढ़ पाती हैं न नौकरी कर पाती थीं और न ही उन्हें वोट डालने की आजादी थी।

1908 में 15000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क सिटी में वोटिंग अधिकारों की मांग के लिए, काम के घंटे कम करने के लिए और बेहतर वेतन मिलने के लिए मार्च निकाला… एक साल बाद अमेरिका की सोशलिस्ट पार्टी की घोषणा के अनुसार 1909 में यूनाइटेड स्टेट्स में पहला राष्ट्रीय महिला दिवस 28 फरवरी को मनाया गया… 1910 में जर्मनी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की महिला ऑफिस की लीडर नामक महिला ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का विचार रखा, उन्होंने सुझाव दिया की महिलाओ को अपनी मांगो को आगे बढ़ने के लिए हर देश में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना चाहिए. एक कांफ्रेंस में 17 देशो की 100 से ज्यादा महिलाओ ने इस सुझाव पर सहमती जताई और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना हुई, इस समय इसका प्रमुख उद्देश्य महिलाओं को वोट का अधिकार दिलवाना था। 19 मार्च 1911 को पहली बार आस्ट्रिया डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया। 1913 में इसे ट्रांसफर कर 8 मार्च कर दिया गया और तब से इसे हर साल इसी दिन मनाया जाता है।
महिला दिवस मनाने से कुछ नही होता… एक दिन महिलाओं को सम्मान दे दिया…एक दिन उनको Happy woman’s day wish कर दिया तो महिलाओं का सम्मान हो जाता हैं नही…. ऐसा नही हैं… हर किसी को यह समझना होगा की महिलाएं पुरुषों के तरह ही हैं…. जितना सम्मान हमारे देश में पुरुषों को मिलता हैं उतना ही महिलाओं को भी मिलना चाहिए …. हम लड़कियों के काम पर… घर लेट आने पर…. दोस्तों के साथ घुमने पर सवाल नही उठाने चाहिए… हम लड़कियों को रात में घर से निकलकर जिस दिन मेहसूस हो गया… की हम महफूज हैं उस दिन असलीयत में woman’s day होगा….

 

इस खबर को वीडियो के रूप में यहाँ देखें :

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