एक ऐसा गांव जहां नहीं है कोई अन्धविश्वास, बस है तो कोई डॉक्टर इंजीनियर या है अध्यापक

एक ऐसा गांव जहां नहीं है कोई अन्धविश्वास, बस है तो कोई डॉक्टर या है अध्यापक

एक ऐसा गांव जहां नहीं है कोई अन्धविश्वास बस है तो कोई डॉक्टर इंजीनियर या है अध्यापक हमारा देश चाहे कितना भी आगे क्यों ना बढ़ जाए मगर अंधविश्वास तो आज भी कायम है। हमारे देश में आज भी कई ऐसी कुरीतियां है जो पैर पसारे हैं। वहीं शहर फिर भी आज अंधविश्वास के चंगुल से छूठ गए हैं मगर गांव तो आज भी इसकी चपेट में हैं। मगर आज हम आपको एक ऐसे गांव की कहानी बताएंगे जिसने अंधविश्वास को दूर करने के लिए एक अनूठी पहल की है। दरअसल राजस्थान के चूरू जिले में एक ऐसा अनोखा गांव जहां के लोग भगवान् में तो विश्वास रखते हैं मगर किसी भी धार्मिक कर्मकांड में विश्वास नहीं करते। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस गांव में कोई भी मंदिर नहीं है और यहां मृतकों की अस्थियों को नदी में प्रवाहित करने तक का चलन नहीं है। दाह संस्कार के बाद ग्रामीण बची हुई अस्थियों को दुबारा जला कर राख़ कर देते हैं। मगर वो इसे नदी में नहीं बहाते हैं। इस गांव के लोग अंधविश्वास और रूढ़िवादिता से बाहर निकल कर शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार के क्षेत्र में सफलता हासिल कर अपने गांव को एक अलग पहचान दे रहे हैं। इस गांव के 30 लोग सेना में, 30 लोग पुलिस में, 17 लोग रेलवे में, और लगभग 30 लोग चिकित्सा क्षेत्र में गांव का नाम रोशन कर रहे हैं। यही नहीं गांव के पांच युवकों ने खेलों में राष्ट्रीय स्तर पर पदक प्राप्त किये हैं और दो खेल के कोच हैं। ये गांव उन लोगों के मुँह पर कड़ा तमाचा है जो ये सोचते हैं कि गांव में लोग सिर्फ खेतीवाड़ी या किसानी ही कर सकते हैं। वाकई में देश के हर व्यक्ति को इस गांव से सीख जरूर लेनी चाहिए।

 

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