एक बार फिर रोया किसान : खून पसीने की मेहनत बिकी कौड़ियों के मोल

एक बार फिर रोया किसान : खून पसीने की मेहनत बिकी कौड़ियों के मोल

एक बार फिर रोया किसान : खून पसीने की मेहनत बिकी कौड़ियों के मोल देश में इन दिनों किसानों की स्तिथि बेहद ख़राब है। किसान मेहनत कर के फ़सल खड़ी करता है मगर कभी फसलें बारिश की वजह से ख़राब हो जाती है। अगर फ़सल की अच्छी पैदावार हो भी जाए तो किसानों को इतना दाम भी नहीं मिलता कि उनकी लागत निकल जाए। कुछ ऐसा ही हुआ मध्यप्रदेश के किसानों  साथ जिनकी लहसुन की फसल कल तक एक उम्मीद बाँध रही थी मगर अब मंदसौर के किसानों का मन लहसुन का नाम सुनते ही भारी हो जाता है।

दरअसल किसानों ने दिन रात मेहनत कर के बढ़िया बीज लगाया और अपनी पाई पाई फसल पर खर्च कर दी। किसानों को उनकी मेहनत का फल मीठा मिला कि उनकी उपज भी उम्दा हुई। लेकिन जब किसान अपनी फ़सल केकर मंडी पहुंचे तो मंडी में मिल रहे भाव को सुनते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दरअसल मंडी में इसकी कीमत सिर्फ़ एक रुपए प्रति किलो मिल रही है। किसानों को लहसुन के जो दाम मिले हैं उनसे उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही है। हालत ये है कि लहसुन लगाने वाले किसानों के पास अब कुछ नहीं बचा है। बताईए कि क्या ऐसे किसानों की बर्बादी तय नहीं है ! जो लागत भी न निकले तो किसान क्या खाए और क्या बचाए जिससे वो दुबारा फसल में पैसा खर्च कर सके। आखिर ऐसे कैसे किसान जिंदा कैसे रहेगा? तभी तो दुखी होकर किसान आए दिन आत्महत्या कर रहे हैं। वहीं जानकार बताते हैं लहसुन की कीमतों के ऐसे हालात कभी नहीं रहे। जनवरी तक लहसुन 60-70 रु. प्रति किलो बिक रहा था। लेकिन अब फिर से अचानक लहसुन की कीमतों में कमी शुरू हो गई है जिससे किसान बेहद निराश हैं।

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