आज भी लालटेन की धुंधली रौशनी में जीने को मजबूर हैं दर्जनों गांव, नेता तो बदले मगर हालात नहीं…

जहां देश के कई शहरों में बड़ी बड़ी इमारतें बन रही हैं। लोग हर दिन नई नई चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं कटोरिया के लगभग एक दर्जन से ज्यादा गांव के लोग आजादी के 70 सालों बाद भी आज बिजली-पानी और पक्की सड़क से मूलभूत साधनों से वंचित हैं। एक तरफ जहां शहर रौशनी से झिलमिल हैं तो वहीं यहां आज भी ग्रामीण लालटेन के पुराने युग में जीने को मजबूर हैं।

उत्तरी कसवा वसीला पंचायत के भीमाडीह, दूधनियां, पारथान, उल्ही, आदिवासी बाहुल गांव भूंइयाडीह, ताराटांड़, मंजूरा, तुलसीपुर, कैलाशपहाड़ी आदि गांवों को अब तक बिजली की सुविधा से नहीं जोड़ा गया है। जिस कारण शाम होते ही ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर है। ये ग्रामीण शाम होने के बाद अपने सारे काम लालटेन की धुंधली सी रौशनी में ही करते हैं। इस लालटेन की रोसगहनी बेहद कम होने उन्हें ठीक से कुछ दिखाई भी नहीं देता। यही नहीं स्कूल जाने वाले बच्चे भी इस कम रौशनी में पढ़ने को मजबूर हैं।

इन सभी गाँव की आबादी लगभग पांच हजार से भी ज़्यादा है। इस संबंध में ग्रामीण कई बार गुहार भी लगा चुके हैं। मगर आजतक किसी ने भी इनकी परेशानी नहीं सुनी और इनकी समस्या जस की तस बनी हुई है। यही नहीं कच्ची सड़कों की वजह से ग्रामीणों को आने जाने में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मगर अभी तक ना ही किसी को पक्की सड़क मिली और ना ही किसी को बिजली की सुविधा मिली।

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password