किन्नू क्वीन बनकर कर्मजीत कौर ने रौशन किया महिला किसानी का नाम

किन्नू क्वीन

पुरूष किसानों की तरक्की की कहानी तो आपने बहुत सुनी होगी। लेकिन क्या आपने कहीं सुना है। कि महिला किसान ने खेती कर रौशन किया देश का नाम। अगर नहीं सुना। तो हम आपको सुनाना चाहते है। पंजाब की एक ऐसी महिला की कहानी, जिसने खेती, किसानी में भी महिलाओं का नाम रौशन किया है। हालांकि, देश की महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से पीछे नहीं है। लेकिन अब तो उनका नाम देश के किसानों में भी गिना जाने लगा है। हम बात कर रहे है। पंजाब के फाजिल्का जिले की रहने वाली महिला किसान कर्मजीत कौर की।

पूरे पंजाब में कर्मजीत कौर को किन्नू क्वीन के नाम से जाना जाता है। कर्मजीत कौर 60 साल की एक बूढ़ी महिला है। और इस नाम की उपाधि उन्हें खुद तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह ने दी है। किन्नू क्वीन कर्मजीत कौर ने बड़ी मेहनत के बाद ये मुकाम हासिल किया है।

किन्नू क्वीन कर्मजीत कौर की ये कहानी तब शुरू हुई। जब साल 1977 में वो शादी करके राजस्थान से पंजाब आई। किन्नू क्वीन में कुछ कर दिखाने की चाह तो थी। लेकिन रूढ़िवादी समाज के चलते वो सिर्फ 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाई। कम पढ़ी-लिखी होने के कारण किन्नू क्वीन कर्मजीत कौर ने किसानी की राह को अपना लिया। और ससुराल से मिली 45 एकड़ की जमीन पर खेती करना शुरू कर दिया। साल 1979 में कर्मजीत कौर ने सबसे पहले 4 एकड़ की जमीन पर किन्नू के बाग लगाए। उत्पादन अच्छा होने से कर्मजीत का हौसला और बढ़ गया। जिसके बाद अब किन्नू क्वीन 23 एकड़ की जमीन पर किन्नू की खेती करने लगी है। और बाकी बचे 7 एकड़ पर उन्होनें आड़ू, आलू-बुखारा, नाशपाती, जामुन, अमरूद, खजूर, गेहूं, मक्की, सरसों और सब्जियों की खेती करना शुरू कर दिया है।

जब कर्मजीत ने अबोहर के बागवानी विभाग और कृषि वैज्ञानिकों की राय लेकर खेती करना शुरू किया। तो 2001 में कर्मजीत कौर के किन्नू के बाग पूरे दुनिया में मशहूर हो गए। साथ ही उनके बागों में किन्नू की उपज प्रति एकड़ पर 200 क्वींटल तक होती है। और उनकी इस तरक्की के लिए उनको कनाडा और अमेरिका के साथ कई और देशो से भी अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिले हैं। इतना ही नहीं, भारत सरकार ने भी कर्मजीत कौर को सम्मानित किया है।

किन्नू क्वीन की मेहनत के चलते साल 2013 से 2016 तक उन्हें पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंधकीय बोर्ड का सदस्य भी बनाया गया। 60 साल की ये बूढ़ी महिला सिर्फ खेती ही नहीं करती। बल्कि अपने फलों की मार्केटिंग भी खुद करती है। पहले जहां, इस महिला के खेती करने पर गांव के लोगों ने विरोध जताया था। एक औरत का खेती करना उनको पसंद नहीं आया था। तो अब वही लोग कर्मजीत कौर से खेती के बारे में सलाह लेने आते है। पंजाब, हरियाणा से भी कई व्यापारी उनके पास खरीददारी के लिए आते है। साथ ही, कर्मजीत कौर की ये कहानी इस कहावत का भी एक उदाहरण बनी है। कि, मेहनत का फल मीठा होता है।

 

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