जैनत्व सुरक्षा संघ JSS जिसने पानी, पर्यावरण बचाने को छेड़ी अनोखी पहल

जैनत्व सुरक्षा संघ JSS

कहने और सुनने में जितनी आसान सी लगती हैं ये पक्तियां शायद असल धरातल पर उतनी ही नमुमकिन है क्योंकि आज के दौर में शायद गिने चुने इंसान ही पानी बचाने की मुहिम को असल धरातल पर अपने आप से जोड़ पाते हैं. वरना पानी को बर्बाद करने वालों की गिनती तो अनगिनतों में है.

आज पानी बचाने की मुहिम की शुरूवात तो हजारों सस्थाओं से लेकर न जानें कितने लोग कर रहे हैं लेकिन असल धरातल पर उसको उतारने में सभी नाकाम दिखाई देते हैं. लेकिन हम आपको आज बताने आए हैं एक ऐसी संस्था के बारें में जिन्होंने न केवल पानी बचाने की खास मुहिम की शुरूवात की है साथ ही जरुरतमंदों का पेट भरने की शायद जिम्मेदारी भी ले रखी है.

हम बात कर रहे हैं जैनत्व सुरक्षा संघ यानि की JSS….जिसने इस खास मुहिम की शुरूवात की है. आज हमारे आस पास की अगर बात करें तो जब भी कोई फंक्शन शादी समारोह जैसी चीज हमारे में होती है तो पानी पिलाने से लेकर बर्तन साफ करने में न जानें कितने लीटर पानी की बर्बादी हम सभी कर देते हैं.

क्योंकि हम सबको उस पानी की कद्र नहीं है, हमें ये तो मालूम है की जल एक सीमित संसाधन है लेकिन उसको बचाने के लिए हम नीजि स्तर पर कोई प्रयास नहीं करते. लेकिन जैनत्व सुरक्षा संघ ने इसकी जिम्मेदारी उठाने का शायद बेड़ा उठाया है. क्योंकि ये संघ समाज में होने वाले समारोह शादी से लेकर हर फंक्शन में जाकर कई माईने में समाज को बेहतर करने की कवायद कर रहा है.

बात अगर शादी की करें तो ये संघ विवाह पंडाल के पहले ही काउंटर पर वहां आए मेहमानों को जूठा ने छोड़ने के संकल्प पत्र भरवाता है लोगों को खाना बेकार न करने की जानकारी देता है. उसके बाद जब आप विवाह पांडल के अंदर जाते हैं तो आपको प्लास्टिक के न तो गिलास दिखाई देते हैं और न ही कोई डिस्पोजल आपको मिलता है तांबे के कलश व तांबे के लोटे में पानी….जिसे आज के समय में हर व्यक्ति पंसद खूब पसंद कर रहा है. वहीं जब दूसरे की जिस बर्तन में लोगों के लिए खाना बनाया जाता है या फिर जिस बर्तन में आप खाना खाते हैं उसे भी पानी से नहीं धोया जाता.

अब आपका यहां ये सोचना जायज है की फिर वो बर्तनों को साफ करने के लिए क्या करते हैं. जैनत्व सुरक्षा संघ JSS संस्था सभी जूठे बर्तनों को लकड़ी के बुरादे से साफ कराता है जिससे हजारों लीटर पानी की बचत होती है.इन सबको अलावा शादी या समारोह में बचा खाना JSS संघ उन लोगों तक पहुंचाता है जिनको इसकी ज्यादा जरूरत होती है.

इस तरह की अनूठी पहल की शुरुवात की अगर बात करें तो इसकी शुरूवात CA लोकेश पारख ने की है. जिन्होंने मुंबई में अपनी अच्छी खासी नौकरी को ठोकर मारकर भारत के विभिन्न हिस्सों में घूम कर अपनी एक टीम बनाई है. इस टीम में अब तक 16000 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं. जबकि इस संस्था की पूरे भारत देश में अब तक 26 जोन बन चुके हैं.

जाहिर है जिस तरह की मुहिम जैनत्व सुरक्षा संघ JSS संस्था ने छोड़ी है उससे हजारों लाखों लीटर पानी को बर्बाद होने से भी बचाया जा सकता है बल्कि पर्यावरण को भी दूषित होने से बचाया जा सकता है. आप भी जुड़े इस तरह की खास मुहिम से क्योंकि जल है तो कल है

 

 

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