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Kisan Bulletin 11th Sep- घास की खेती से किसान मालामाल

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Kisan Bulletin 11th Sep

Kisan Bulletin 11th Sep

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Kisan Bulletin 11th Sep-

  1. अभी कुछ वक्त पहले देश की मोदी सरकार ने किसानों के लिए पेंशन योजना की शुरूआत की थी। जिसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 8.36 लाख किसानों ने इस योजना के लिए अपना रजिस्ट्रेशन कराया है। आपको बता दें कि, इस योजना का लाभ पाने के लिए 9 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ था। जिसके मुताबिक, अगर देखा जाए तो हर दिन करीब 27 हजार किसान किसान पेंशन के लिए केंद्र सरकार की इस योजना से जुड़ रहे हैं। आपको बता दें कि, इस योजना के तहत आधा प्रीमियम किसानों को भरना है तो वहीं आधे प्रीमियम का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। और इसी के साथ, किसान जब चाहें इस योजना से बाहर आ सकते हैं। यानि की अगर इस स्कीम के बीच में अगर कोई किसान योजना को छोड़ना चाहता है तो उसके द्वारा जमा की गई राशि ब्याज सहित किसान को वापस मिल जाएगी। इसी के साथ आपको ये भी बता दें कि, अगर किसी वजह से किसान की मौत हो जाती है, तो उसकी पत्नी को 50 फीसदी रकम मिलती रहेगी। जानकारी के अनुसार, किसानों के पेंशन फंड को LIC द्वारा मैनेज किया जाएगा।
  2. मध्य प्रदेश में उच्च दाब वाली बिजली लाइनों को करीब दस हजार गांवों से निकाला जा रहा है। जिसके चलते इन गांवों के किसानों को अपनी जमीन का काफी नुकसान हो रहा है। आपको बता दें कि, एक जानकारी की मानें तो, मध्य प्रदेश में पॉवर ग्रिड कार्पोरेशन औऱ पॉवर ट्रांसमिशन कंपनियों के 300 से ज्यादा काम चल रहे हैं, जिनमें पॉवर लाइनों को प्रदेश के कई गांवों से निकाला जा रहा है। ऐसे में किसान परेशान है क्योंकि, ना तो उनकों उनकी जमीन का सही मुआवजा मिल रहा है, और ना ही कोई अधिकारी उनकी मांगों पर ध्यान दे रहा है। एक जानकारी की माने तो, उच्च दाब विद्युत लाइन और टॉवर के निर्माण के लिए भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाता है, लेकिन अगर ऐसा किया जाता है, तो इंडियन टेलीग्रॉफ एक्ट 1885 की धारा 10 और धारा 16  के साथ ही, भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 67 और 68 के तहत किसानों की जमीन को हुए नुकसान का मुआवजा देने का प्रावधान है। मगर कई प्रभावित किसानों की मानें तो, कई अधिकारी इसे जनहित का मामला बताकर भुगतान से बचने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि, जो किसान इसका जमकर विरोध करते हैं, सिर्फ उन्हें ही मुआवजा राशि दी जाती हैं, खैर, ऐसी सूरत में किसानों के लिए जरूरी है, कि, वो अपने हक की मांग करें, और मुआवजा नहीं मिलने पर निर्माण कार्य रोककर न्यायलय में जाकर मामला दर्ज कराएं, ताकि, किसानों को उनके हक का भुगतान किया जाए।
  3. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर के किसान इस समय काफी फायदे में दिखाई दे रहे हैं, आपको बता दें की इसकी खास वजह उनके यहां लैमन ग्रास यानि की नींबू घास की खेती है. यहां के 16 किसानों ने इस समय जहां लैमन ग्रास से चारों तरफ हरियाली बिछा दी है ये हरी घास 50 रुपये प्रति किलो बिक रही है जबकि इसकी सूखी घास 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रही है. आपको बता दें की लैमनग्रास बंजर जमीन पर भी इस समय किसानों के लिए सोना उगल रही है. वहीं इस घास की बड़ी बात ये है की इस घास को जंगली जानवरों, बंदरों और पशुओं से कोई खतरा नहीं है. इस घास को साल में चार बार काटा जा सकता है. आपको बता दें की हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के मार्गदर्शन में ये किसान लैमन ग्रास की खेती कर रहे हैं. जिसके चलते करीब ढाई सौ कनाल बंजर जमीन पर लैमन ग्रास की खेती लहलहा रही है. यही नही किसानों के समूह ने संबंधित संस्थान के सहयोग से लैमन ग्रास से सुंगधिक तेल निकालने के लिए संयंत्र भी लगाया है. वहीं हरी और सूखी घास को कारटकर इसकी पत्तियां किसान बेच भी रहे हैं जाहिर है लैमन ग्रास से ही लैमन टी बनाई जाती है. इसके साथ ही इससे विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाई जाती है. यही वजह है की इस समय यहां के किसान काफी फायदे में हैं.
  4. उड़ीसा के भुवनेश्वर में बीते दिन राज्य के दुग्ध किसान महासंघ ने कृषि एवं पशुपालन व उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की, कि अन्य किसानों की तरह दुग्ध किसानों को भी 1 फीसद ब्याज पर कर्ज दिया जाए. साथ ही उन्होंने कहा की राज्य में करीब 11 लाख दुग्ध किसान है जिससे उनको भी कृषि योजना का लाभ मिल सके।
  5. उत्तर प्रदेश के बिजनौर में भाकियू द्वारा गन्ना के बकाया भुगतान को लेकर कलक्ट्रेट में धरना दूसरे दिन भी जारी रहा। जहां, बीते दिन युवा भाकियू नेता गौरव टिकैत भी धरने पर पहुंचे। उन्होंने बकाया भुगतान न होने पर 21 को होने वाली महापंचायत में बिजनौर को कुरूक्षेत्र का मैदान बनाने का ऐलान किया। हालाकि, प्रशासन ने किसानों की मांगों को लेकर बातचीत भी की, मगर ये बिल्कुल बेफिजुल रही। साथ ही, अब 21 सितंबर को महापंचायत में ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसानों से हिस्सा लेने का आह्वान किया गया।

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