Gujarat Prostitute Village को Search करने पर सामने आती है, इस गांव की घिनौनी परंपरा

Gujarat Prostitute Village गुजरात में एक वैश्याओं के गांव के नाम से जाना जाता है। तवायफों के इस गांव का नाम वाडिया है।

Gujarat Prostitute Village क्या आपने ऐसे किसी गांव के बारे में सुना है? अगर नहीं तो आप Google पर जाकर इसके बारे में Search कर सकते है। और जब आप ऐसा करेंगे तो आपके सामने होगा। गुजरात का वाडिया गांव। वाडिया गांव को देश भर में Gujarat Prostitute Village के नाम से भी जाना जाता है। ये गांव गुजरात की राजधानी गांधीनगर से करीब 250 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है। इस गांव की हर लड़की चाहें वो एक मासूम बच्ची हो, या कोई बूढ़ी औरत सभी वैश्या है। गांव में लड़कियों को जन्म के बाद से ही वैश्या करार कर दिया जाता है।

Gujarat Prostitute Village यानि की गुजरात वैश्या गांव। इस गांव में परंपरा के नाम पर लड़कियों को बनाया जाता है वैश्या।

वैसे तो गुजरात देश के सबसे स्वच्छ और विकसित राज्यों में से एक है। यहां तक की देश के प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि भी है। लेकिन गुजरात के वाडिया गांव की परंपरा आपके रौंगटे खड़े कर देगी। यहां 12 साल की उम्र में लड़की का मां बनना गांववासियों के लिए आम बात है। वैश्याओं के इस गांव में लड़कियों को मजबूरी में ये काम करना ही पड़ता है। क्योंकि इस गांव में इज्जत की रक्षा करने वाले पिता और भाई खुद अपनी मां, बहनों से धंधा करवाते है।

खुद लड़कियों के पिता, भाई, अपनी ही मां, बहन की दलाली करते है। ग्राहकों को न्योता देकर बुलाते है। ये सुनकर आप सोच रहे होंगे। कि कैसे कोई पिता और भाई अपनी ही मां और बहनों की इज्जत बेंच सकता है। लेकिन ये बिल्कुल सच है। जहां लड़कियां खुदको को पिता और भाई के साये में महफुज समझती है। वहीं इस गांव की हकीकत किसी भी लड़की का दिल दहला सकती है।

वाडिया गांव में ये घिनौनी परंपरा आजादी के बाद से ही चली आ रही है। इस गांव की हर बच्ची वयस्क होते ही वैश्या बना दी जाती है। इसी के चलते कई लोग Gujarat Prostitute Village को बदनाम गांव भी कहते है। इस गांव में रही महिलाएं यायावर जनजाति की है। जिसे सरनिया जनजाति के नाम से भी जाना जाता है। इस जनजाति समूह के लोग मुख्य रूप से राजस्थान में रहते है। और वाडिया गांव में रहनी वाले सरनिया जनजाति के लोग आजादी से पहले राजस्थान छोड़कर गुजरात आए थे। जिसके बाद से ही वाडिया गांव की औरतों से जिस्म का धंधा कराया जा रहा है।

इसी बदनाम गांव Gujarat Prostitute Village की एक वैश्या रह चुकी रानी को कुछ सालों पहले विक्रम नाम के शख्स ने छुटकारा दिलाया था। विक्रम ने दलाल को 3 लाख रुपये देकर रानी को इस घिनौनी परंपरा से आजादी दिलाई थी। गुजरात के इस वैश्या गांव की 360 औरतों के बच्चों के पिता का कोई अता-पता तक नहीं है। जिनमें से बहुत सी लड़कियां तो अभी बालिग तक नहीं हुई है। वाडिया गांव में करीब 50 दलाल है। जो बस लड़कियों के पैदा होने की राह तकते रहते है। और उनका जन्म होते ही, भूखे भेडियों की तरह अपनी लार टपकाने लगते है।

55 साल की सनीबेन भी इसी वैश्या समूह का हिस्सा रह चुकी है। लेकिन अब वो इस धंधे से बाहर आकर दुसरे गांव में छोटे मोटे काम करके अपना पेट पाल रही है। सनीबेन ने बताया है। कि उनके वक्त में बच्चा गिराने का कोई आसान तरीका नहीं होता था। जिसकी वजह से वो 11 साल की उम्र में ही मां बन गई थी। लेकिन अब लड़कियां बिना किसी संकोच के गर्भ निरोधक गोलियां खा लेती है। और बच्चा गिरवाने से भी नहीं डरती।

इस गांव Gujarat Prostitute Village की औरतों ने तो शादी का नाम तक नहीं सुना होगा। पति, प्यार, दोस्ती, इनमे से किसी भी रिश्ते से इस गांव की कोई भी औरत का कभी परिचय तक नहीं हुआ। एक वैश्या की जिंदगी किस हद तक बद्तर हो सकती है। इसका आप और हम तो अंदाजा भी नहीं लगा सकते है। लेकिन वाडिया गांव की औरतें इस बद्तर जिंदगी को कई दशको से जीती चली आ रही है। और क्या पता, शायद उनकी आने वाली पीढ़ी भी इसी जिंदगी को जीने के लिए मजबूर रहे।

जानकारी के मुताबिक, गांव की औरतों ने कई बार पुलिस थाने जाकर इस बारे में जानकारी भी दी है। लेकिन लापरवाह पुलिस ने कभी किसी कार्यवाही को अंजाम तक नहीं पहुंचाया। इस गांव की औरतों के लिए वैश्या बनना अब परंपरा ही हो चुकी है। अपनी इच्छा से या जबरदस्ती उनको ये काम करना ही पड़ रहा है। क्योंकि ना तो सरकार इस ओर अपना ध्यान दे रही है। और ना ही पुलिस को कोई परवाह है।

जिस देश में जिस्म फरोशी करना गैर-कानूनी है। उसी देश के इस गांव में खुलेआम इस धंधे को परंपरा का रूप दे दिया गया है। वैसे तो इस गांव की हकीकत किसी से भी नहीं छुपी है। और छुपेगी भी कैसे? क्योंकि गूगल तक इस गांव की पहचान बता रहा है। आप गुगल पर Gujarat Prostitute Village को सर्च करके देखेंगे। तो इस गांव से जुड़ी ना जाने कितनी तस्वीरें, कितनी कहानियां किताब की तरह खुल कर आपके सामने आ जायेंगी।

गुजरात को देश के प्रधानमंत्री रोल मॉडल का रुप देकर निखारना चाह रहे है। लेकिन इसी गुजरात के वाडिया गांव की हकीकत की ओर कोई सरकार, कोई पुलिस ध्यान नहीं देना चाह रही है। देश में जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का अभियान चलाया जा रहा है। वहीं इस गांव की कई मासूम बच्चियां खेलने-कूदने की उम्र में बच्चों को जन्म दे रही है। पढाई-लिखाई तो दूर उन्हें अपना बचपन जीने का भी मौका नहीं मिल रहा है।

 

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