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Kisan bulletin 17th April 2019- किसानों की मुश्किलें आसान करेगा UPNEDA

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Kisan bulletin 17th April 2019

Kisan bulletin 17th April 2019-

  1. उत्तर प्रदेश के जिन किसानों ने अपने खेतों में सिंचाई के लिए बोरिंग करा रखी हैं.. और इंजन या बिजली मोटर लगाने की तैयारी कर रहे हैं तो ये खबर उन किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं.. ऐसे किसानों को डीजल इंजन और बिजली के बगैर निर्बाध रूप से सिंचाई का साधन आसानी से मिल सकता है। दरअसल, यूपीनेडा यानि की Uttar Pradesh New & Renewable Energy Development Agency ऐसे किसानों को सौर ऊर्जा से संचालित सोलर पंप पर 40 से 70 फीसद तक का अनुदान दे रहा है। पिछले साल के मुकाबले सोलर पंप में किसानों के अंशदान में 50 फीसद तक की कमी आई है। दो एचपी डीसी और एसी सर्फेस पंप की बाजार में कीमत 1,24420 रुपये है, जबकि किसानों को मात्र 37,326 रुपये ही भुगतान करना है। किसानों के अंशदान की नई दरें लागू हो गई हैं। ऐसे किसान जो सोलर पंप या सबमर्सिबल लेना चाहते हैं वे नजदीकी सहकारी बीज विक्रय केंद्र या जिला कृषि अधिकारी कार्यालय के माध्यम से अपना पंजीयन करा सकते हैं। यूपीनेडा परियोजना अधिकारी लालजी निगम का कहना है कि फसल की सिंचाई करने में किसानों को सबसे ज्यादा बिजली का बिल देना पड़ता है। किसान सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कर इस खर्च को कम कर सकते हैं। अधिक से अधिक किसानों को इसका फायदा देने के लिए अंशदान में कमी की गई है।
  2. सोमवार रोत हुई बारिश और तूफान ने गेहूं की फसल पर असर डाला है। जहां एक तरफ गेहूं की फसल खेतों में लेट गई हैं तो दूसरी तरफ सब्जी की बिजाई करने वाले किसानों का भी काफी नुकसान हुआ हैं… सोमवार की सुबह से ही दिल्ली एनसीआर सहित कई इलाकों में मौसम अपने रंग बदलता नजर आ रहा हैं, इसी के चलते मंगलवार की शाम को भी तेज आंधी और कई जगह बूंदा-बांदी ने किसानों की चिंता काफी बढ़ा दी है.. साथ ही तापमान में गिरावट के साथ गेहूं की फसल को नुकसान की आशंका है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिक अभी भी आंधी और बारिश की संभावना जता रहे हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था कि सोमवार से पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो जाएगा। जिसके बाद सोमवार की आधी रात को बादल छाने लगे और तेज आंधी शुरू हो गई। सोमवार की रात आई आंधी से आम का बौर भी गिर गया। इसे देखकर बागान किसान चिंतित हैं। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के किसानों का कहना है कि, इस बार आम का ऑफ सीजन है और उत्पादन भी कम होगा। वहीं अब आंधी आने से करीब 15 फीसदी आम का बौर गिर गया है। इसके चलते फल भी कम आएगा। जिसे लेकर बागान किसान खास चिंता में हैं। बता दें कि, आम की फसल ऑन सीजन और ऑफ सीजन पर आधारित होती है। विगत वर्ष आम की फसल का ऑन सीजन रहा, जबकि इस बार ऑफ सीजन है।
  3. उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद के 16 दिन बीत जाने के बाद भी कोई खास तरक्की दिखाई नहीं दे रही है। आपको बता दें कि, जिले में 153 गेहूं क्रय केंद्र विभिन्न एजेंसियों के हैं, जिसमें महज 95 क्रय केंद्र ही सक्रिय हैं। यहां के डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी की मानें तो बीते साल 3300 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। तो वहीं इस साल का ग्रॉफ अभी तक 1833 एमटी ही पहुंच पाया है। खरीद शुरू होने के 16 दिन बाद भी हालात ये हैं कि, कहीं क्रय केंद्र का चक्कर किसान अपनी उपज बेचने के लिए लगा रहे हैं तो कहीं क्रय केंद्र कर्मी किसानों का उपज लेकर पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। बभनान प्रतिनिधि के मुताबिक सप्लाई विभाग के क्रय केंद्र को छोड़ कहीं अभी तक गेहूं खरीद नहीं हो रही है। 15 दिनों में इस क्षेत्र में 70 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका है। यहां पीसीएफ के क्रय केन्द्र अभयपुरा, पेड़रिया व बेलघाट में स्थापित है जहां अभी तौल ही नहीं शुरू हो सकी है। तौल नहीं होने से गौर ब्लॉक के किसान पीसीएफ और समितियों पर चक्कर लगाने को मजबूर हैं। खाद्य विभाग के बभनान के कठौतिया, साऊंडीह क्रय केन्द्र को छोड़कर किसी केंद्र पर गेहूं की खरीद नहीं हो पाई है। कहीं रकम तो कहीं बोरे की कमी है। आपको बता दें कि, कठोतिया क्रय केंद्र पर मंगलवार को ही खरीद शुरू हुई जहां पर एक किसान के गेहूं की 70 क्विंटल तौल हुई।
  4. कभी नगदी फसल के रूप में किसानों के लिए लाभकारी गन्ना की खेती आज घाटे का सौदा बन गया है। पिछले साल बिहार के सीतामढ़ी की रीगा चीनी मिल को अपना गन्ना देने के बाद आज तक अधिकतर किसान खाली हाथ हैं। किसानों के गन्ना मूल्य का 135 करोड़ रुपये बकाया है। जबकि इस साल भी किसान चीनी मिल को गन्ना दे रहे हैं। इसका भुगतान कब होगा कहवा मुश्किल हैं। चीनी मिल के पास अभी भी पेराई के लिए करीब 10 लाख क्विंटल गन्ना खेतों मे खड़ा है। मिल की पेराई धीमी होने और भीषण गर्मी से किसान परेशान हैं। अभी गन्ना की कटनी की मजदूरी बहुत बढ़ गई है किसान गन्ना को घर में रख नहीं सकता इसलिए हर हाल में आपूर्ति सुनिश्चित कराना चाहता है। 5 साल पहले तक जहां 65 लाख क्विंटल गन्ना की पेराई होती थी वो घटकर 38-40 लाख क्विंटल पर आ गई है। राज्य के अन्य चीनी मिल जिसके पास अतिरिक्त कोई ईकाई नहीं है वो गन्ना मूल्य का भुगतान कर रहा है लेकिन दो से तीन अलग ईकाई होने पर भी रीगा चीनी मिल के किसान तबाह हैं और धीरे-धीरे गन्ना खेती से मुंहमोड़ रहे हैं। अब सवाल ये हैं कि, इस चुनावी शोर के बीच गन्ना किसानों का दर्द मुद्दा बनकर सामने आएगा या फिर हर बार की तरह इस बा भी चुनाव बीत जाने के बाद किसानों से किए सरकार के सारे वादे धरे के धरे रह जाएंगे।
  5. एनएच-152डी में अधिग्रहीत जमीन का पर्याप्त मुआवजा दिए जाने की मांग को लेकर धरना दे रहे किसानों ने सरकार को मांग पूरी करने के लिए 27 अप्रैल तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर सरकार किसानों की मांग को 27 अप्रैल तक स्वीकार नहीं करती तो इसके बाद किसानों ने आंदोलन को तेज करने का फैसला किया है। कमेटी पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार और प्रशासन का रवैया बेहद निराशाजनक है और किसानों को मजबूरन आंदोलन तेज करना पड़ेगा। मंगलवार को आयोजित बैठक में ये फैसला लिया गया कि अगर 27 अप्रैल तक सरकार मुआवजा राशि नहीं बढ़ाती है तो फिर आंदोलन को किसान तेज कर देंगे। किसान सेवा संघ जिला संयोजक विनोद मौड़ी ने कहा कि किसान शांतिपूर्वक धरने पर बैठे हैं लेकिन प्रशासन और सरकार इसे हल्के में ले रही है। सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। विनोद मौड़ी ने कहा कि मुआवजा के लिए प्रति एकड़ किसान को दो करोड़ रुपया मिलना चाहिए। साथी ही, इस मार्ग के दोनो ओर खेतों को जाने के लिए रास्तों की भी व्यवस्था होनी चाहिए।

 

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