जिस गांव में होता था बाल विवाह आज वहां की बच्चियां जा रहीं है इंग्लैंड और रूस

जिस गांव में होता था बाल विवाह आज वहां की बच्चियां जा रहीं है इंग्लैंड और रूस

जिस गांव में होता था बाल विवाह आज वहां की बच्चियां जा रहीं है इंग्लैंड- रूस  रांची : आज से ठीक पांच साल पहले रांची जिले के हुजीर गांव. को कोई जानता भी नहीं था। ये गांव अति पिछड़ा था, इस गांव में बाल मजदूरी, बाल विवाह जैसी गंभीर समस्या थी। मगर अब इस गांव की लड़कियों ने ना सिर्फ़ इस गांव की किस्मत बदल दी है बल्कि इस गांव का नाम देशभर में रोशन किया है। जहां आज भी गांव में लड़कियों के पढ़ने लिखने की एक सीमा तय की जाती हो शादी कर दी जाती हो वहां इन सभी लड़कियों ने अपनी अलग पहचान बनायी है। जिन आदिवासी बच्चियों ने कभी अपने गांव से निकलकर दूसरा गांव तक नहीं देखा आज वो बच्चियां इंग्लैंड और रूस जैसे देशों में फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रही है। जी हाँ, ये सच है कि इस गांव की 7 बच्चियां फुटबॉल की ट्रेनिंग के लिए इंग्लैंड जबकि दो बच्चियां रूस जा रहीं हैं।

आपको बता दें कि ऑस्कर फाउंडेशन इन बच्चियों को खेलने का मौका देता है। गांव चारी हुजीर, पाहन टोली, हलदामा, जीराबार व कादीटोली समेत कई गांव ऐसे हैं जहां ऑस्कर फाउंडेशन फुटबॉल के जरिये बच्चों को शिक्षा से जोड़ने में लगा है। बच्चे फुटबॉल में इतना शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं कि कई जगहों से जीतकर ट्राफी लेकर आये हैं। इन बच्चियों ने देश – विदेश के कई टूर्नामेंट में जीत हासिल की है। मगर इन सभी को इतनी आसानी से ये सब हासिल नहीं हुआ बल्कि इन्हे इसके लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा। घर के सारे कामकाज करने के बाद स्कूल जाने से पहले यही जुनून उन्हें मैदान तक खींचकर लाता है। इनमें से कई लड़कियों के घरवाले उन्हें खेलने देने के लिए तैयार नहीं थे, कई लड़कियों के घरवाले उनकी शादी करवाना चाहते थे। मगर परिवार और हालातों से लड़कर इन लड़कियों ने जीत हासिल की और आज इस मुक़ाम पर पहुंची। इनकी उपल्बधियां देखकर आप हैरान रह जायेंगे। सेंटर में मौजूद मेडल, ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र इनकी खामोशी से की गयी मेहनत की सफलता की कहानी बयां करते हैं।

 

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