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पद्म श्री पुरस्कार से नवाजे गये ये किसान, अपने आप में खास हैं-

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पद्म श्री पुरस्कार से नवाजे गये किसान

पद्म श्री पुरस्कार से नवाजे गये किसान, अपने आप में खास हैं-

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भारत की भौगोलिक परिपाटी की अगर बात करें तो भले ही भारत दुनिया के लिहाज से और क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सातवां बड़ा देश है, हालांकि यहां की जनसंख्या आज इतनी है कि, कोई भी देश इसकी बराबरी नहीं कर सकता. ऐसे में एक सवाल है जो हर किसी के दिमाग में पनपना जायज है की इतनी बड़ी जनसंख्या का पेट कौन भरता है और कैसे भरता है….? जिसका जबाव बस एक है…किसान

वो किसान जो अपने खेतों में सुबह से लेकर शाम तक बस इसलिए काम करता है. जिससे उसके अन्ना और खेतों में पैदावार इतनी हो जाये कि उसका खर्च आराम से चल सके. हालांकि इन सबके दौरान उस किसान के दिमाग में बस इक्का दुक्का लोगों के पेट के बारे में ख्यालात आता होगा. क्योंकि उसे अपने पेट की परवाह होती है. क्योंकि उसे अच्छी पैदावार कर बाजार में बेचना होता है. जिससे उसके घर का खर्च चल सके. जिससे उसके घर की बेटी उसके घर का बेटा पढ़ सके….इन सबके बीच ये वही किसान होता है. जो अन्ना पैदा कर बाजार में पहुंचाता है. जिससे सवा अरब भारतवासियों का सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक भरता है

शायद यही वजह है कि, आज किसानों की इस अहमियत को सरकार से लेकर देश का हर नागरिक समझ रहा है. उसे महसूस कर रहा है. बात अगर 26 जनवरी 2019 की करें तो भले ही ये भारत का 70वां गणतंत्र दिवस रहा हो. इस गणतंत्र में अलग अलग तरह की झाकिंया दिखाई गई हो….हालांकि इस गणतंत्र एक चीज और खास रही. जो हर भारतीय नागरिक के लिए या फिर उन लोगों के लिए खास रही. जो दिनों रात अपने खेत में काम करते हैं….वो चीज थी..किसानों को उनका सम्मान देने की.

इस गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार ने भारत के 12 किसानों के पद्म श्री आवार्ड से सम्मानित किया. चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर किन किन लोगों को सरकार ने इस सम्मान से सम्मानित किया है. विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्यों के लिए देशभर से इस बार 112 नाम इस पुरस्कार के लिए चुने गए थे. जिसमें पहली बार इतनी बड़ी संख्या में किसानों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है. पद्म श्री पाने वाले ये किसान अपने आप में बेहद खास हैं. क्योंकि इन किसानों ने खेती के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाया है. किसी ने प्राकृतिक खेती के लिए जंग छेड़ी तो किसी ने केले की खेती से ऐसा मुनाफा कमाया कि लोगों के लिए वो मिसाल बन गया.

इन सबमें एक चीज खास रही वो रही नारी किसान…जब एक औरत अपने गांव में अपने घर की चौखट लांघ कर बाहर खेती के लिए निकलती है…उस समय भी उस पर अपने परिवार से लेकर अपने खेती की चिंता रहती है. ऐसे में भारत सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित करना हर भारतीय नारी के लिए सम्मान की बात है.

चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर वो कौन से दस नाम हैं जिन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया है.

कंवल सिंह चौहान, हरियाणा

सोनीपत के गांव अटरेना के रहने वाले किसान कंवल सिंह चौहान जिन्होंने एलएलबी की थी. वकील बनने के लिए हालांकि इस समय देश के सर्वोच्च किसान बन गये और इसी के चलते देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इन्हें सम्मानित कर चुके हैं. कंवल सिंह बेबी कॉर्न और मशरूम की खेती के लिए पहचाने जाते हैं. जिसके चलते इस समय हजारों की संख्या में विदेशी किसान और भारतीय किसान इनसे प्रशिक्षण लेने आते हैं.

बाबूलाल दाहिया, मध्य प्रदेश

इसके बाद सतना के पिथौराबाद गांव के किसान बाबूलाल दाहिया जिनकी उम्र 75 साल है. जो खेती के साथ साथ साहित्य की दुनिया में भी पहचान रखते हैं. किसी जमाने में पोस्ट मास्टर के पद से रिटायर होने वाले बाबूलाल 8 एकड़ खेत पर जैविक खेती करते हैं. इस समय उनके पास देशी धान की 110 किस्में हैं.

हुकुमचंद पाटीदार, राजस्थान

इसके अलावा राजस्थान के हुकुमचंद पाटीदार जोकि स्वामी विवेकानंद एग्रिकट्रियल रिसर्च फार्म के संस्थापक भी हैं. हुकुमचंद 40 एकड़ में जैविक खेती करते हैं. जैविक खेती में अपनी अलग पहचान रखने वाले हुकुमचंद के उत्पाद आज दुनिया के 7 देशों में जाते हैं. चाहे बात गेंहूं, जौ, चना, मेथी या फिर धनिया की हो, हुकुमचंद का नाम राजस्थान में मिसाल के तौर पर दिया जाता है.

राजकुमारी देवी, बिहार

इसके बाद नंबर आता है..उस किसान का जोकि अपने परिवार के साथ खेतों की देखभाल कर आज वहां पहुंची है. जहां हर भारतीय नारी पहुंचना चाहती है. मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड के गांव आनंदपुर की रहने वाली राजकुमार देवी, जिन्हें लोग किसान चाची कहकर बुलाते हैं. किसान श्री पुरस्कार से सम्मानित किसान चाची किसी समय में जब घर से खेती की अलख जगाने के लिए साईकिल पर निकलती थी तो लोग उन्हें हिकारत भरी नजरों से देखते थे. गांव-गांव साईकिल से जाकर महिलाओं को जागरूक करने के साथ-साथ जैविक खेती के तरीकों को सबको समझाने वाली किसान चादी साथी ही खुद के बनाये मुरब्बा, आंवले और अचार की मार्केटिंग भी करती हैं.

भारत भूषण त्यागी, उत्तर प्रदेश

1 एकड़ जमीन पर, मिश्रित और सहफसली खेती करके साल भर में 3 से 4 लाख रुपए कमाने वाले किसान भरत भूषण त्यागी को भारत सरकार ने किसान पुरस्कार से सम्मानित किया है. एक साल के भीतर एक औसत किसान से 4 गुना ज्यादा कमाई करने वाले किसान भारण भूषण त्यागी जैविक कृषि कुंभ में धरती पुत्र सम्मान से भी नवाजे जा चुके हैं. आज भारत भूषण मिश्रित और सहफसली खेती के लिए किसानों को जागरूक कर रहे हैं.

रामसरन वर्मा, उत्तर प्रदेश

इसके बाद बाराबंकी के हरख ब्लॉक, गांव दौलतपुर के रहने वाले प्रगितिशील किसान रामसरन वर्मा को भारत सरकार ने पद्म श्री पुरस्कार के लिए चुना है. रामसरन वर्मा केला, टमाटर, आलू और मेंथा की खेती के लिए पहचाने जाते हैं. इन सबके अलावा रामसरन वर्मा को फसल चक्र के लिए पहचाना जाता है. अपने पास महज 10 एकड़ खेत होने के साथ लीज पर रामसरन वर्मा 110 एकड़ खेत पर खेती करते हैं. अब तक 50 हजार से ज्यादा किसानों को प्रशिक्षित कर चुके रामसरन वर्मा से विदेश के किसान भी किसानी के तौर तरीके सीखने आते हैं. यही वजह है कि, आज केले की खेती के चलते बाराबंकी के आसपास के जिलों में रामसरन पहचाने जाते हैं.

जगदीश प्रसाद पारीक, राजस्थान

बात अगर जैविक खेती में नायाब प्रयोगों की करें तो जगदीश प्रसाद का नाम उन सबमें सबसे ऊपर आता है. क्योंकि राजस्थान के रहने वाले जगदीश प्रसाद ने अपनी खेती के दम पर 15 किलो का गोभी का फूल उगाकर सबको चौका दिया था. जैविक तरीके से उगाये गये इस गोभी को आईआईएम ने प्रमाणित किया था. जिसके बाद इसे गिनीज बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में दर्ज किया गया था. इसके पहले भी जगदीश प्रसाद राष्ट्रपति और राज्यपाल के हाथों सम्मानित हो चुके हैं.

वल्लभभाई वासराभाई, गुजरात

गुजरात के रहने वाले वल्लभभाई वासराभाई मारवाणिया को भारत सरकार ने पद्म श्री सम्मान से सम्मानित किया है. मात्र 13 साल की उम्र में खेती से जुड़ने वाले वल्लभभाई आज 96 साल के हैं. अब तक इन्हें किसान सम्मान से जुड़े कई तरह के आवार्ड मिल चुके हैं. वल्लभभाई वासराभाई आज के समय में गाजर की खेती के लिए पहचाने जाते हैं. महज पांचवीं कक्षा तक पढ़ने वाले वल्लभभाई के यहां गाजर चारे के लिए उगाया जाता था..हालांकि उन्होंने बताया कि, गाजर से मुनाफा कैसे कमाया जा सकता है.

कमला पुजारी, ओडिशा

ओडिशा में पिछले दिनों राज्य सरकार ने एक आदिवासी महिला को योजना बोर्ड का सदस्य नियुक्ति किया था. ये वो महिला हैं, जोकि कोराटपुर जिले से आती हैं. जिनका नाम कमला पुजारी है. कमला पुजारी दिनों दिन विलुप्त हो रही धान की किस्मों की सुरक्षा के लिए विगत वर्षों से कार्य कर रही हैं.

वेंकटेश्वर राव यादलापल्ली, आंध्र प्रदेश

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने वाले किसान, वेंकटेश्वर राव बहुत कम उम्र से ही खेती कर रहे हैं. प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए राव ने सबसे पहले पत्रिका निकाली फिर मोबाइल ऐप लॉन्च किया. जिससे इस खेती को बढ़ावा मिल सके. अब तक राव को किसानों की मदद के लिए कई पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है. किसानों को उर्वरक और कीटनाशकों के सही प्रयोग के प्रति जागरूक करने के लिए 2016 रैथु नेस्थम फाउंडेशन की स्थापना की जिसके तहत किसानों को फोन पर भी जानकारी दी जाती है. इसी प्रयास को देखते हुए भारत सरकार ने राव को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया है.

सुल्तान सिंह

वहीं इन सबके साथ इस बार मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने सुल्तान सिंह को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया है.

नरेंद्र सिंह

इसके अलावा डेयरी प्रजनन विभाग में अपना अहम योगदान निभाने वाले किसान नरेंद्र सिंह को पद्म श्री पुरस्कार से नवाजा गया है. जाहिर है, किसानों के हक में बंटे पद्म श्री आवार्ड देश के उन किसानों के लिए संजीवनी का काम करेंगे. जो किसान खेती से उतना लाभ नहीं कमा पाते और खेती को निर्थक समझकर उससे दूर बना लेते हैं…

गौरतलब है कि, जब भी देश में कोई भी नागरिक किसी भी जगत में किसी भी अगल और अन्य तरह का काम करता है, तो उसे पद्म पुरस्कार से यानि की भारत के सर्वोच्च नागरिक के तौर पर इस पुरस्कार से नवाजा जाता है. कहने को तो देश के 112 सदस्यों को इस बार ये पुरस्कार मिला है. हालांकि खेती के क्षेत्र में 12 किसानों को मिला ये पुरस्कार दर्शाने और बताने के लिए काफी है कि, आज भी खेती हमारे भारत के भौगोलिक परिपाटी का आधार है. जिससे सवा अरब जनसंख्या का पेट भर रहा है.

 

 

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