Kisan Bulletin 14th May 2019- गेंदे की खेती से किसानों को मुनाफा

Kisan Bulletin 14th May 2019

Kisan Bulletin 14th May 2019-

  1.  उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में परंपरागत फसलों की खेती करने वाले किसान अब गेंदे की खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। आपको बता दें कि, सोनभद्र जिले के सदर ब्लॉक के मानपुर गाँव के किसान बाबूलाल मौर्य ने गेहूं,धान, चना की खेती छोड़कर सब्जी की खेती करनी शुरू की। साथ ही, उद्यान विभाग से अनुदान लेकर अपने दस एकड़ के खेत में गेंदे की खेती भी शुरू की जिसके चलते आज वो बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं।  हालांकि, नीति आयोग की सूची में भले ही सोनभद्र देश 115 पिछड़े जिलों में शामिल हैं. लेकिन यहां के किसान अब परम्परागत खेती से हटकर फूलों की खेती के तरफ ध्यान दे रहे हैं। जिसका नतीजा ये है कि उनकी आय चार गुना बढ़ गयी है। आपको बता दें कि, बाबूलाल को 2018-19 का गेंदा के फूल की खेती करने में प्रथम स्थान का प्रमाण पत्र भी मिल चुका है। किसान बाबूलाल कहते हैं, “गेंदे के फूल की खेती करने से उनकी आय बढ़ी है और इसके लिए किसानो को आगे आना चाहिए।” इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है। इसी के साथ किसानों का फूलों की खेती की तरफ रूख यूं ही बना रहे इसके लिए अगले कुछ दिनों मे विभाग द्वारा किसानों को बचे गेंदा फूल का ऑयल बनाना बताया जाएगा।
  2. 2.  छत्तीसगढ़ के बस्तर सहित पूरे जंगलों में फूलों से लदे बांस ने जहां एक तरह किसानों की उत्सुकता को बढ़ा दी है. वहीं किसानों की मुसीबतें भी बढ़ा है. क्योंकि जहां बस्तर के जंगलों में मौजूद बांस में फूल आ गए हैं वहीं इस फूल के चलते किसी अनहोनी का डर भी यहां के लोगों को सता रहा है, क्योंकि ऐसा माना जाता है की जिस साल बांस में फूल आते हैं उस साल वहां सूखा पड़ता है. जिसके चलते अभी से यहां के किसान सखते में आ गए हैं तो वहीं दूसरी तरफ जंगल में बांस के फूलों से गिरने वाले बीजों को इकट्ठा कर रहे हैं. जिसका उपयोग गांव वाले खाने के तौर पर करते हैं. हालांकि वैज्ञानिकों की मानें तो सूखा या आकाल पड़ना एक अंधविश्वास भर है क्योंकि बांस में फूल आना प्राकृति का परिवर्तन है जोकि 40 से 50 साल बाद होता है.
  3. उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास मौजूद खरखौदा में इस समय किसानों की समस्याऐं आसमान छू रही हैं. आपको बता दें की जहां एक तरह गर्मी और लू के थपेड़ों ने किसानों की परेशानियां बढ़ा रखी हैं वहीं दूसरी तरह बिजौली विद्युत उपकेंद्र से हर रोज होने वाली कटौती किसानों की परेशानियों की मुख्य वजह बन रही है. जिससे किसानों को सिंचाई करने में परेशानी का सामना करना पड़ा रहा है. आपको बता दें की जैसे जैसे तापमान बढ़ रहा है उसी तरह बिजली कटौती में इजाफा हो रहा है. वहीं विद्युत कर्मचारियों की मानें तो उनका कहना है की इस समय सभी लाइनें पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं. दिन में तापमान बढ़ने और ओवरलोड होने के चलते हर रोज कहीं न कहीं तारें टूट रही हैं. जिससे आपूर्ति बंद रहती है. साथ ही पिछले कई दिनों से ट्रांसमिशन लाइनों को निर्माण किया जा रहा है. जिसके कारण पूरे दिन 132 विद्युत उपकेंद्र शटडाउन हो रहे हैं. जहां एक तरह विद्युत कर्मचारी तारों को दोष देकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरह खरखौदा क्षेत्र में लगी सब्जियों की खेती पानी के बिना सूख रही है.

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