प्रयागराज के कुंभ से, उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपये का राजस्व

1,200 अरब रुपये का राजस्व

इस समय अगर बात करें, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर की तो संगम पर लगा कुंभ मेला पूरे प्रदेश से लेकर पूरे भारत का आकर्षण  केंद्र बना हुआ है. प्रयागराज में संगम की रेती पर बसे आस्था के कुंभ से इस समय पूरे देश का लगाव बढ़ता जा रहा है. तभी तो ऐसी उम्मीदें लगाई जा रही हैं कि, कुंभ खत्म होने तक यहां कम कम से 15 से 16 करोड़ लोग इस पावन प्रयाग की धरती पर आस्था की डुबकती लगा सकते हैं. ऐसे में अगर देखें तो प्रदेश सरकार की चुनौतियां काफी बढ़ गई हैं. क्योंकि किसी भी शहर में एक महीने के भीतर 15 से 16 करोड़ जनता का पहुंचना बहुत बड़ी बात होती है. हालांकि इस समय अगर बात करें राज्य सरकार के खर्चे की तो पिछले डेढ साल में राज्य की योगी सरकार ने इस कुंभ के लिए लगभग 4300 करोड़ रुपए तक खर्च किये हैं. ऐसे में अब ये अनुमान लगाया जा रहा है कि, उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपये का राजस्व मिलने वाला है. उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंध (सीआईआई) ने इसका अनुमान जताते हुए इसकी जानकारी दी है. इस रिपोर्ट की मानें तो 15 जनवरी से 4 मार्च तक आयोजित होने वाले कुंभ मेला धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है. हालांकि इसके आयोजन से जुड़े कार्यों में छह लाख से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार पैदा हो रहा है.

प्रदेश सरकार ने 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले के लिए आयोजन के लिए लगभग 4300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं जो साल 2013 में आयोजित महाकुंभ के बजट से तीन गुना ज्यादा है. सी्रआईआई के अध्ययन के मुताबिक कुंभ मेला क्षेत्र में आतिथि क्षेत्र में करीब ढ़ाई लाख लोगों को रोजगार मिला है. इन सबके अलावा एयरलाइंस और हवाई अड्डों के आसपास से करीब ड़ेढ लाख लोगों को रोजी-रोटी मिली है.

इन सबके अलावा अगर टूर ऑपरेटरों की बात करें तो, इस कुंभ के माध्यम से लगभग 45,000 टूर ऑपरेटरों को रोजगार मिला है. साथ ही इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों में भी लगभग 85,000 रोजगार के अवसर बनें हैं. सीआईआई के अनुमान की मानें तो कुंभ मेले से उत्तर प्रदेश को करीब 12 सौ अरब रुपये का इस कुंभ के माध्यम से राजस्व मिला है. इनके अलावा पड़ोस के राज्यों राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब को भी इससे काफी फायदा पहुंचा है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि कुंभ में शामिल होने के लिए पर्यटक इन राज्यों से पर्यटन स्थलों पर जा सकते हैं.

गौरतलब है कि, इस अर्द्धकुंभ में करीब 15 से 16 करोड़ श्रद्धालुओं की आने की संभवना जताई जा रही है. दुनिया के लिहाज से अगर देखें तो ये पूरी दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है. जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोग आते हैं. अपनी पौरणिक महत्वा और भारतीय संस्कृति के चलते आज कुंभ मेला पूरे विश्व में जाना जाता है.

 

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