सोशल मीडिया आपकी मानसिकता को कर रहा है बीमार, वजह भी आप ख़ुद हैं !

सोशल मीडिया आपकी मानसिकता को कर रहा है बीमार, वजह भी आप ख़ुद हैं !

सोशल मीडिया आपकी मानसिकता को कर रहा है बीमार, वजह भी आप ख़ुद हैं ! आप दिनभर में जो सोचते हैं, जो आपके दिमाग में चलता रहता है, जिस वजह से आपको चिंता होती है या किसी बात से आप दुखी हो जाते हैं तो ये बहुत हद तक इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप कैसे समाज में रहते हैं। आपके आस पास कैसे लोग हैं, आप क्या सुनते हैं क्या देखते हैं और किस विषय पर चर्चा करते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर आप क्राइम राजनीति या दुर्घटनाओं की खबरें ज़्यादा पढ़ते हैं या इस बारे में चर्चा करते हैं तो आपका स्वभाव आपका आचरण बहुत हद तक बदलने लगता है। जो अच्छे बदलाव नहीं है बल्कि नकारात्मकता की और आपके व्यवहार और आपकी सोच को बढ़ा रहे हैं।

इन सबका सबसे बड़ा कारण हम आज सोशल मीडिया को ही मानते हैं। क्योंकि पहले जो चीजें छुपाई जाती थी अब वो बड़े आराम से सोशल मीडिया पर परोसी जा रही है। जैसे मर्डर और एक्सीडेंट के घिनोने वीडियो को बिना जरा सा भी छुपाए धड्ड्ले से दिखाया जा रहा है। लड़कियों से छेड़छाड़ के वीडियो वायरल कर दिए जाते हैं। इसमें वो लोग भी हमारी नज़र में दोषी हैं जो इन वीडियो को शेयर करते हैं। यही नहीं अब तो जानवरों को मारने और जलाने वाले वीडियो उनकी दर्द की करहाने वाली आवाज के साथ ही अपलोड कर दिए जाते हैं। सोशल मीडिया पर एक पार्टी की बढ़ाई कर दूसरी पार्टी के नेताओं के के दमन और शोषण के किस्से हमे सुनाए जाते हैं। हिन्दू मुस्लिम या दलित की पिटाई या फिर भगवान् की तस्वीरों पर थूकना, मस्जिद के आगे जय श्री राम के नारे लगाना वगैरह वगैरह ना जाने और क्या क्या ! इन सबका मुख्य कारण है बीमार होती सामाजिक चर्चा जिसमें हम आसानी से देख सकते हैं कि सोच के स्तर पर लोग बुरी तरह से बीमार हो रहे हैं। क्या समाज बिमार हो चुका है या समाज को जानबूझकर बीमार किया जा रहा है ।

मौजूदा वक्त में ये सवाल इसलिये महत्वपूर्ण है क्योंकि आज के दौर में सोशल मीडिया के माध्यम से ही मानसिक बीमारी को प्रचार और प्रसार मिल रहा है। आज के समय में सोशल मीडिया ही सबसे बड़ा असामाजिक प्लेटफार्म बनता जा रहा है। मगर आप ये मत सोचिए कि आप इसमें भागीदार नहीं हैं क्योंकि हम सब बराबर के जिम्मेदार है वर्ण सोशल मीडिया पर ये कंटेंट और डालता ही कौन है या तो आप या हम। इसलिए सोचिए इस बारे में और खुद और समाज की सोच को बीमार करने से रोकिए।

 

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