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विकास की नारा देने वाली प्रदेश सरकार में, 108 के अभाव मे बेबस लोगों की हो रही मौत

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यूपी एंबुलेंस

विकास की नारा देने वाली सरकार में, यूपी एंबुलेंस के अभाव में बेबस लोगों होती मौत

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अगर बात देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश की करें तो जहां एक तरफ प्रदेश सरकार हर बार प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बताने की जुगत में लगी रहती है वहीं दूसरी तरफ सरकार की नाकामियों की पोल व्यवस्थाऐं खोल देती हैं. जैसा एक बीते दिन देवरिया के एक गरीब परिवार को एंबुलेंस ना मिलने की वजह से बच्चों को उस परिवार के सदस्य ठेले पर लाद कर अस्पताल पहुंचे थे ठीक उसी तरह का मामला एक बार फिर देवरिया जनपद से सामने आया है. जोकि प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से लेकर प्रशासन व्यवस्था तक की पोल खोलने के लिए काफी है.

बात अगर देवरिया जनपद की करें तो, यहां एंबुलेंस व्यवस्था उन लोगों के लिए ध्वस्त दिखाई देती है जिनकी इसे सबसे ज्यादा जरूरत होती है. जिस कारण आये दिन गरीबी से लाचार लोग कही ईलाज के आभाव में तो कही 108 के इंतजार में दम तोड़ रहे हैं और प्रशासन से लेकर जनपद के अधिकारी तक इस चीज को अच्छी तरह जानने के बाद भी नजरअंदाज कर रहे हैं और कार्यवाही के नाम पर कागजों की खाना पूर्ति और आश्वासन देकर चले आते हैं.

देवरिया जनपद रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के पांडेचक निवासिनी उर्मिला उर्फ चंदा देवी बीते सोमवार से जिला अस्पताल में भर्ती थी. जिसके बाद मंगलवार को उनकी तबियत बिगड़ गई और आनन फानन में डॉक्टरों ने उन्हें दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया. जिसके बाद परिवार वालों ने एंबुलेंस को फोन किया ताकि वो अपने मरीज को दूसरे अस्पताल ले जा सके. जिसके बाद एंबुलेंस तो आई….पांच घंटे बाद…तब जब कर चंदा देवी की जान जा चुकी थी. जिसके बाद आक्रोशित परिजनों ने शव को जिला अस्पताल पर रख हंगामा किया जिसके बाद सदर कोतवाली सहित एसडीएम सदर अस्पताल गेट पर पहुंचकर मामले को शांत कराया और परिजन मान गये.

क्योंकि उन्हें मामना ही था. इसके अलावा उनके पास कोई और चारा नहीं था. हालांकि यहां सवाल ये खड़ा होता है कि, प्रदेश सरकार के दावे तब काम क्यों नहीं आते जब किसी मजबूर इंसान को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है. यहां सवाल ये उठता है कि, जब किसी मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में रेफर किया जाता है…तब जबकि उसकी स्थिति नाजुक होती है तो अस्पताल प्रशासन की इसमें कितनी जिम्मेदारी बनती है कि, वो मरीज को उस अस्पताल तक पहुंचाये जहां के लिए उसने मरीज को रेफर किया है. यहां सवाल ये खड़ा होता है कि, जब एंबुलेंस को 2 बजे दिन में फोन किया जाता है तो एंबुलेंस शाम 7 बजे कैसे और क्यों आती है…

वहीं अगर सूत्रों की मानें तो घटना के बाद से परिजनों ने जनपद के सीएमओ को अनकोबार सीयूजी नंबर पर फोन किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया. इस तरह की घटनाऐं प्रदेश में आए दिन बाहर आ रही है. ऐसे में ये भी सवाल उठता है कि, प्रदेश प्रशासन और स्वास्थय प्रशासन इस दौरान क्या कर रहा है.

तो उसका जवाब…वो शायद सो रहा है…जिसके चलते वो मजबूर इंसान और उनकी जिंदगियां या तो उन्हीं मजबूरियों से समझौते कर रहे हैं या फिर अपने संसाधनों की जुगत कर रहे हैं क्योंकि सरकार के दावे बस बोलने के काम आते हैं…असल धरातल पर नहीं.

 

 

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