छत्तीसगढ़ की कोपलवाणी संस्था में दुनिया की गंदी नजरों से महफूज है बच्चियां

छत्तीसगढ़ की कोपलवाणी संस्था

एक वक्त था जब मां-बाप बेटियों के जन्म लेने पर मायूस हो जाया करते थे। क्योंकि, उस दौर में लड़कियों के घर में जन्म लेने का मतलब माता-पिता पर दहेज का बोझ बढ़ जाना होता था। तो वहीं आज भी मां-बाप घर में लड़कियों के पैदा होने पर मायूस हो जाते हैं, लेकिन आज वजह दहेज नहीं, लड़कियों की सुरक्षा होती हैं।

कुछ दिनों पहले की ही बात करते हैं, तो मुज्जफरनगर और उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में बालिका गृह के नाम पर लड़कियों के यौन शोषण का मामला सामने आया था। मगर इसी बीच शुक्र है कि, छत्‍तीसगढ़ में एक ऐसी जगह है जो नाम के लिए बच्‍चियों को आश्रय नहीं देती, दुनिया की गंदी नजरों से पूरी तरह महफूज भी रखती है।

जहां एक ओर जगह-जगह महिलाओं और बच्चियों के साथ दरिंदगी की खबरें हर दिन सामने आती हैं, वहीं छत्तीसगढ़ की कोपलवाणी संस्था में बालिकाओं की सुरक्षा का ध्यान सभी कार्यों से ज्यादा रखा जाता हैं। बता दें कि, छत्तीसगढ़ की कोपलवाणी संस्था में दिव्यांग मूकबधिर बालिकाओं के लिए छात्रावास परिसर के ठीक सामने विद्यालय परिसर भी बनाया गया हैं।

इस संस्था में बालिकाओं की सुरक्षा के लिए 24 घंटे दो पालियों में महिला सुरक्षाकर्मी तैनात रहती हैं। 12 सीसीटीवी कैमरे से पूरे परिसर की देखरेख की जाती है। जिसके चलते किसी भी आपराधिक गतिविधि को अंजाम नहीं दिया जा सकेगा। बच्चियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए भोजन से लेकर लाइब्रेरी तक की व्यवस्था परिसर के अंदर की गई है, ताकि छात्राओं को बाहर जाने की जरूरत ही न पड़े।

गौरतलब है कि, इस संस्था में बच्चियों की पढ़ाई के लिए शिक्षिकाएं और शिक्षक उपलब्ध है। इस संस्था में 53 छात्राएं छात्रावास, लाइब्रेरी, कम्प्यूटर लैब जैसी कई सुविधाओं का लाभ उठा रही हैं। संस्था की ही बालिका ने इशारों से बताया कि, कि भगवान ने तो हमारी आवाज छीन ली, लेकिन हम कोपलवाणी संस्था में शिक्षा लेकर अपने आत्मविश्वास की आवाज बुलंद कर रहे हैं। हम सब यहां सुरक्षित हैं।

रायपुर स्‍थित मूकबधिर संस्‍था ‘कोपलवाणी’ की अधीक्षक विजय लक्ष्‍मी तिवारी ने बताया कि, मूकबधिर दिव्यांग छात्राओं को शिक्षा के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उन्हें कभी ये एहसास न हो कि, उन्हें संसार ने कमजोर बनाया है। वे समाज का अधूरा हिस्सा है, वो कभी खुदको किसी भी तरह अन्य लोगों से कमजोर न समझें, इसलिए उन्हें यहां पूरी तैयारी के साथ शिक्षा दी जा रही है

 

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