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Kisan Bulletin 17th July 2019- फसल बीमा में हो सकते हैं बड़े बदलाव

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Kisan Bulletin 17th July 2019

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Kisan Bulletin 17th July 2019-

  1. हरियाणा सरकार ने हाल ही में खेतों में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों को किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना सहित अन्य सभी योजनाओं का लाभ देने से इंकार कर दिया हैं, आपको बता दें कि, मुख्यालय ने इस बारे में पत्र जारी कर दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत किसानों द्वारा भरे गए आवेदनों को सरकार द्वारा भेजी गई फसल अवशेष जलाने वाले किसानों की सूची के साथ मिलान किया जाएगा.. जिसके बाद जिन किसानों का नाम फसल अवशेष जलाने वाले किसानों की सूची में होगा, उनको सरकार द्वारा दी जारी किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा… आपको बता दें कि, गेहूं सीजन में किसानों ने फसल की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों में आग लगा दी थी। जिसके चलते इस बार सरकार ने धान सीजन की तरह गेहूं के अवशेषों में होने वाली आगजनी पर सैटेलाइट से निगरानी रखी थी.. और उपमंडल में आगजनी की करीब 135 घटनाएं सामने आई थी.. सरकार ने कृषि अधिकारियों को उपमंडल में हुई आगजनी की 97 लोकेशन भेजी थी। ये लोकेशन सैटेलाइट से ही मिली थी। कृषि विभाग मुख्यालय के अनुसार किसानों द्वारा फसल अवशेषों को जलाने से वायु प्रदूषण होता है। वहीं भूमि की उपजाऊ शक्ति भी कमजोर होती है। मुख्यालय ने अब फसल अवशेष जलाने के दोषी किसानों को विभाग की योजनाओं से वंचित रखने का निर्णय लिया है। मुख्यालय के आदेशानुसार इन किसानों को सब्सिडी पर खाद, बीज, किसान सम्मान निधि, सीएससी और अन्य दूसरी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
  2. केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ देश भर के किसान और आदिवासी आने वाली 22 जुलाई को जंतर-मंतर पर धरना देने की तैयारी में हैं। आपको बता दें कि, किसान अपने दो प्राइवेट बिलों को पास कराने के लिए 3 अगस्त  को सभी जिला मुख्यालयों पर रैली आयोजित कर देश के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौपेंगे। जानकारी के लिए बता दें कि, अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक दलवई के अनुसार, 13 फरवरी, 2019 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के कारण लाखों आदिवासियों की बेदखली का खतरा है। और अब 24 जुलाई को उच्चतम न्यायालय विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करने वाला है। औऱ साथ ही, भाजपा सरकार भारतीय वन अधिनियम, 1927 में संशोधन का प्रस्ताव कर रही है। जिसके विरोध में 22 जुलाई को गांव, ब्लॉक, जिले में सरकारी कार्यों और वन अधिनियम के प्रस्तावित संशोधनों की निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का फैसला किया गया है। इसके लिए देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को सुप्रीम कोर्ट में वन अधिकार अधिनियम और आदिवासियों के पक्ष में हस्तक्षेप करने के लिए पत्र भी भेजा गया है। आपको बता दें कि, अखिल भारतीय किसान सभा ने 22 जुलाई को देशभर में आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच, अखिल भारतीय कृषि श्रमिक संघ और भूमि अधिकार आंदोलन के समर्थकों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से दिल्ली के जंतर मंतर पर सुबह 11.30 बजे विरोध प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।
  3. किसानों के लिए लागू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केंद्र सरकार जल्द ही कुछ बड़े बदलाव करने की तैयारी में हैं। जिसका फायदा देश के लाखों किसानों को मिलने की उम्मीद है। दरअसल, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, इस बदलाव के तहत किसानों के इस योजना में शामिल होना पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा। इसके साथ ही योजना से ऊंचे प्रीमियम वाली फसलों को भी लिस्ट से हटा दिया जाएगा। और अगर ऐसा होता है तो किसानों के लिए ये राहत की बात होगी.. हालांकि, अभी की बात करें तो फिलहाल इस बीमा योजना के तहत किसानों का नामांकन अनिवार्य है. अधिकारी का कहना है कि सिंचित क्षेत्र के मुताबिक फसलों का प्रीमियम तय होगा। अगर फसल का सिंचित क्षेत्र 50 फीसदी से ज्यादा है तो 25 फीसदी प्रीमियम सीलिंग का भी सुझाव दिया है। वहीं अगर फसल का सिंचित क्षेत्र 50 फीसदी से कम है तो प्रीमियम सीलिंग 30 फीसदी हो सकती है। आपको बता दें कि 2016 में शुरू हुई इस योजना में सरकार के पास सितंबर 2017 तक दो हजार करोड़ रुपये का प्रीमियम आ चुका था। उस समय सरकार ने आठ हजार करोड़ रुपये का क्लेम भी जारी किया था। अभी फसल बीमा योजना का लाभ देश के 30 फीसदी फसलों के एरिया को मिल रहा है। हालांकि, योजना के लागू करने के दौरान कई चुनौतियां सामने आई थी, और मंत्रालय ने इन कमियों की पहचान की है और अब मंत्रालय ने कई बदलावों का प्रस्ताव किया है। साथ ही इस संबंध में राज्य सरकारों से भी उनके विचार मांगे हैं।
  4. लोकसभा चुनाव में किसानों को रूझाने के लिए शूरू की गई पीएम किसान सम्मान निधि योजना की पहली दो किस्तों में 8 लाख ट्रांजेक्शन फेल हो चुके हैं.. साथ ही, बैंक खाते और अन्य कमियों के कारण लाखों आवेदन राज्य सरकारों को वापिस भेजे गए हैं। तो वहीं कई ऐसे लोगों के खातों में भी रकम पहुंच गई है जिनका खेती-किसानी से कोई लेना-देना ही नहीं है। और यही वजह है कि सरकार ने अब पीएम किसान सम्मान निधि योजना की तीसरी किस्त देने से पहले आधार को अनिवार्य कर दिया है।
  5. उत्तर प्रदेश में आसमान पर भले ही बादलों का आना जाना लगा हुआ है लेकिन बिना बरसात के इन बादलों ने खरीफ की फसल पर संकट के बादल जरूर मंडरा दिए है। आपको बता दें कि, कम बारिश होने की वजह से खेतों में की गई बुआई सूखने लगी है। जहां बुंदेलखंड इस समय सूखे की मार झेल रहा हैं तो वहीं कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर दो तीन में अच्छी बारिश नहीं हुई तो सैकड़ों किसानों की हजारों हेक्टेयर में बोई गई खरीफ व धान की फसल पूरी तरह से खराब हो जाएगी

  6. जहां एक तरफ गुजरात में किसान नकली बीज मिलने से पहले ही परेशान थे, तो अब वहीं दूसरी तरफ नकली कीटनाशकों के चलते उनकी परेशानी और बढ़ गई हैं। आपको बता दें कि, किसानों की शिकायत पर राज्य के कृषि विभाग ने कीटनाशकों के सैंपल लिए तो 259 ऐसे कीटनाशक मिले जो नकली थे, यानी खराब तरह की दवाएं थीं। इनसे न सिर्फ फसलों को नुकसान हो रहा था बल्कि मिट्टी भी जहरीली हो रही थी। हैरानी की बात तो ये है कि नकली होने के बावजूद इन नकली कीटनाशक दवाओं को ऊंचे दामों पर किसानों को मुहैया कराया जा रहा था। यानि की किसान अपनी फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए जिन दवाओं का छिड़काव कर रहे हैं, वो उनकी फसलों को और ज्यादा नुकसान पंहुचा रही थी।

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