प्लास्टिक की जगह कुल्हड़ का इस्तेमाल करने को इन स्टूडेंट्स ने की अनोखी पहल

आजकल बाज़ार में नई नई चीजों का चलन बढ़ने लगा है। बाजार में आई कोई भी नई चीज फैशन बन जाती है और पुरानी चीज पीछे छूटती चली जाती है। बदलते फैशन के चलते दीयों की जगह जहां चाइनीज लाइटों ने ले ली वहीं कुल्हड़ों की जगह प्लास्टिक के गिलासों ने ले ली। आलम ये है कि डिस्पोजल में चाय पीने का चलन अब बढ़ गया है। जिसकी वजह से अब इक्का दुक्का दुकानों को छोड़कर अब मिटटी के कुल्हड़ विलुप्त हो रहे हैं।

मगर अब कुल्हड़ के इस्तेमाल के प्रति समाज को जागरूक करने के लिए बीएड के पांच स्टूडेंट्स ने बीड़ा उठाया है। ये स्टूडेंट्स अपने बैग में अपने बैग में कुल्हड़ लेकर चलते हैं। उसी में चाय पीते हैं और आसपास के लोगों को भी कुल्हड़ में चाय पीने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वैसे अगर देखा जाए तो हमारे स्वास्थ्य के लिए भी प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करना बेहद जरुरी है क्योंकि प्लास्टिक प्लास्टिक या प्लास्टिक की प्लेट में 35-40 तरह के कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के साथ हमारे शरीर में कैंसर को न्योता देते हैं। यही नहीं ये पर्यावरण को नुकसान भी पहुंचाते हैं।

वहीं अगर हम छोटी मोटी खाने की चीजों में मिट्टी के प्याले और कुल्हड़ों का इस्तेमाल करेंगे तो स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। कुल्हड़ की मिट्टी में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर में कैल्शियम बढ़ाता है। इससे हड्डियां मजबूत होती हैं। कुल्हड़ मिट्टी से बनाया जाता है, जिसके उपयोग से कोई बीमारी भी नहीं होती है। वहीं अगर कुल्हड़ों और मिटटी के प्यालों का चलन बढ़ेगा तो कुम्हारों की खस्ताहाली भी कम होगी और कुम्हारों का भी भला होगा। अगर इन स्टूडेंट्स की तरह ये पहल हम और आप करें तो वाकई प्लास्टिक से होने वाले नुकसानों से बचा जा सकता है।

 

 

 

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