शारदा चिट फंड घोटाले की शुरुवाती कहानी से लेकर, CBI के मामले तक जानें सुलगते बंगाल का कौन जिम्मेदार

शारदा चिट फंड घोटाले की शुरुवाती कहानी

एक ऐसा घोटाला जिसकी शुरुवात होती है, एक ऐसे राज्य से जो इस समय सियासत की भट्टी में सुलग रहा है. बात अगर घोटाले की करें तो, इस घोटाले की नींव साल 2008 में पड़ी और ये घोटाला सबकि नजर में साल 2013 में आया….आखिर क्या है चिट फंड घोटाले का किस्सा जिसके चलते इस समय पूरे पंश्चिम बंगाल में सियासत इस तरह करवट ले रही है कि, केंद्र और राज्य दोनों सरकारें आपस में आरोप प्रत्यारोप का खेल, खेल रही हैं.

चिट फंड घोटाला……बचपन में खेले गये एक खेल चिट पर्ची की अगर बात करें तो चिट फंड घोटाला भी उसी तरह लोगों के साथ खेला गया था. जैसा की बचपन के वक्त में हम अपने दोस्तों के साथ खेलते थे. अगर चिट फंड घोटाले की आसान लहजे में बात करें तो, ऐसा रूपया जो कुछ लोग मिलकर किसी एक स्कीम में लगाते हैं बदले में उन्हें एक कागज दे दिया जाता है इसके साथ उन्हें सलाह दी जाती है कि, अब इस स्कीम में जो भी फायदा होगा उसमें आपको भी हिस्सा मिलेगा. इस स्कीम को ही चिट फंड कहा जाता है.

इस फंड में अगर आपको उधार चाहिए तो भी मिलेगा. अगर देश की बात करें तो, इस तरह के फंड को राज्य सरकारों ने भी मान्यता दे रखी थी. चिट फंड की स्कीमों में हर महीने इसके हिस्सेदार पैसा डालते हैं और महीने के आखिरी समय में ये पैसा उन्हीं में से एक सदस्य को पैसा दे दिया जाता है और पैसा किसी मिलेगा इसके लिए सहारा लिया जाता है निलामी का. जो इसमें सबसे कम बोली लगाता है उसे ये पैसा दे दिया जाता है और बाकि पैसा दूसरे लोगों में बांट दिया जाता है.

ये तो रहा चिट फंड घोटाला हालांकि अगर शारदा चिट फंड घोटाले की बात करें तो आखिर वो क्या है…जिसके चलते पूरे देश से लेकर पश्चिम बंगाल में सियासत हिलोरे मार रही है. पश्चिम बंगाल के अगर सबसे बड़े आर्थिक घोटाले की अगर बात करें तो शारदा चिट फंड घोटाले का नाम उन सबमें सबसे ऊपर है. इल्जाम है कि, शारदा ग्रुप की जो दो चार कंपनियां हैं उन्होंने लोगों को लुभावने और झूठे ऑफर दिया. इन सबमें एक लोक लुभावना लप्पा लोगों को दिया कि, अगर आप इस कंपनि में 25 साल के लिए अपने रूपये इनवेस्ट करते हैं तो आपकी रकम को 34 गुना कर दिया जायेगा.

34 गुना वाली स्कीम तो आज तक RBI नहीं दे पाई, दुनिया की कोई फंड कंपनी नहीं दे पाई हालांकि शारदा कंपनी लोगों को ये लप्पा देने लगी. इसके बार धरातल स्तर पर लोगों को ठगने के लिए पूरे राज्य में जगह जगह अपने एजेंट नियुक्त किये और लोगों को गाढ़ी कमाई अपने हवाले करते रहे.

राज्य सरकार की एक जांच रिपोर्ट की माने तो शारदा ग्रुप की चार कंपनियां शारदा टूर एंड ट्रैवल्स, शारदा एग्रो, शारदा रियलिटी, शारदा कंस्ट्रैक्सन की अलग अलग स्कीमें लोगों को थमाई गई.

अब सबसे बड़ा सवाल….ये सभी कंपनियां अपनी स्कीमें लोगों को कैसे थमाते थे, ये कंपनीयां लोगों को तीन स्कीमों के सहारे सभी को अपने जाल में फंसाती थी.

पहली स्कीम फिक्सड डिपॉजिट

दूसरी स्कीम रिकरिंग डिपॉजिट

और तीसरी स्कीम मंथली इनकम डिपॉजिट

इनमें कई गुना रिटर्न और फारेन टूर के भी सपने लोगों को दिखाये जाते थे. जिसके चलते कंपनी ने साल 2008 से लेकर 2012 के बीच ही, 14 लाख छोटे निवेशको को ठगा….कुल 1200 करोड़ रुपये…शारदा कंपनी ने देश के पश्चिम बंगाल के अलावा असम, उड़ीसा, झारखंड के अलावा कई राज्यों में कुल 300 ब्रांच खोल रखी थी. अब यहां बात आती है कि आखिर शारदा ग्रुप का अगुवा कौन था….वो कौन था जो इसे चला रहा था. तो शारदा कंपनी का चेयरमैन था…सुदीप्तो सेन

एक ऐसा शख्स जो इतनी बड़ी धोखेबाजी की कंपनी पूरे देश में चला रहा था और लोगों को इसके बारे में बिल्कुल खबर तक नहीं थी. सुदीप्तो सेन की अगर बात करें तो उसने इन कंपनियों में इनवेस्ट करने वाले लोगों के रुपयों पर अपना अधिपत्य जमा रखा था. हालांकि जब इसकी पोल खुली तो सेन पर ऐसा इल्जाम लगाया गया कि, इन्होंने लोगों के रूपयों का गलत इस्तेमाल किया. इस दौरान सुदीप्तो सेन ने भारतीय सविंधान से लेकर IPC की धाराओं का भी ख्याल नहीं रखा. जिससे कहा जा सकता है कि, इतनी बड़ी कंपनी चलाने वाले को कानून से किसी भी तरह का भय नहीं था.

हालांकि जब सब कुछ सही चल रहा था तो आखिर इस फरेब का खुलासा कैसे हुआ….तो इसका जबाव है कि, जब साल 2013 में लोगों के रूपयों का रिर्टन मिलना बंद हो गया तो इसको लेकर लोगों के बीच सुगबुगाहट पैदा हुई और यहां से उजागर हुआ एक ऐसा मामला जिसने ये पश्चिम बंगाल की नींव हिला दी. क्योंकि इस मामले के उजागर होने के बाद ऐसी खबरें आई कि, शारदा ग्रुप के चेयरमैन सुदीप्तो सेन का पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सीधा जुड़ाव है.

इस दौरान शारदा ग्रुप अपने धरातल से जुड़ाव के लिए दुर्गा पूजा से लेकर हर छोटी बड़ी संस्था में निवेश करता था, ताकि उसका जुड़ाव बंगाल के लोगों के बीच बना रहे. इस दौरान जब घोटाला उजागर हुआ तो ममता बनर्जी की सरकार ने 500 करोड़ का फंड बनाने का ऐलान किया. ममता ने कहा कि, घोटाले में जिन छोटे लोगों का पैसा डूब गया है उन्हें इसमें राहत दी जायेगी. उसी समय मार्च 2013 में कांग्रेस सरकार के मंत्री सचिन पायलट ने जानकारी दी की…इस समय देश में 87 कंपनियों के खिलाफ लोगों को लोक लुभावने स्कीमें चलाने का मामला दर्ज है. जिसमें 73 कंपनियां महज शारदा ग्रुप की हैं. यहां से शुरू हुआ सियासी पचड़ा. क्योंकि इस मामले के उजागर होने के बाद शारदा ग्रुप का चेयरमैन सुदीप्तो सेन वहां से भाग निकला जिसे कश्मीर से गिरफ्तार किया गया.

गिरफ्तारी के बाद पता चला कि, सुदीप्तो सेन 200 से ज्यादा कंपनियां चला रहा था…शारदा पर मनी लाड्रिंग के भी इल्जाम लगे….अब सवाल ये की इन सबके बीच CBI कहां थी….CBI की एन्ट्री साल 2014 में मोदी सरकार आने के बाद होती है. एक तरफ मोदी ने देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और दूसरी तरफ CBI ने शारदा चिट फंड मामले की जांच शुरू की और इसी मामले की जांच के लिए CBI पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव से पूछताछ के लिए गई थी. जिसके बाद बंगाल की सियासत में और बंगाल में ऐसा तूफान मचा कि, ममता ने इस समय को जहां आपातकाल कह दिया तो वहीं केंद्र सरकार ने इसे ममता की तानाशाही कह दिया….

जिसके बाद CBI पहुंची सुप्रीम कोर्ट के पास और राजीव जी पहुंचे हाईकोर्ट के पास….हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनया है और बंगाल के डीजीपी से कहा है कि, CBI के जांच में राजीव उनकी मदद करें…गौरतलब है कि, राजीव पर आरोप है कि, उन्होंने इस मामले से जुड़ी डायरियों को गायब किया है….अब असल सच्चाई क्या है…ये तो या वो जानता है जो इसका गुनहगार है या फिर ऊपर वाला हालांकि CBI जांच चल रही है देखते हैं इसकी रिपोर्ट कब आयेगी.

 

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