कहानी उस महिला किसान की जो पति की आत्महत्या के बाद बनी गाँव की एकलौती महिला किसान

खेती किसानी की बातें सुनकर हमारे ज़हन में जो पुरुष किसान की तस्वीर आती थी अब वो बदल चुकी है क्योंकि महिला किसान भी अब इस क्षेत्र में पुरुषों को ना सिर्फ़ कड़ी टक्कर दे रही हैं बल्कि पुरुषों से आगे भी निकल रही हैं। हम आपको ऐसी ही महिला किसान के बारे में बताएंगे जो अपने गाँव में एकलौती महिला किसान हैं। वैशाली जयवंत भालेराव अपने गांव में सबसे अलग और सबसे अनोखी हैं, क्योंकि ये अपने गांव की इकलौती महिला किसान हैं।

वैशाली की उम्र 40 साल है इनके पति को गुजरे काफी लम्बा वक़्त हो चुका है। इनके दो बच्चे हैं जिनकी अब यही पालनहार हैं। वैशाली के वर्धा के पेठ गांव में पांच एकड़ खेत हैं, जिसमें वो कपास दलहन और सोयाबीन उगाती हैं। दोपहर की ताप्ती धूप में वो खेतों मिट्टी का मुआयना करती हैं। उनमें गजब की खेती की समझ और कूट कूट कर आत्मविश्वास भरा है। जो ये दिखाता है कि पुरुष के बिना भी स्त्री ख़ुद को इस विषम परिस्थितियों में अच्छी तरह ढाल सकती है। खेती की बारीकियां उन्हें इतनी अच्छी तरह से पता हैं जैसे शुरू से ही बस उन्होंने यही किया हो। मगर उनके लिए ये ज़्यादा पुराना नहीं है क्योंकि 20 साल की उम्र तक उनको खेती के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था। बस यही कोई छह साल पहले ही वो तब खेती किसानी के गुर सीखी हैं जब उनके पति ने फसल बर्बादी और बढ़ते क़र्ज़ के कारण आत्महत्या कर ली थी।

वैशाली शायद अपने पति की आत्महत्या के बाद बिखर जाती मगर उन्होंने अपने बच्चों के साथ तय किया वो जिएंगे, लड़ेंगे और जीतेंगे। वो टूटी नहीं ना ही उनके कदम डगमगाए बल्कि वो ऐसे चली कि फिर आज तक उन्हें कोई भी नहीं रोक पाया। आज गांव में वैशाली की हिम्मत और सूझबूझ की तारीफ़ करते कई लोग मिल जाते हैं। वैशाली को ग्रामीण न्यूज़ की पूरी टीम की तरफ़ से हमारा सलाम।

 

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