कोई है हेलीकॉप्टर और चैटिंग का शौकीन तो कोई रह चुका है मॉडल : ज़रा समझिए शिवराज के इन बाबाओं का समीकरण !

मध्यप्रदेश में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वोटर्स को लुभाने के लिए शिवराज सरकार कोई मौका नहीं छोड़ रही है। शिवराज सरकार ने साधु-संतों को लुभाने के लिए पांच साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दे दिया है। इन पांच साधुओं के नाम हैं- नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, कम्प्यूटर बाबा, भय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत। राज्य में शायद पहली बार है जब संतों को राज्य मंत्री का दर्जा दिया गया है।

हर कोई ऐसे में हैरान है कि आख़िर इन बाबाओं को राजयमंत्री का दर्जा क्यों दे दिया गया। तो आइए में बताती हु इसके पीछे की पूरी कहानी

दरअसल ये पांच बाबा सिंह चौहान के ख़िलाफ ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ निकालने वाले थे। दरअसल पिछले साल 2 जुलाई को शिवराज सरकार की ओर से 6.67 करोड़ पौधे लगाने के दावे को महाघोटाला बताया गया था और ये पांच बाबा प्रदेश के 45 जिलों में इन पौधों की गिनती करवाने वाले थे जिससे वो शिवराज सरकार की पोल खोल सकें।

सिर्फ़ एक यही कारण नहीं है बल्कि शिवराज सिंह चौहान ने जिन बाबाओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है वो सभी बाबा और संत प्रदेश के नर्मदा पट्टी पर विशेष पकड़ रखते हैं। मध्य प्रदेश की राजनीति में नर्मदा पट्टी की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में कोई भी सरकार इसकी मदद के बिना नहीं बन सकती। प्रदेश में कुल 230 विधानसभा सीटें हैं जिसमें नर्मदा पट्टी पर करीब 120 सीटें हैं। अब आप ख़ुद ही सोच लीजिए की आख़िर इन इन बाबाओं को समय में राज्य मंत्री का दर्जा क्यों दिया दिया गया है। अब मुख्यमंत्री पर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री ने इन बाबाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं। यही नहीं, सवाल यह भी है कि क्या बाबा सरकार को ब्लैकमेल कर रहे थे। मगर सरकार की ओर से सफाई में ये कहा गया है कि ये संत लोगों को नर्मदा के संरक्षण को लेकर जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें स्वच्छता का संकल्प भी दिलाएंगे।

आइए जानते हैं उन पांच संतों के बारे में-

कंप्यूटर बाबा:

स्वामी नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा के बारे में कहा जाता है कि वो अपने साथ हमेशा लेपटॉप रखते हैं। यही वजह है कि उन्हें लोग कंप्यूटर बाबा के नाम से जानते हैं। साथ ही लेटेस्ट गैजेट्स के भी वो काफी शौकीन हैं. उनके पास वाई-फाई डोंगल, मोबाइल और यहां तक की एक हेलीकॉप्टर साथ रहता है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल की आप पार्टी से टिकट भी मांगा था. पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया. कंप्यूटर बाबा लगातार शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर हमले बोलते रहे हैं.

भय्यू महाराज:

जमींदार और पूर्व मॉडल भय्यू महाराज का वास्तविक नाम उदय सिंह देशमुख है. भय्यू महाराज अपने लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते हैं. इनकी शान ओ शौकत भी कम नहीं है. व्हाइट मर्सिडीज एसयूवी से खुद सफर करते हैं साथ ही उनके साथ कई फॉलोअर का काफीला भी चलता है.
भय्यू महाराज ने 2011 में लोकपाल आंदोलन के समय बड़ी भूमिका निभाई थी. बताया जाता है कि अन्ना का अनशन तुड़वाने के लिए केंद्र सरकार ने दूत बनाकर भेजा था. बतौर मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सद्भावना उपवास भय्यू महाराज ने ही तुड़वाया था.

हरिहरानंद:

नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा में शामिल रहे हरिहरानंद ने नर्मदा संरक्षण के लिए काफी काम किया है. नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा 11 दिसंबर 2016 से 11 मई 2017 तक 144 दिनों तक चली थी.

योगेंद्र महंत:

योगेंद्र महंत को भी शिवराज सरकार ने राज्यमंत्री का दर्जा देने का फैसला किया है. वह भी “नर्मदा घोटाला रथ यात्रा” के संयोजक थे. इन्होंने एक मई से 15 मई तक बीजेपी सरकार के खिलाफ यात्रा निकालने का फैसला किया था.

नर्मदानंद जी महाराज:

मध्य प्रदेश के नामी संतों में से एक हैं. हनुमान जयंति और राम नवमी के मौके पर हर बार यात्रा निकालते हैं. उन्होंने पिछले साल कई शोभा यात्रा का आयोजन किया था. अब उन्हें मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य मंत्री का दर्जा दिया है.

दिलाए राज्यमंत्री बनने के बाद इन बाबाओं को कई सरकारी सुविधाएं दी जाएंगी। 7500 रुपए का मासिक वेतन दिया जाएगा, वहीं गाड़ी और 1000 किमी का डीजल दिया जाएगा। मकान के किराए के तौर पर 15000 रुपए मकान का किराया दिया जाएगा, वहीं 3000 रु. सत्कार भत्ता मिलेगा। इन्हें स्टाफ मिलेगा और ये अपना पीए भी रख सकेंगे।

 

 

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