Kisan bulletin 14th April 2019-  अर्धनग्न होकर धरना दे रहे किसान

Kisan bulletin 14th April 2019

Kisan bulletin 14th April 2019-

  1. हरियाणा के यमुनानगर के किसानों में ओलावृष्टि और बारिश से तबाह हुई फसलों के मुआवजे को लेकर बहुत रोष है। जिसके चलते बीते गुरूवार को पिलखनवाला और मंगलोर के किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया. कांग्रेस नेता बृजपाल छप्पर की अगुवाई में किसानों ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. किसानों ने चेतावनी दी है कि, अगर सरकार ने जल्द ही तबाह हुई फसलों का उचित मुआवजा नहीं दिया तो सरकार के खिलाफ आरपार की लड़ाई करेंगे। किसानों ने बताया कि, 8 अप्रैल को हुई बारिश और ओलावृष्टि से घाड क्षेत्र के दर्जन से ज्यादा गांव में हजारों एकड़ की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई है. लेकिन अभी तक सरकार के तरफ से इन किसानों के लिए किसी भी तरह के मुआवजे की घोषणा नहीं की है. किसानों की मांग है कि किसानों को 40 हजार रूपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से किसानों की मांगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.  जिसके चलते किसानों में सरकार के प्रति काफी गुस्सा हैं।
  2. अप्रैल की शुरूआत होने के साथ ही रबी की लगभग सभी फसलें भी कट चुकी हैं। और जो बाकी हैं उनकी भी कटाई होने वाली हैं। ऐसे में मौसम में लगातार अपने मिजाज बदलता नजर आ रहा हैं… पिछले दिनों हुई बारिश के चलते किसानों की फसलों को काफी नुकसान हुआ हैं, कहीं बर्बाद फसल के मुआवजें की आस में किसान धरना दे रहे हैं तो कहीं पर कर्ज के तले दबे किसान बर्बाद हुई फसल के चलते आत्महत्या तो गले लगा रहे हैं.. लेकिन जैसा कि हम आपको हमेशा से कहते आए हैं कि आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं होता हैं, वैसे ही किसान चाहें तो उनकी जो फसलें बर्बाद हुई हैं या फिर जो भी नुकसान हुआ हैं, उसकी भरपाई कम खर्च पर और कम अवधि वाली फसलें लगाकर कर सकता हैं। जैसे कि, किसान फिलहाल अप्रैल से जुलाई महीने के बीच लौकी,  तोरई,  टमाटर,  बैगन, लोबिया और मेंथा जैसी सब्जियों की खेती कर सकते हैं। बारिश की वजह से हमेशा किसानों को घाटे का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनकी  गेहूं, दलहन और तिलहन मिलाकर कुल 26.62 लाख हेक्टेयर से भी ज्यादा फसलें नष्ट हो जाती है। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों की माने तो ऐसे समय में किसान को कम समय में  ज्यादा उपज देने वाली फैसले लगाने चाहिए। किसान इस महीने में मक्के की पाइनियर(Pioneer) -1844  किस्म की बुवाई कर सकते हैं. यह किस्म मक्के की दूसरी किस्मों के मुकाबले में कम समय के अंतराल में अच्छी पैदावार भी देती है.
  3. बेंगलुरू की रहने वाली 37 साल की गीताजंलि राजामणि एक ऐसी महिला है जो खेतों में अलग-अलग तरीकों को अपनाकर अन्य किसानों की आमदनी को बढ़ाने का काम कर रही है। आपको बता दें कि, गीतांजलि ने साल 2017 में अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर स्टार्टअप कंपनी ‘फार्मिजन’ को शुरू किया था। गीताजंलि सबसे अच्छा काम ये कर रही है कि वो किसानों को पार्टनरशिप में खेती करना सीखा रही है। वह किसानों को साथ मिलाकर जैविक खेती करवाने का कार्य कर रही है। दूसरी तरफ उनके खेत को 600-600 वर्गफीट के आकार में बांटकर ग्राहकों को 2500 रूपए प्रति महीने की दर पर किराए पर दे देती है। ग्राहक को अपने मोबाईल पर एप के सहारे मनपंसद सब्जियां उगाने का मौका मिल जाता है। सब्जियों के तैयार होने पर फार्मिजन की गाड़ी ग्राहकों के घर तक पहुंचा दी जाती है। इससे लोगों को 100 प्रतिशत आर्गेनिक सब्जियां मिल रही हैं और किसानों को बेहतर आमदनी भी हो रही है। इससे तीन महीने पहले ही फार्मिजन ने जैविक फलों की खेती भी शुरू की थी। आपको बता दे कि, इसका सलाना टर्नओवर 8.40 करोड़ रूपए का है।

 

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