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Kisan bulletin 16th April 2019- अब आसानी से मिलेगी किसानों को खाद!

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Kisan bulletin 16th April 2019

Kisan bulletin 16th April 2019- अब आसानी से मिलेगी किसानों को खाद!

Kisan bulletin 16th April 2019-

  1. हाल ही में अमेरिका की खाद्य और पेय पदार्थ की दिग्गज कंपनी पेप्सिको ने गुजरात के तीन किसानों पर मुकदमा दायर किया है। दरअसल, पेप्सिको का आरोप है कि ये किसान अवैध रूप से आलू की एक किस्म जो कि पेप्सिको के साथ रजिस्टर है उसे उगा और बेच रहे थे। कंपनी का दावा है कि, आलू की इस किस्मो से वो लेस ब्रैंड के चिप्स बनाती है और इसे उगाने का अधिकार सिर्फ उसी के पास है। खबरों के माने तो, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को सूचित किया है कि वो अपने ब्रांड के लिए चिप्स बनाने के लिए पंजीकृत किस्म FL 2027, जो कि FL 1867 और Wischip किस्मों का एक संकर है उसका इस्तेमाल करती है। कंपनी ने प्रोटेक्शोन ऑफ प्लांट वैराइटी एंड फार्मर्स राइट एक्ट, 2001 के तहत FL 2027 किस्म को पंजीकृत किया है। कंपनी की शिकायत और आलू की किस्म के पंजीकरण को देखते हुए वाणिज्यिक अदालत ने पिछले सप्ताह गुजरात के तीनों किसान, छबिलभाई पटेल, विनोद पटेल और हरिभाई पटेल के 26 अप्रैल तक आलू उगाने और बेचने पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने तीनों किसान से जवाब भी मांगा है।कंपनी का कहना है कि जनवरी में ये जानकारी मिली कि यह किसान इस किस्म के आलू उगा रहे हैं। इस पर आलू के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे गए, साथ ही आईसीएआर और शिमला में सेंट्रल पोटेटो रिसर्च इंस्टीभट्युट में भी भेजा गया। जांच में पता चला कि किसान पंजीकृत किस्मे के आलू ही उगा रहे थे। कंपनी ने लैब की रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा की है।
  2. पहली बार किसानों के खेत में तीन तरह की अरहर की फसल दिखने से किसान परेशान हैं.. दरअसल किसानों की अरहर की फसल की हालत ये हो गई है कि किसान किसे पका कहें और किसे कच्चा… समझ नहीं पा रहे हैं। फूल लगे अरहर तोड़ना किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है। आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के 2500 हेक्टेयर में किसानों ने अरहर की खेती की है। ज्यादातर किसानों के खेत में फसलें खड़ी हुई है। किसान अरहर काटकर घर में सहेजते थे। लेकिन, इस साल अरहर तीन तरह से पक रही है। कुछ दिन पहले फूल लेकर दाने बने, वो पक गए, और बाद में जो दाने बने वो अभी तक कच्चे हैं। जिसकी वजह से अब फिर फूल लेकर दाने बन रहे हैं। किसान यह नहीं तय कर पा रहे है कि अरहर कैसे काटें। किसानों का कहना हैं कि, इस साल अरहर फसल से काफी नुकसान हुआ है। फसल न पकने में है और न कच्ची है। उत्पादन प्रभावित हो रहा है, साथ ही फसल में कीट भी लग रहे हैं। ऐसे में किसानों से गुजारिश है कि, निराश ना हो… जिन खेतों में अरहर की फसल तैयार है, उसे किसान काट लें। और जिसमें ज्यादा छीमी दिखें, उस अरहर को तुरंत काट लें, वरना गर्मी और धूल से खेत में ही छीमी से दाने निकल जाएंगे, जिसके कारण किसानों का और ज्यादा नुकसान हो सकता है।
  3. उत्तर प्रदेश के मेरठ की मवाना शुगर मिल के अंदर आने वाले फिटकरी क्रय केंद्र पर तौल शुरू कराने के लिए सोमवार को गन्ना किसान सचिव से मिले। इस पर सचिव ने तत्काल क्रय केंद्र पर तौल शुरू कराने का किसानों को आश्वासन दिया। आपको बता दें, फिटकरी गांव के किसानों का आरोप हैं कि, मवाना शुगर मिल ने चलती हुई तौल को बंद करा दिया था। हालांकि किसानों का गन्ना अब भी खेतों में खड़ा हुआ है। जिसकी वजह से किसान अपना गन्ना क्रय केंद्र पर नहीं डाल पा रहे थे। किसान इस समस्या को लेकर सोमवार को सहकारी गन्ना विकास समिति के मुख्य सचिव प्रदीप शर्मा से मिले और उन्हें मामले की जानकारी से अवगत कराया। जिसके बाद समिति सचिव ने किसानों की समस्याओं को सुनने के बाद तुरंत क्रय केंद्र पर तौल चालू कराने के निर्देश दिए। हालांकि, सचिव के आश्वासन के बाद किसान वापस लौट गए। जिसके बाद सचिव प्रदीप शर्मा के मुताबिक, किसानों के गन्ने की तौल शुरू करा दी गई है। और जल्दी ही किसानों का पूरा गन्ना खरीद लिया जाएगा।
  4. गेहूं के सीजन में खाद के लिए किसानों को हर बार जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं, उन परेशानियों को फिर से न झेलना पड़े… इसके लिए इफको बाजार अभी से ही तैयारियों में जुट गया है। दरअसल, धान की खेती में खाद की ज्यादा खपत को देखते हुए अभी से ही भंडारण किया जा रहा है। गेहूं सीजन में इफको ने यूरिया की कुल बिक्री का 38 प्रतिशत बिक्री अपने केंद्रों से की है। इफको ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में फॉस्फोरस की बिक्री 45 प्रतिशत की है। जिसमें फॉस्फोरस एनपीके डीएपी आदि शामिल है। इफको ने एनपीके डीएपी खाद का भंडारण शुरू कर दिया है। जिसाक सबसे बड़ा कारण यही है कि, खेत की बोवाई के वक्त इसकी जरूरत सबसे ज्यादा होती है। इसी के साथ आपको बता दें कि, इफको कृषि बाजार मई के महीने में किसानों को एक प्रशिक्षण देगा। जो कि किसानों के लिए काफी फायदेमंद होगा। प्रशिक्षण में इस बात की जानकारी दी जाएगी कि, कैसे किसान कम लागत खर्च में ज्यादा उत्पादन कर सकते हैं। प्रशिक्षण में किसानों को दो तरह के उर्वरकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। एक उर्वरक जो बायोफर्टिलाइजर के रूप में जाना जाता है, तो वहीं दूसरा जल विलय फर्टिलाइजर होगा। जो पानी में जल्दी से घुल जाता है। दोनों फर्टिलाइजर की कीमत अन्य रासायनिक खादों की अपेक्षा कम है। जबकि किसान इससे बीस प्रतिशत तक उत्पादन में वृद्धि कर सकते हैं। आपको बता दें कि, जानकारी के अभाव में किसान इन दोनों फर्टिलाइजर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। जिससे खेती को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है। इस प्रशिक्षण के चलते किसान कम लागत खर्च पर ज्यादा मुनाफा भी कमा सकेंगे

 

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