Wed. Jul 17th, 2019

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सोलर लैंपों से दुनियाभर की महिलाओं की जिंदगी में रौशनी भर रही हैं लीला देवी

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सोलर लैंपों

गांव और देहात जैसी जगहों पर बच्चों की पढ़ाई के बीच सबसे बड़ी बाधा बनती हैं बिजली.. हमारे देश में आज भी ऐसे ना जाने कितने ही गांव हैं, जहां बिजली, पानी, जैसी मूलभूत सुविधाएं आज भी उपलब्ध नहीं हैं..और इसी के चलते बिजली की समस्या से निपटारा पाने के लिए राजस्थान और उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने एक ऐसी पहल की हैं.. जिसके चलते गांवों में बिजली की कमी की वजह से अब बच्चों को पढ़ाई से वंचित नहीं रहना पड़ेगा.. सौर उर्जा के सहारे इन दो राज्यों की महिलाएं मिलकर गांवों में उजाला करने के साथ ही, अच्छी कमाई भी कर रही हैं… दरअसल, तिलोनिया की लीला देवी पूरी दुनिया की महिलाओं की जिंदगी में सौर-उर्जा से रोजगार की रौशनी फैला रही हैं..जिसके चलते उत्तर प्रदेश के मैनपुरी का एक स्वयं सहायता समूह ऐसा सोलर लैंप बनाने जा रहा हैं.., जिसे रियायती दरों पर स्कूलों में छात्र-छात्राओं को बेंचा जाएगा..

जयपुर से 90 किलोमीटर दूर किशनगढ़ के पास बसा एक गांव जिसका नाम है तिलोनिया…वहां एक ऐसा कॉलेज है जहां पर दर्जनों ऐसी महिलाएं है, जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह तक नहीं देखा… लेकिन इसके बावजूद भी वो विदेशों से आई महिलाओं को सोलर पैनल बनाना सिखा रही हैं…  बेयरफुट कॉलेज तिलोनिया में मन्ना और लीला देवी महिलाओं को सोलर पैनल बनाने की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। तो वहीं लीला देवी तो, विदेशों तक जाकर लोगों को सोलर पैनल बनाना सिखा रही हैं.. सोलर पैनल बनाने की ट्रेनिंग लेने वाली महिलाएं ऐसे देशों के दूरस्थ गांवों से हैं, जो अब तक सामाजिक रुप से काफी पिछड़े हुए हैं। या वो गांव जिनमें अब तक बिजली नहीं पहुंची है।

इन सोलर लैंपों से जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की किस्मत चमकने वाली है.. तो वहीं छात्रों को भी रात में पढ़ने के लिए रोशनी का सहारा मिल जाएगा। मैनपुरी की 23 पंचायतों में इन महिलाओं ने मिलकर सोलन लैंप बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है… ये लैंप 1 से 12 तक के छात्रों को उनकी क्लासज में ही उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए उन्हें महज 100 रुपये खर्च करने होंगे। आपको ये भी बता दें कि, इस महिला स्वयं सहायता समूह का चालीस हजार सोलर लैंप बनाने का लक्ष्य है।

इस कॉलेज में मन्ना और लीला जैसी करीब 35 महिलाएं है जो मास्टर ट्रेनर बनकर न केवल खुद की जिंदगी में बल्कि सामाजिक रुप से पिछड़ी इन विदेशी महिलाओं के जीवन में भी उजाला ला रही है। राजस्थान का एक छोटा सा कस्बा है तिलोनिया, जहां अफ्रीकी देशों की उन गरीब महिलाओं को सोलर टेक्नीशियन बनने के लिए तैयार किया जा रहा है, जिनके इलाकों में बिजली की काफी कटौती होती हैं।

इन महिलाओं को ट्रेनिंग देने वाली उनकी ही जैसी महिलाओं में से एक हैं मामूली पढ़ी-लिखी लीला देवी, जो करीब 15 सालों से दुनिया के लगभग 90 देशों के लोगों को सोलर लैंप बनाने के साथ, उनका रख-रखाव, और मरम्मत करना भी सिखा चुकी हैं.. आपको बता दें कि, लीला देवी पहले कढ़ाई का काम करती थी.. और बस उन्ही दिनों उन्हें सोलर लैंप बनाना आ गया.. लीला देवी का कहना है कि, सप्लाई से मिलने वाली बिजली भले ही चले जाए,, लेकिन सौर ऊर्जा का इस्तेमाल अपने हाथ में होता हैं… और इसके इस्तेमाल से आफ बिजली बिल देने से भी बच सकते हैं… और जहां बात आती हैं, गरीब, और पिछड़ें इलाकों की वहां तो सौर ऊर्जा किसी चमत्कार से कम नहीं हैं.. मन्ना और लीला देवी जिस तरह से गांवों और पिछड़ें इलाकों को रौशन करने में अपना योगदान दे रहे हैं.. उसी तरह हमें भी इस पहल में अपना सहयोग देना चाहिए… सौर ऊर्जा का इस्तेमाल न सही लेकिन बिजली का दुरूपयोग को होने से हम लोग जरूर रोक सकते हैं..

 

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