बिहार : अब इस गांव में किसी की मृत्यु पर नहीं होगा भोज, वजह जानना आपके लिए भी जरुरी

आज समय पूरी तरह से बदल चुका है मगर आज भी अगर कुछ नहीं बदला तो वो हमारी रीति-रिवाज़ हैं। जो आज भी अमीर गरीब सबके लिए एक बराबर ही हैं। मगर मधेपुरा के ग्रामीणों ने सदियों पुरानी परंपरा को ख़त्म करके समाज के सामने एक मिसाल पेश की है।

दरअसल हमारे समाज में मृत्यु भोज की प्रथा सदियों पुरानी है। अमीर लोग तो इस भोज को ख़ुशी ख़ुशी कर लेते हैं मगर गरीब परिवार इसके लिए जो कर्ज लेता है। उसका भार मरते दम तक उठाता रहता है। इसलिए मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड स्थित भदौल बुधमा पंचायत के भदौल गांव में ग्रामीणों ने एक फैसला लिया है कि किसी के निधन पर वो न तो मृत्यु भोज करेंगे और न ही किसी तरह का कर्मकांड ही होगा। पहले तो गांव के लोग इस बात पर थोड़ा हिचकिचा रहे थे, लेकिन बाद में सब सहमत हो गये। यकीनन ग्रामीणों के इस फैसले के बाद अब ना केवल अंधविश्वास की बेड़ियां टूटेंगी बल्कि भोज के नाम पर कर्ज के बोझ से भी गरीबों को निजात मिलेगी। वाकई में समाज में इसी तरह व्याप्त अन्य कुरीतियों को भी सुधारने की जरूरत है।

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