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इंदरजीत कौर ने एसिड अटैक के बाद भी बदली अपनी जिंदगी, एसिड अटैक के बाद आज हैं सरकारी बैंकर

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इंदरजीत कौर

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एसिड अटैक के बाद लड़कियों की जिंदगी कही ना कही खत्म हो जाती हैं… कई लड़कियां तो एसिड अटैक के बाद अपनी जान तक दे देती हैं…. पर कुछ लड़कियां अपनी जिंदगी को इनते बड़े हादसे के बाद भी खत्म नही करना चाहती… बल्कि वो लड़कियां तो देश के लोगों से कंधे से कंधा मिलकर चल रही हैं…. ऐसी ही लड़कियों में से एक ऐसी ही लड़की के बारे में आज हम आपको बताने जा रहें हैं… जी हां एसिड अटैक होने के बाद 30 साल की इंदरजीत कौर की आंखे चले गई… उसके बाद भी वो आज लोगों के लिए किसी मिसाल से कम नही हैं…. साथ ही आपको बता दे की इंदरजीत कौर एसिड अटैक होने के बाद लबें समय तक हलातो से लड़ती रही…. कठिन हलातों का सामना करने के बाद अब इंदरजीत अपनी जिंदगी एक सरकारी बैकर के रुप में शुरु करने जा रही हैं… उनकी इस जिंदगी का क्रेडिट पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट को भी जाता हैं… पंजाब सरकार ने एडिस अटैक के बाद उनका मुफ्त इलाज कराने के साथ आर्थिक मदद करने के आदेश भी दिए थे… जिसके बाद उनकी जिंदगी में बदलाव आया…

आईए अब आपको बताते हैं की उनकी जिंदगी इस मोड़ पर कैसे आई….  दिसंबर 2011 से पहले तक इंदरजीत की जिंदगी आम लड़कियों की तरह ही थी… मोहाली के मरौली कलां गांव में रहने वाली इंदरजीत की जिंदगी में सारी खुशियां थी… वह हर रोज कॉलेज पढ़ने जाती थी.. हर लड़की की तरह वो भी सपने देख रही थी आसमान छुने के… लेकिन दिसंबर में एक ऐसा काला दिन आया जिस दिन ने इंदरजीत की पूरी जिंदगी बदल कर रख दी…. पड़ोसी गांव के मनजीत सिंह ने उन्‍हें शादी करने का प्रस्‍ताव दिया जिसे उन्‍होंने ठुकरा दिया…. अब मनजीत ठेहरा लड़का इंदरजीत लड़की… लड़की लड़के की बेज्जती करे तो मनजीत जैसे लड़को के दिल पर लग जाती हैं… जिसके बाद ऐसे लड़के पागल हो जाते हैं… और लड़की की जिंदगी खत्म करने की ठान लेते हैं… अब मनजीत को ना करने का खामियाजा इंदरजीत को तो भुगतना ही था… शादी से इंकार करने के बाद मनजीत एक दिन उनके घर में घुस आया और उन्‍हें एसिड से नहला दिया.. इंदरजीत कौर की आंखों की रोशनी तो गई ही, चेहरे, गर्दन, हाथों और शरीर के अन्‍य हिस्‍से पर भी गंभीर जख्‍म आए… अचानक हुए इस हादसे ने उनको तोड़ कर रख दिया…

इंदरजीत बताती हैं, ‘मैंने अपनी जिंदगी में बहुत बुरा समय देखा… मां के अलावा किसी रिश्‍तेदार ने मेरा साथ नहीं दिया… यहां तक कि मेरे भाई ने भी किनारा कर लिया… पढ़ाई छूट गई और मैं खुद को पूरी तरह अलग महसूस करने लगी… मैं हर वक्‍त बस रोती रहती थी… गांववाले और रिश्‍तेदार कहते थे कि मैं अपने परिवार और समाज पर बोझ बन कर जिऊंगी… उनके तानों से तंग आकर कुछ करने की सोची और देहरादून स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर विजुअली हैंडीकैप्‍ड में प्रवेश ले लिया.. वहां ऑडियो रिकॉर्डिंग तकनीक से पढ़ाई करना सीखा और 2016 में ग्रेजुएशन पूरी की… इसके बाद बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारियों में जुट गई.. तीसरे प्रयास में जून 2018 में केनरा बैंक में मेरा सिलेक्शन हो गया…

खुद पर हुए एसिड अटैक से पहले इंदरजीत बच्‍चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं पर इस हादसे ने उनकी आमदनी का एकमात्र जरिया भी छीन लिया….. गरीब परिवार की होने की वजह से वह प्‍लास्टिक सर्जरी जैसे महंगे इलाज नही करवा सकती थी….ऐसे में उन्‍होंने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अपने इलाज और आर्थिक मदद दिलवाने की गुहार लगाई…. याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया कि वह उनका मुफ्त इलाज तो करवाए ही, आर्थिक सहायता भी उपलब्‍ध कराए… इस कामयाबी के बाद वो अपने आप को अब किसी से कम नही समझती …

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