पड़ोसी देशों में इतनी कम है पेट्रोल की कीमत, जानें क्यों बढ़ रहे हैं इतनी तेज़ी से दाम

पड़ोसी देशों में इतनी कम है पेट्रोल की कीमत, जानें क्यों बढ़ रहे हैं इतनी तेज़ी से दाम

पड़ोसी देशों में इतनी कम है पेट्रोल की कीमत, जानें क्यों बढ़ रहे हैं इतनी तेज़ी से दाम   भारत में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमत सातवें आसमान पर पहुंच गई है. दिल्ली में पेट्रोल की क़ीमत 76.57 रुपए प्रति लीटर पहुंच गई, इससे पहले दिल्ली में 14 सितंबर, 2013 को पेट्रोल का दाम 76.06 रुपए प्रति लीटर पहुंचा था.

पेट्रोल की बढ़ती कीमत का ठीकरा अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमत और डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए में जारी गिरावट पर फोड़ा जा रहा है। मगर में यहां आपको ये बता दूँ कि पेट्रोल की कीमत के लिए केवल अनतर्राष्ट्रीय बाज़ार ही ज़िम्मेदार नहीं हैं बल्कि पेट्रोल और डीज़ल की कीमत में देश के अंदर अलग-अलग राज्यों में लगाए जाने वाले टैक्स की भी बड़ी भूमिका होती है।

अब यहां यही बात आपको एक उदहारण देकर समझाती हूं कि दिल्ली में पेट्रोल की क़ीमत 76 रुपए प्रति लीटर है और इसमें से अगर टैक्स निकाल दें तो क़ीमत सीधे आधी हो जाएगी।

वहीं लोग इतने परेशान हैं कि इन दिनों सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल की कीमत काफ़ी ट्रेंड हो रही हैं। यही नहीं लोग अब भारत में पेट्रोल की बढ़ती क़ीमत की तुलना अब पड़ोसी देशों से करने लगे हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश में पेट्रोल की क़ीमत भारत की तुलना में बेहद कम है।

अब में आपको भारत के पड़ोसी देशों में पेट्रोल की क़ीमत प्रति लीटर रुपए में बताती हूँ।

पाकिस्तान- 51.79
नेपाल- 67.46
श्रीलंका- 64
भूटान- 57.24
अफ़ग़ानिस्तान- 47
बांग्लादेश- 71.55
चीन- 81
म्यांमार- 44

अब ऐसे में लोगों का गुस्सा होना तो जायज़ ही है। क्योंकि इसपर अब ये तर्क दिया जा रहा है कि अगर भारत से ग़रीब देश सस्ता पेट्रोल बेच सकते हैं तो भारत ऐसा क्यों नहीं कर रहा है? तो इसका मुख्य और सीधा साधा कारण यही है कि भारत के हर राज्य में अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। इन टैक्सों में उत्पाद कर, वैट, चुंगी और सेस लगाए जाते हैं। और कोई भी सरकार इसे हटाना नहीं चाहती जानते हैं क्यों क्योंकि सरकार पेट्रोल और डीज़ल से मिलने वाले राजस्व में कोई कटौती नहीं करना चाहती है. पेट्रोल और डीजल से सरकारों को राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता है और इससे कोई सरकार समझौता नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि सरकार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप तो खूब करती हैं मगर बावजूद इसके पेट्रो और डीज़ल की कीमतें कम नहीं करती हैं।

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