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Kisan bulletin 9th July 2019- जैविक खाद से 15 लाख कमा रहा किसान

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Kisan bulletin 9th July 2019

Kisan bulletin 9th July 2019-

  1. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के किसान प्रमोद शर्मा कचरे और गोबर से जैविक खाद बनाकर हर साल तकरीबन 15 लाख रूपये तक की कमाई कर रहे हैं.. जिसके चलते अब राज्य सरकार प्रमोद के इस सफल प्रयोग को प्रदेश के बाकी किसानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही है.. हालांकि, इसके लिए किसान प्रमोद सिंह को मास्टर ट्रेनर भी बनाया गया है। आपको बता दें कि, प्रमोद ने जैविक खाद के लिए एक गोशाला खोली और गांव के सभी पशुपालकों से अनुरोध किया कि, वो अपनी अनुपयोगी गायों को खुले में छोड़ने की बजाय उनकी गोशाला में भेज दें.. जिसके बाद कुछ ही दिनों में उनकी गोशाला में गायों की संख्या पौने तीन सौ हो गई है, इन गायों से प्रमोद को हर रोज करीब तीन क्विंटल गेहूं मिल जाता है। और इतना गोबर प्रमोद की जरूरत के हिसाब से कही ज्यादा है। इसके बाद प्रमोद कचरे और गोबर से जैविक खाद बनाने लगा.. और अब वो सालाना 200 टन जैविक खाद तैयार करते हैं, जिसमें से 150 टन खाद तो उनके खेतों में उपयोग हो जाती है और 50 टन जैविक खाद को बेच देते हैं। जैविक खाद के इस्तेमाल से ये किसान 3000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अपनी बचत करता हैं.. और बस प्रमोद के इसी सफल प्रयोग को देखकर अब राज्य सरकार ने इस तरकीब के जरिए राज्य के बाकी किसानों को प्रेरित करने का फैसला किया है। एक जानकारी के अनुसार, किसानों से कहा गया है कि, वो भी प्रमोद की तरह जैविक खाद बनाकर खेती पर आने वाली लगात को कम करें और अपनी आय बढ़ाएं.. इतना ही नहीं, इसके लिए प्रमोद को मास्टर ट्रेनर भी बनाया गया है।
  2. उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की चीनी मिलों की मनमानी के चलते जिले के 50 हजार छोटे किसानों ने गन्ने की खेती छोड़ दी हैं। आपको बता दें कि, इस बात का खुलासा गन्ना सर्वे 2019-2020 की मौजूदा रिपोर्ट से हुआ है.. इतना ही नहीं, पिछले पेराई सत्र के मुताबिक, इस बार जिले में 10 फीसद गन्ने का रकबा घट गया है। दरअसल, समय से गन्ना बेचने के लिए छोटे किसानों को पर्ची ना मिलना, और गन्ना बेचने के बाद समय से उसका भुगतान ना होना इस क्षेत्र में आई कमी का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा हैं.. आपको बता दें कि, जिले में कुछ 5 लाख किसान हैं, इनमें से करीब 1.50 लाख किसान गन्ने की खेती से जुड़े हुए हैं। इतना ही नहीं, गन्ने की खेती गोंडा जिले के किसानों की सबसे मनपसंद फसल हैं, और शायद यही वजह भी है कि, पिछले दो दशक में जिले में चीनी उद्योग का बड़ा विस्तार हुआ है। दरअसल, जिले में तीन नई चीनी मिलों का संचालन शुरू तो हुआ हैं, मगर सिस्टम में भ्रष्टाचार और गलत नीतियों के चलते इसका फायदा छोटे किसानों को नहीं मिल पाया है.. क्षेत्र का छोटा किसान गन्ना माफिया, विभाग अधिकारी और मिल प्रबंधन अधिकारियों की मिलीभगत के बीच पिसकर रह गया है बस.. और फिर इसी के चलते जिले के करीब 50 हजार से ज्यादा किसानों ने गन्ने की खेती बंद कर दी है।
  3. पिछले दो दिनों से देश के कई राज्यों में लगातार रुक रुककर हो रही झमाझम बारिश ने जहां एक तरफ मौसम सुहावना कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली है. हालांकि बारिश से जहां एक तरफ कच्ची सड़कों पर जलजमाव ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं, वहीं कई जगह जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। वहीं दूसरी तरफ बारिश का इंतजार कर रहे किसानों के चेहरे खिल उठे. जिसके चलते किसानों ने अपने खेतों में धानरोपनी शुरू कर दी है. अब तक जो किसान अपने खेतों में धान लगाने के लिए पंपसेट का सहारा ले रहे थे इस समय मानसून की बारिश में अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं. जाहिर है धान की खेती के लिए किसानों को पानी की सख्त आवश्यकता होती है. वहीं मानसून की इस बारिश ने किसानों को काफी राहत दी है..इसी के साथ आपको बता दें कि, बिहार के पुर्निया में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन प्रखंड क्षेत्र में सरकारी बोरिंग की व्यवस्था नहीं होने से हर साल किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके चलते किसानों का खर्च ज्यादा और मुनाफा कम होता है। तो वहीं, कन्हरिया गांव में बारिश होते ही किसान धनरोपनी में जुट गए हैं। बारिश हो जाने से धनरोपनी में होने वाला अतिरिक्त खर्च अब किसानों को नहीं होगा। और किसान की लागत भी कम लगेगी..
  4. महाराष्ट्र के लातूर जिले में कर्ज में डूबे एक किसान ने कथित तौर पर आत्महत्या की.. दरअसल, 65 साल के बाबूराव जाधव ने हिप्पलगांव में एक पेड़ से लटककर फांसी लगाई, पुलिस के अनुसार, किसान ने बैंक और कई लोगों से कर्ज लिया था, जिसकों ना चुका पाने के चलते किसान ने आत्महत्या को गले लगा लिया..

  5. सूखा और तेज बारिश की मार से महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा जिले के किसान सहमा गए हैं.. आपको बता दें कि, पिछले दिनों हुई तेज बारिश से किसानों के खेतों में गहरे गढ्ढे और काफी लंबी दरारें पड़ी रही हैं, जिसके कारण किसानों का काफी नुकसान भी हुआ हैं, ऐसे में किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है।
  6. बीते दिन कृषि मंत्री ने दिल्ली के मंत्रालय में राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ मिलकर एक बैठक की, जिसमें उन्होंने बारिश की कमी की वजह से खरीफ फसल की बुवाई में देरी पर चिंता जाहिर की, हालांकि, इसी के साथ, कृषि मंत्री ने कहा है कि, केंद्र सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सभी राज्यों से संपर्क में हैं..जिसके चलते जल्द ही इसका भी समाधान निकाल लिया जाएगा।

 

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