Kisan bulletin 11th April 2019- केसर की खेती से किसान कमा रहा लाखों

Kisan bulletin 11th April 2019

Kisan bulletin 11th April 2019-

  1. मानसा के गांव खोखर कलां का किसान कुलदीप सिंह केसर की खेती कर भारी मुनाफा कमा रहे है और साथ ही राज्य के किसानों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आए है। गांव खोखर कलां के निवासी किसान कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी एक एकड़ की जमीन में अक्तूबर महीने में केसर की फसल बोई थी, जोकि अब तैयार हो गई है। इस बार एक एकड़ फसल में चालीस किलो के करीब केसर और पचास किलो के करीब बीज की उम्मीद है। किसानों ने बताया कि केसर की फसल के लिए किसी भी किस्म की रेह या स्प्रे की कोई जरूरत नहीं है। केसर की फसल को सिर्फ पानी और थोड़ी रखवाली की जरुरत होती है। आपको बता दें कि, किसान कुलदीप ने इस एक एकड़ जमीन में एक लाख रुपये का बीज बोए थे… जो अब जाकर पचास किलो बीज और चालीस किलो केसर के रूप में विकसित हो चुके हैं। आपको बता दें कि, बाजार में केसर के पचास किलो बीजों की कीमत पचास लाख रुपए हैं, जबकि चालीस किलो केसर की कीमत अस्सी लाख से एक करोड़ रुपये है। यानि की एक एकड़ जमीन में बोई केसर से 6 महीने का मासिक खर्च निकालकर एक करोड़ से ज्यादा की कमाई की जा सकती है।

  2. गलती किसी की हो, पर खामियाजा उत्तर प्रदेश के लिलतपुर जिले के किसान भुगत रहे हैं। एक-दो किसान नहीं, बल्कि 11 हजार से ज्यादा किसानों को खरीफ सीजन-2018 के बैंक से बीमा प्रीमियम कटने के बाद भी अब तक फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है। ये गड़बड़ी पोर्टल पर किसानों का नाम दर्ज नहीं होने से हुई है। हालांकि, अफसर बचने के लिए एक-दूसरे पर बात टाल रहे हैं। आपको बता दें कि, फसलें खराब होने पर किसानों को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है। जिसके चलते खरीफ सीजन-2018 में एक लाख 66 हजार 758 केसीसी धारक और 258 गैर ऋणी किसानों ने 11 करोड़ 13 लाख 51 हजार रुपये का बीमा प्रीमियम कटवाया था। इसमें 75 हजार 663 किसानों को 61.60 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति हुई। हालांकि, जिस समय किसानों की एंट्री पोर्टल पर कराई जा रही थी, उसी दौरान पोर्टल बंद हो गया। इस वजह से एक लाख 67 हजार 16 में से एक लाख 55 हजार 975 किसानों की ही पोर्टल पर एंट्री हो सकी। इस तरह ग्यारह हजार इकतालीस किसानों की एंट्री नहीं हो सकी। इसकी वजह कई किसानों का आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होना और कई किसानों के गलत पते दर्ज होना है, तो वहीं कुछ में ग्राम पंचायतों के नाम गलत हो गए। जिस वजह से ऐसे किसानों की एंट्री नहीं हो सकी। इससे 11 हजार किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। हालांकि, अधिकारियों ने अब पोर्टल पर छूटे किसानों की एंट्री कराने के लिए इसे खुलवाने का विचार बनाया है। लेकिन अगर पोर्टल नहीं खुलता है तो बीमा कंपनी से सत्यापन का काम कराकर किसानों को लाभान्वित किया जाएगा।
  3. इन दिनों मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी शुरू हो गई है। लेकिन किसानों की शिकायत है कि उनके गेहूं को समर्थन मूल्य से नीचे के दाम पर खरीदा जा रहा है। इसको लेकर बुधवार को इंदौर की लक्ष्मी बाई अनाज मंडी में विवाद हुआ। किसानों ने चक्काजाम कर दिया जिसके बाद मंडी में खरीदी बंद होने पर प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा। किसानों का कहना है कि व्यापारियों द्वारा गेहूं की खरीदी समर्थन मूल्य से कम पर की जा रही है। गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। लेकिन व्यापारी किसानों की मेहनत का मोल 1600 से 1750 रु. के बीच में लगा रहे हैं। जबकि व्यापारियों का कहना है कि गेहूं की गुणवत्ता के हिसाब से गेहूं का दाम तय किया जाता है। आपको बता दें कि अनाज मंडी में खरीदी को लेकर एक हफ्ते में ये दूसरा विवाद है।
  4. हिमाचल प्रदेश में किसानों ने खेतीबाड़ी से मुंह मोड़ लिया है। इनमें 40 फीसदी किसान तो ऐसे हैं, जिनकी जमीन पूरी तरह से बंजर बन गई है। बताया जा रहा है कि किसानों को सस्ते दामों में बीज और खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिसके चलते ज्यादा लागत और कम मुनाफे के कारण किसानों ने खेती छोड़ने का फैसला किया हैं। हालांकि कृषि विभाग का दावा है कि किसानों द्वारा अप्लाई करने पर उन्हें फ्री और सस्ते दामों में भी बीज़ और खाद उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। तो वहीं जानकारी के अनुसार, 30 से 35 फीसदी किसान ही सस्ते बीजों का फायदा ले पा रहे हैं। हालांकि, मैदानी क्षेत्रों के लोगों ने अपने खेतों को दूसरे कार्यों के लिए किराए पर दे दिया है। इस वजह से जमीन भी अब फसलें उगाने लायक नहीं बची हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसानों ने रबी की फसल को बिल्कुल ही कम कर दिया है। किसान केवल गुजारे लायक ही फसलें उगा रहे हैं। वहीं, प्रदेश में खेती से मुंह मोड़ने वाले किसानों का तर्क है कि खेतों में इतनी मेहनत से उगने वाली फसलों को जंगली जानवर खराब कर रहे हैं। बता दें कि हिमाचल में किसानों द्वारा एकदम खेती से मुंह मोड़ने की वजह से सब्जी मंडियों में सप्लाई कम हो गई है। इस वजह से प्रदेश के मंडियों में हर सब्जी के दामों में भी इजाफा हो रहा है

 

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