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Kisan bulletin 11th May 2019- देश में हो रही बीटी बैंगन की अवैध खेती!

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Kisan bulletin 11th May 2019

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Kisan bulletin 11th May 2019-

देश के पीएम मोदी ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत छोटे और सीमांत किसानों को हर साल 6,000 रूपये देने का फैसला किया था.. जिसके चलते कई किसानों को इसकी पहली और दूसरी किस्त भी मिल चुकी हैं.. लेकिन हाल ही में कृषि विभाग में आई शिकायतों को लेकर इस बात का खुलासा हुआ है। कि योजना के तहत किसानों के खातों में पहुंची धनराशि वापस होने लगी है। उत्तर प्रदेश के मुज्जफ्फरनगर में दो हजार किसानों के बैंक खातों से किसान सम्मान निधि करीब 80 लाख की धनराशि वापस हो गई है। हालांकि, अभी ये बता पाना मुश्किल हैं कि, ये सरकार की तरफ से इस धनराशि को वापस लिया गया हैं, या फिर किसी तकनीकी खराबी के चलते ऐसा हुआ हैं। इसी के साथ जिन किसानों के बैंक खातो से पैसे वापस लिए गए हैं.. वो कई दिनों से परेशान होकर कृषि उप निदेशक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। दरअसल, जनपद में कृषि विभाग द्वारा करीब 2.20 लाख किसानों का डाटा फीड कराया गया था, जिसमें से एक लाख तीन हजार किसानों को इस योजना का लाभ मिला है। इन किसानों के खातों में दो-दो हजार की दो किस्तें भी आ चुकी है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से किसानों की शिकायत है कि उनके बैंक खातों से किसान सम्मान निधि का पैसा वापस होने लगा है। जिसके चलते कृषि विभाग में करीब दो हजार से अधिक किसानों की शिकायतें आ चुकी है। आपको बता दें कि, फिलहाल लोकसभा चुनाव और आचार संहिता के चलते पोर्टल बंद हैं.. जिसे 23 मई के बाद ही खोला जाएगा… और तभी किसानों के खाते से पैसे वापस जाने की जानकारी का सही पता चल सकेगा।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर की मोहन लाल गंज तहसील की नहर में पानी ना आने से किसानों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं… तो वहीं दूसरी तरफ किसानों की मेंथा की फसल भी पूरी तरह खराब होने की कगार पर पहुंची चुकी हैं। तहसील के सभी गांवों के हालात बद्तर हैं। पानी की समस्या के साथ-साथ चिलचिलाती गर्मी भी किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन चुकी है। एक तरफ किसानों के खेतों में खड़ी मेंथा की फसल को पानी नहीं मिल पा रहा हैं.. तो वहीं दूसरी तरफ लू और कड़ी धूप के कारण भी किसानों की फसल चौपट हो रही हैं। रोज रोज महंगे किराए के पानी से मेंथा की फसल सींच पाना और ऊपर से महंगे कीटनाशक के छिड़काव और रसायनिक उर्वरक के बाद पानी के अभाव में किसानों की मेंथा की फसल को बचा पाना एक चुनौती भरा काम साबित हो रहा है। यानि की इन किसानों के लिए मेंथा की खेती ज्यादा लागत और कम मुनाफे वाली साबित हो रही हैं। जिसकी चिंता किसानों को भी सता रही हैं। लेकिन इसके बावजूद भी नहर विभाग के अधिकारी सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। और सिर्फ कागजो पर नहरों में भरपूर पानी दे रहे है… जबकि, हकीकत कुछ और ही हैं… जिसका खामियाजा मेंथा की खेती करने वाले किसानों को अपनी फसल के साथ-साथ खुदकों बर्बाद करके चुकाना पड़ रहा हैं..

हरियाणा के फतेहाबाद जिले में किसानों के अवैध रूप से जेनेटिकली मॉडिफाइड बैंगन या बीटी बैंगन की खेती करने का मामला सामने आया है। फतेहाबाद के एक किसान जीवन सिंह अपने खेतों में बीटी बैंगन की खेती करते हुए पाया गया हैं.. दरअसल, हमारे देश में बीटी बैंगनों के बीज का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं हैं… लेकिन इसके बाद भी बीजी बैंगनों के बीजों का इस्तेमाल करने का ये पहला मामला हैं जो सामने आया हैं… दरअसल, ‘नैशनल ब्‍यूरो ऑफ प्‍लांट जेनेटिक रिसोर्स की लैब में 29 अप्रैल को दो नमूने भेजे गए थे। जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि फतेहाबाद के रटिया ब्‍लॉक में बीटी बैंगन की खेती हुई है।’  हालांकि, एक अधिकारी के मुताबिक, इस रिपोर्ट को मुख्‍य सचिव की अध्‍यक्षता वाले पैनल के पास भेज दिया गया है जो इस बात पर फैसला करेंगे कि किस तरह से आधे एकड़ में खड़ी फसल को नष्‍ट किया जाए.. खैर आपको बता दें कि, बीटी बैंगन के उत्पादन पर हमारे देश में प्रतिबंध इसलिए हैं क्योंकि, इस बैंगन के पौधे की, हर कोशिका में एक खास तरह का जहर पैदा करने वाला जीन होता है जिसे बीटी यानी बेसिलस थिरूंजेनेसिस के नाम से जाना जाता है। एक रिसर्च में बीटी बैंगन खाने वाले चूहों के फेफड़ों में सूजन, अमाशय में रक्तस्राव, संतानों की मृत्युदर में वृद्धि जैसे बुरे प्रभाव देखे गए हैं। जिसके चलते ये बीटी बैंगन इंसानों पर भी बुरा प्रभाव डाल सकती हैं। और यही वजह है कि, भारत में इसके उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया गया हैं।

 

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