सीता माता पर बयान देकर फंसे यूपी के डिप्टी सीएम, देखें नेताओं के और भी बेहूदे बयान

सीता माता पर बयान देकर फंसे यूपी के डिप्टी सीएम, देखें नेताओं के और भी बेहूदे बयान

सीता माता पर बयान देकर फंसे यूपी के डिप्टी सीएम, देखें नेताओं के और भी बेहूदे बयान   उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के माता सीता पर दिए गए विवादित बयान के बाद अब उनकी कड़ी निंदा हो रही है। यही नहीं दिनेश शर्मा के खिलाफ सीतामढ़ी में केस भी दर्ज किया गया है। आपको बता दें कि दिनेश शर्मा मथुरा में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे। जहां उन्होंने कहा था कि सीता माता एक कच्चे बर्तन से पैदा हुई थी। इसका मतलब है कि उस समय भी टेस्ट ट्यूब बेबी का प्रचलन था और हो सकता है कि सीता माता टेसट ट्यूब से पैदा हुई हों।

इस बयान को सुनकर आप चौंकिए मत क्योंकि ये पहली बार नहीं है जब इन नेताओं ने ऐसे बेतुके बयान दिए हो इससे पहले भी कई नेता ऐसे बेहूदे बयान दे चुके हैं। एेसे बयान देकर नेता अकसर जनता में बनाई हुई अपनी छवि को भी खराब कर लेते हैं। कई बार ऐसे बयानों को लेकर इन नेताओं की काफ़ी फ़ज़ियत भी हो जाती है मगर ये नेता है कि मानते नहीं। इससे पहले भी कई नेता एेसे बयान दे चुके हैं। आइए आपको दिखाते हैं नेताओं के कुछ ऐसे ही अजीब गरीब बयान।

गणेश जी की प्लास्टिक सर्जरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में एक निजी अस्पताल का उद्घाटन करते हुए कहा था कि, ‘विश्व को प्लास्टिक सर्जरी का कौशल भारत की देन है। दुनिया में सबसे पहले गणेश जी की प्लास्टिक सर्जरी हुई थी, जब उनके सिर की जगह हाथी का सिर लगा दिया गया था।’

महाभारत काल में था इंटरनेट

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देब जब से मुख्यमंत्री बने हैं तभी से वो अपने कामों से नहीं बल्कि बयानों से चर्चा में हैं। दरअसल देब ने एक कार्यक्रम में कहा कि महाभारत के दौर में भी इंटरनेट था। संजय ने हस्तिनापुर में बैठकर धृतराष्ट्र को बताया था कि कुरुक्षेत्र के मैदान में क्या हो रहा है। इसका मतलब है कि उस समय भी तकनीक, इंटरनेट और सैटेलाइट था।

इसके अलावा बिप्लव ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्‍होंने डायना हेडन जो मिस वर्ल्‍ड रह चुकी हैं। उन्ही के खिताब पर सवाल उठा दिया। उनका कहना था कि डायना हेडन की जीत फिक्स थी।

डार्विन का सिद्धांत गलत

मोदी सरकार में मंत्री और पूर्व IPS ऑफिसर सत्यपाल सिंह तो विज्ञान पर सवाल खड़े कर चुके हैं। एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया था कि मानव के क्रमिक विकास का चार्ल्स डार्विन का सिद्धांत ‘वैज्ञानिक रूप से गलत है’ और स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम में इसे बदलने की जरूरत है। वैज्ञानिक जगत की तीखी प्रतिक्रिया और बयान की कड़ी आलोचना के बाद सरकार को इस बयान पर सफाई भी देनी पड़ी थी।

सत्यपाल सिंह ने IIT छात्रों को ये भी कहा था कि पुष्पक विमान से ही दुनिया में विमान बनाने का आइडिया आया। उन्होंने कहा कि ‘राइट ब्रदर्स’ से पहले ही एक भारतीय शिवकर बाबुजी तलपड़े ने एयरप्लेन का आविष्कार कर दिया था। कहा जाता है कि तलपड़े ने वैदिक ग्रंथों से ही सबसे पहले एयरक्राफ्ट का आइडिया दिया था। दावा किया जाता है कि तलपड़े ने साल 1895 में मुंबई के जूहू बीच पर भीड़ के सामने इसका प्रदर्शन भी किया था। वहां बड़ोदा के राजा भी मौजूद थे। एयरक्राफ्ट 1500 फीट की ऊंचाई पर गया था और वहां कुछ मिनट रुका।

अब ये बयान कितने सच्चे हैं या कितने झूठे ये तो हम नहीं कह सकते मगर हां इतने बड़े ओहदे पर होने के बाद इन नेताओं के ऐसे तथ्यहीन बयान देना क्या सही है ?

 

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