संघर्ष में सिमटे सपने फिर भी होंठों पर बिखरी हौसलों की मुस्कान

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संघर्ष में सिमटे सपने फिर भी होंठों पर बिखरी हौसलों की मुस्कान

गिरिडीह : बेंगाबाद काशीटांड़ गांव की रहने वाली श्यामा देवी देखने में बहुत ही साधारण सी महिला हैं। अब हमारे ग्रामीण क्षेत्र की महिला तो साधारण ही होती हैं। मगर आप अगर इनकी उपलब्धियां देखेंगे तो इन्हे साधारण नहीं कहेंगे। क्योंकि श्यामा देवी कभी आम औरतों की तरह ही पहले घर का चूल्हा चौका संभालती थी मगर आज श्यामा देवी गांव-गांव स्कूटी से घूमती हैं। आजीविका मिशन के तहत सखी मंडल का एकाउंट चेक करती हैं। एकाउंट में क्या गलती है,क्या सही करना है वो सबको समझाती हैं। इस काम से ना सिर्फ वो आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि उन्होंने दूसरी महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़े होने की एक दिशा दिखाई है। वाकई ये बड़ी बात है एक गांव की महिला का आजीविका मिशन से जुड़ना, फिर गांव-गांव जाकर सखी मंडल की मीटिंग करना। इसके बाद आस-पास के गांवों की सखी मंडल के एकाउंट का लेखा-जोखा रखना और फिर घर जाकर अपने घर परिवार को संभालना।

श्यामा ग्राम संगठन में एकाउंटेंट बनने के बाद मैं क्लस्टर लेवल में अकाउंटेंट बन गयी और दीदियों को एकाउंट का प्रशिक्षण देने वाली प्रशिक्षक भी बन गई। जब काम बढ़ा तो श्यामा ने करीब 30 हजार रुपये की एक स्कूटी खरीदी और आज एक गांव की महिला साड़ी पेहेन कर पूरे गांव में घूम कर महिलाओं की मदद करती है। ये देखकर वाकई बहुत अच्छा लगता है क्योंकि शहरों में महिलाऐं आत्मनिर्भर होती हैं उन्हें बढ़ावा मिलता ही है मगर गांव की महिअलों को कुछ अलग करने के लिए काफी विरोध झेलने पड़ते हैं। आज श्यामा के चेहरे पर आत्मविश्वास साफ़ दिखाई देता है। इन सब के बीच बड़ी बात ये है कि श्यामा ने पैसा कमाने के बारे में नहीं सोचा वो तो बस घूम-घूम कर दूसरों को अपना जीवन संवारने के लिए प्रेरित करने में जोर देती हैं।

 

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