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Kisan bulletin 9th June 2019- 10 जून से उत्तर प्रदेश में शुरू होगी किसान पाठशाला

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Kisan bulletin 9th June 2019

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Kisan bulletin 9th June 2019-

  1.  भारतीय मौसम विभाग ने बीते दिन मॉनसून पर संभावना जताते हुए जानकारी दी कि, मॉनसून ने केरल तट पर दस्तक दे दी है. हालांकि आपको बता दें की इस बार मॉनसून पिछले साल के हिसाब से 8 दिन की देरी से चल रहा है. आमतौर पर हर साल 1 जून तक मॉनसून केरल तट पर पहुंच जाता है, जिसके बाद वहां से होता हुआ महाराष्ट्र और मध्य भारत के अन्य हिस्सों में दस्तक देता है. गौरतलब है कि, पिछले दिनों मौसम विभाग ने जानकारी देते हुए अनुमान जाहिर किया था कि मॉनसून 6-7 जून तक आ सकता है हालांकि बाद में इसे संशोधित कर 7-8 जून कर दिया गया था. इस बार मानसून में हुई देरी के चलते जहां महाराष्ट्र के कृषि विभाग ने किसानों को अपनी बुवाई कार्यों को देरी से करने की सलाह दी थी साथ ही किसानों को बुवाई के लिए मानसून का इंतजार करने की बात कही थी. जाहिर है, मानसून की देरी के चलते जहां एक तरफ उड़द और मूंग की फसलें प्रभावित होने की संभावनाऐं अभी से लगाई जा रही है…तो वहीं अभी तक इनकी बुवाई का काम शुरू नहीं हुआ है. हालांकि हर साल इतने समय में दालों की बुवाई का काम सामान्य रूप से खत्म कर लिया जाता है.
  2.  किसानों को जागरूक करने और उन्हें खेती के गुण सिखाने के लिए 10 जून से उत्तर प्रदेश के हर जिले में किसान पाठशाला की शुरुआत की जा रही है. इस पाठशाला के पहले चरण में जहां पांच हजार किसानों को सुरक्षा किटों का वितरण किया जाएगा, तो वहीं किसानों के लिए न्यूनतम मूल्य पर ये किट सहकारी समितियों पर उपलब्ध कराया जाएगा. द मिलियन फार्मर्स स्कूल के नाम से हर न्याय पंचायत स्तर पर खुलने वाली 52 हजार पाठशालाओं में औसतन एक करोड़ से अधिक किसानों को उन्नतशील खेती के गुण सिखाए जाएगें. साथ ही खेती में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ गेहूं, धान, दलहन और तिलहन जैसी परंपरागत खेती के साथ किसानों को पशुपालन से लेकर मधुमक्खी पालन और मछली पालन की भी जानकारियां दी जाएगी. प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. सी पी श्रीवास्तव का ने इस पर जानकारी देते हुए बताया की प्रदेश सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्य से जिले की हर न्याय पंचायत में किसान पाठशाला चलाने के निर्देश दिए हैं. जिससे किसानों को खेती के प्रति और जागरूक किया जा सके.
  3. जून का दूसरा हफ्ता शुरु होने को है, हालांकि अभी भी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में धान की नर्सरी के लिए यहां के किसान पानी की राह देख रहे हैं. आपको बता दें की अभी तक यहां की कई नहरों में पानी नहीं है. जहां एक तरफ नहरें पूरी तरह सूख चुकी हैं तो कई जगह नहरों में साफ-सफाई न होने से उनमें पानी आना मुश्किल हो गया है. जिसके चलते किसान धान की नर्सरी डालने को लेकर परेशान हैं यही वजह है की गाजीपुर जिले के किसान इस समय मानसून के इंतजार में बैठे हैं. क्योंकि नर्सरी डालने के लिए खेतों में पर्याप्त मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है. आपको बता दें की गाजीपुर जिले में मौजूद 63 नलकूप भी तकनीकी खराबी के कारण महीनों से पानी नहीं दे रहे हैं. जिसके चलते यहां के किसानों के लिए परेशानियां और बढ़ गई हैं. जाहिर है धान की नर्सरी 25 मई के बाद से प्रदेश में ड़ालनी शुरू कर दी जाती है, धान की रोपाई से पहले नर्सरी को तैयार किया जाता है जिसके चलते पानी की जरूरत पड़ती है. हालांकि इस समय नहरों और नलकूपों से पानी न मिलने की वजह के चलते किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जहां एक तरफ किसानों की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही वहीं विभागिय अधिकारी इस मामले पर गंभीर नहीं हैं. ऐसे में किसानों के पास  निजी संसाधन के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता, हालांकि निजी संसाधन के सहारे खेती करना किसानों के लिए हमेशा मंहगाई भरा सौदा रहता है.

 

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