भजनदास पवार ने टीचर की नौकरी छोड़कर, संवारा किसानों का भविष्य

भजनदास पवार

समाज सेवा तो कई लोग करते है। कुछ मतलब से तो कुछ दिखावे से। चैरिटी करके भी लोग समाज सेवा में अपना योगदान देते है। तो ऐसे भी कुछ लोग होते है। जो लोगों की परेशानियां समझ कर खुदसे उनकी मदद में जुट जाते है। और ऐसे ही लोगों में से एक है। पुणे के रहने वाले भजनदास पवार। भजनदास पिछले 29 सालों से लगातार समाज सेवा में जुटे हुए है। उन्होने गांवों के विकास में अपना योगदान दिया है। साथ ही, जब समाजसेवी अन्ना ने आंदोलन किया। तो वहां भी भजनदास पवार ने उनका समर्थन किया। वो किसी भी सामाजिक कार्यक्रम से मुंह नहीं मोड़ा। उनकी इसी सेवा की बदौलत आज हजारों किसान अच्छी फसल उगा रहे है।

भजनदास पवार पुणे के रहने वाले है। और एक किसान परिवार के सदस्य है। किसान परिवार में होने के बावजुद उन्होने अपनी पढ़ाई पूरी की। साथ ही, पुणे के ही एक सरकारी स्कूल में टीचर के पद पर नौकरी भी हासिल की। भजनदास पवार नौकरी के बाद एक बेहतर जिंदगी गुजार सकते थे। लेकिन किसान परिवार से होने के कारण वो उनकी मुश्किलें बहुत अच्छे से जानते थे। इसलिए उन्होने किसानों के लिए कुछ करने की ठान ली। और नौकरी छोड़कर किसानों को सामाजिक और आर्थिक स्तर पर ऊपर उठाने में लग गए। उन्होने कम पानी में बढ़िया फसल कैसे उगाई जा सकती है? बारिश के पानी को लंबे वक्त तक कैसे बचाया जा सकता है? इन सब बातों की जानकारी किसानों को देना शुरू किया।

भजनदास पवार ने महसूस किया। कि कैसे किसान अपनी फसलों के लिए बारिश पर निर्भर रहते थे। और जब बारिश कम होती थी। तो किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था। तो वहीं सिंचाई का कोई दूसरा साधन भी नहीं था। और इसके कारण वहां के किसानों की स्थिति काफी खराब होने लगी थी। साल भर में इस गांव के किसान केवल दो फसले ही उगा पाते थे। हालात इतने बिगड़ गए थे। कि किसानों को दूसरे गांव के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती थी।

लेकिन भजनदास के एक उपाय से किसानों की स्थिति बेहतर होती गई। साल 1994 में भजनदास अन्ना हजारे के संपर्क में आए थे। जिसके कारण उनको महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजना ‘आदर्श ग्राम योजना’ में हिस्सा लेने का मौका मिला। जहां उन्होने बहुत कुछ सिखा। उन्होने बारिश के पानी को कैसे संरक्षित किया जाता है। इसकी ट्रेनिंग ली। आस-पास के गांवों में पीने तक को पानी नहीं बचा था। तब उन्होने अपनी पेंशन के पैसों से पानी के टैंकर खरीदे। और गांववासियों की प्यास बुझाने की कोशिश की।

इसके बाद भजनदास पवार ने गांव के युवाओं को इकट्ठा किया। और लोगों की मदद से बारिश के पानी को इकट्ठे करने के लिए पक्के तालाब बनायें। फिर उनमें पानी को इकठ्ठा किया गया। इस पानी से खेतों की सिंचाई डीप इरिगेशन तकनीक से की गई। इस तकनीक में पोधों की जड़ों में बूंद-बूंद करके पानी दिया जाता है। जिससे की कम पानी से ज्यादा फसल की सिंचाई की जा सके।

गौरतलब, आज यहां पर करीब 300 परिवार इस तकनीक का फायदा उठा रहे हैं। इस समय एक हेक्टेयर जमीन से करीब 10 टन अनार की पैदावार हो रही है। जबकि 1 हेक्टेयर में करीब 100 टन गन्ना उगाया जाता है। भजनदास पहाड़ी क्षेत्रों की ढलानों पर सीमेंट की नालियां बनाकर पानी को नीचे इकट्ठा करते हैं। उसके बाद सीमेंट का नाला बना कर उसे खेतों तक पहुंचाया जाता है। खेतों में ही उन्होने तालाब बनाकर उसे प्लास्टिक की सीटों से ढका है। जिससे की पानी भाप बनकर ना उड़ सकें। उनकी इस योजना को महाराष्ट्र सरकार ने भी प्रोत्साहित किया है।

इतना ही नहीं, साल 2013 में भजनदास ने जंगलों को संरक्षित करने का काम शुरू किया। उन्होने किसानों को जागरूक किया। कि जैव विविधता से ही प्रकृति को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। भजनदास की कोशिशों से आज 522 हेक्टेयर जंगल हरे भरे हैं। भजनदास की कोशिशों से कल तक जो किसान दूसरों के खेतों में मजदूरी करते थे। वो आज अपने खेतों से ही भरपूर फसल ले रहे हैं।

 

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