आज भी बरकरार है नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य !

आज नेताजी को उनकी मौत के रहस्य के लिए अक्सर याद कर लिया जाता है। सुभाष चंद्र बोस का निधन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य है। आज भी नेताजी की मौत पर रहस्य बरकरार है। नेताजी के साथ वास्तव में क्या हुआ, इसे लेकर कई कहानियां रहीं हैं। दरअसल 18 अगस्त 1945 को वो हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे। इस सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जिसमें उनकी मौत हो गई थी। मगर उनकी रहस्यमयी मौत पर समय-समय पर कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं। कई बार भारत सरकार ने भी आरटीआइ के जवाब में ये बात साफ तौर पर कही है कि उनकी मौत एक विमान हादसे में हुई थी। ब्रिटेन की वेबसाइट ने ताइवान के एक अधिकारी द्वारा दिया गया सबूत जारी किया था जिसमें दावा किया गयाकि उसने 1945 में विमान हादसे में नेताजी की मौत के बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार कराया था।

मगर वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बोस की मौत पर फ़्रांसिसी सरकार की एक रिपोर्ट ने खलबली मचा दी। पेरिस के इतिहासकार जेबीपी मूर ने इस बात का दावा किया कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत ताइवान के विमान दुघर्टना में नहीं हुई थी। इस इतिहासकार का यहां तक कहना है कि नेताजी 1947 तक कहीं ना कहीं जिंदा थे। फ्रांसीसी गुप्त दस्वावेजों के अनुसार 18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस की मौत नहीं हुई थी, इसे केवल प्रचारित किया गया था। 11 दिसंबर 1947 के गुप्त दस्तावेजों के अनुसार सुभाषचंद्र बोस अपनी पहचान छिपाकर कहीं ना कहीं रह रहे थे।

इसलिए आज भी नेताजी की मौत का रहस्य खुल नहीं पाया है। आज भी हर कोई उनकी मौत का रहस्य जानना चाहता है। मगर ना ही उनकी मौत की गुथ्थी पूरी तरह सुलझ पाई है और ना ही विमान हादसे में हुई उनकी मौत को नकारा गया है।

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