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Kisan bulletin 15th july 2019- पानी की बचत के लिए किसानों की पहल

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Kisan bulletin 15th july 2019

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Kisan bulletin 15th july 2019-

  1. हरियाणा के बेरी गांव में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए इलाके के किसानों ने अब धान की परंपरागत बिजाई को छोड़कर सीधी बीजाई करने का फैसला लिया है। आपको बता दें कि, जहां एक तरफ इसके लिए किसान खुद ही हल नुमा साइकिल में जुटकर बिजाई कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर जगहो पर इसके लिए मजदूरों का सहारा भी लिया जा रहा है, हालांकि, धान की बिजाई से जहां एक तरफ पानी की बचत होगी वहीं, किसानों को भी लाभ होगा.. इतना ही नहीं, इलाके के कुछ किसान धान की सीधी बिजाई को लेकर उत्साहित थे। दरअसल, किसानों के मुताबिक, धान की परंपरागत बिजाई करने में पौध तैयार करने और रोपाई करने में खर्च के साथ-साथ ज्यादा मात्रा में पानी की खपत होती है। इससे किसानों को समय और आर्थिक रूप से बोझ ज्यादा पड़ता है तो वहीं, धान की सीधी बिजाई करने में न तो पानी की अधिक खपत होती है न ही खर्च बढ़ता है। हम आपको बता दें कि, नमी वाली जमीन पर सीधी धान की रोपाई करना आसान है। इस पद्धति से खेती करने में समय के साथ-साथ लेबर की कम जरूरत होती है। धान की पौध तैयार करने से लेकर बिजाई करने तक के सीजन के दिनों लेबर की समस्या हो जाती है, जिससे महंगे दामों पर लेबर मिलती है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। आपको बता दें कि, हरिय़ाणा सरकार ने मशीन से बिजाई करने वाले किसानों को सहायता राशि देने की बात कही थी। लेकिन हाल ही में कुछ वक्त पहले ही बेरी के किसान ओमप्रकाश ने मशीन से बिजाई की और अपनी साइकिल का हल बनवाकर निलाई की परिवार के सदस्यों ने काफी मेहनत की, लेकिन जब विभाग से सहायता राशि लेने गए तो किसान को खाली हाथ लौटना पड़ा।
  2. देश के किसानों को अब कीड़ो से खराब होने वाली अपनी फसल को बचाने के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि हाल ही में आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने 1 ऐसा आविष्कार किया है, जो किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। आपको बता दें कि, आईआईटी कानपुर के इन वैज्ञानिकों ने 1 एग्रों हेलीकॉप्टर ड्रोन का आविष्कार किया है, जो खेतों में मौजूद खराब होती फसलों को ढूंढ कर उन पर पेस्टीसाइड्स का छिड़काव करेगा। आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अभिषेक के मुताबिक एग्रो हेलीकाप्टर ड्रोन की खासियत ये है कि ये उसी जगह छिड़काव करेगा जहां कीड़े लगे होंगे… इससे बाकी बची फसलों पर छिड़काव करने की समस्या से किसानों को निजात मिलेगा.. इतना ही नहीं, इस ड्रोन में मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरे लगाए गए हैं.. ताकि यह ड्रोन आराम से खराब होती फसलों को ढूंढ़ सके..  वैज्ञानिकों की मानें तो उन्होंने इस हेलीकॉप्टर ड्रोन को खेती और फसलों की कई बारीकियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया है। जिसमें किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या फसलों को खराब करने वाले आवारा जानवरो की है. ऐसे में ये ड्रोन खेत में घुसने वाले जानवरो को मॉनिटर भी करेगा और ड्रोन उड़ने की आवाज़ से जानवर डरकर भाग जाएंगे. हालांकि, इसके लिए इस ड्रोन में तेज आवाज निकालने का भी जुगाड़ किया गया है। इस ड्रोन की खास बात ये है कि, ये 10 किलो की कीटनाशक दवा एकसाथ अपने अंदर मौजूद टैंक में भरकर खेतो में छिड़काव कर सकता है. खैर इस एग्रो हेलीकाप्टर ड्रोन बनाने के पीछे जहां एकतरफ किसानों की मदद करना है, वहीं दूसरी तरफ इसके चलते पर्यावरण का स्तर भी ठीक रह सकेगा। क्योंकि पूरे खेत में कीटनाशक दवाओं के छिड़काव से इस पर खराब असर पड़ता है. आईआईटी के एयरोस्पेस विभाग में बने इस ड्रोन को जल्द ही किसानों की मदद के लिए दिया जाएगा ताकि किसान जल्द ही इसका लाभ पा सकें.
  3. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरूरपुर क्षेत्र के किसान गन्ने की पैदावार बढ़ाने के लिए पानी में शराब और डिटर्जेंट मिलाकर छिड़काव कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे गन्ने की फसल पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। फसल में कीट नहीं लगने से पैदावार में बढ़ोतरी होती है। कुछ किसान ईख में महंगे कीटनाशकों के बजाय ऑक्सीटोसिन भी यूरिया में मिलाकर डाल रहे हैं। दरअसल, दूसरे प्रदेशों की बढ़ती पैदावार को देखकर मेरठ देहात क्षेत्र के किसान महंगाई के इस दौर में सस्ते कीटनाशक ईजाद कर रहे हैं। ये किसान इन दिनों नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। वे अपने खेतों में देशी शराब और ऑक्सीटोसिन का छिड़काव कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे गन्ने की पैदावार बढ़ जाती है। वहीं ये गन्ने के लिए कीटनाशक का काम करता है। आपको बता दें कि, किसानों का मानना है कि, महंगे कीटनाशक खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। गन्ने का भुगतान चीनी मिलें एक साल में कर रही हैं। ऐसे में सस्ते कीटनाशक के रूप में किसान इन विकल्पों को अपनाकर फायदा उठा रहे हैं। किसानो का कहना है पिछले कुछ सालों से गन्ने के खेत में शराब का छिड़काव किया तो इसके बेहतर परिणाम सामने आए। शराब के साथ कुछ मात्रा में डिटर्जेंट पाउडर और ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन मिलाने से ईख को बैक्टीरिया और फंगसजनित रोगों से बचाव में मदद मिलती है। वहीं, किसानों का मानना है कि आलू का आकार बढ़ने के साथ कम समय में ज्यादा पैदावार होती है। हालांकि, अगर बात कृषि विभाग की करें तो कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में शराब के छिड़काव को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे बेहतर है कि किसान नीम की पत्तियों को उबाल कर कीटनाशक के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
  4. मध्य प्रदेश के देवास जिले में किसानों को अपने खेतों में जाने के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है.उनको अपने खेतों में जाने के लिए रस्सी के सहारे नदी पार करनी पड़ रही हैं. दरअसल, ना तो खेत तक जाने के लिए सड़क है और ना ही पुलिया है और ना ही कोई खेत तक जाने के लिए दूर दूर तक रास्ता है. किसानों की समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं है ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित ओर मौखिक शिकायत क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से की है लेकिन आज तक इस समस्या से निजात नहीं मिल पाया है,

  5. भारत माला परियोजना में किसानों की भूमि अधिग्रहण के लिए मुआवजे की दर अब बाधा बन सकती है। दरअसल,  राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र के किसान एकजुट होकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। जल्द ही कोटा में नीमच और कोटा जिले के किसानों की बैठक होगी। उसके बाद पांच राज्यों के किसानों की संयुक्त बैठक की जाएगी। जिसके बाद 5 राज्यों के किसान अपनी कोटा जिले में बनने वाले हाइवे के लिए की जारही भूमि अधिग्रहण के मुआवजे की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
  6. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि इस साल सितंबर से राज्य के 35 लाख किसानों को मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद  योजना का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड सरकार किसानों के विकास के लिए पांच हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी. जिसके चलते तीन महीने के अंदर सरकार इन किसानों के खाते में डीबीटी के माध्यम से योजना की राशि उपलब्ध करा देगी.

 

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