बगावत, बवाल और बर्बरता की कहानी ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ : जब 83 जवान शहीद हुए और 492 नागरिक मारे गए

बगावत, बवाल और बर्बरता की कहानी 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' : जब 83 जवान शहीद हुए

बगावत, बवाल और बर्बरता की कहानी ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ : जब 83 जवान शहीद हुए  आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 34वीं बरसी है। तारीख 6 जून 1984, जगह अमृतसर का दरबार साहिब…. और ऑपरेशन ब्लू स्टार। क्या था ऑपरेशन ब्लू स्टार आख़िर क्यों इसे करने की जरुरत पड़ी। वो सच जिसे ना ही इतिहास भुला पाया और ना ही वर्तमान

ये तो हर कोई जानता है कि 6 जून 1984 के दिन सिखों के सबसे पावन माने जाने वाले स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना की कार्रवाई ‘ऑपरेशन ब्लूस्टार चर्चा का विषय बना रहा। इतिहास तो इस ऑप्रेशन से कांप उठा ही था मगर आज भी लोग इसे याद करके सिहर उठते हैं। बात 1970 के दशक के आख़िर की है जब अकाली राजनीति में जबरदस्त खींचतान चल रही थी। यही नहीं इसी के शुरू हुई थी अकालियों की पंजाब से संबंधित कई मांगे। जिसके बाद 1978 में अकाली दल ने आनंदपुर साहिब प्रस्ताव पारित किया। इस प्रस्ताव में सुझाव दिया गया था कि भारत की जो केंद्र सरकार है उसका केवल रक्षा, विदेश नीति, संचार और मुद्रा पर ही अधिकार हो, बाकि दूसरे सभी विषयों पर राज्यों को पूर्ण अधिकार दिया जाए। मांग बस यही नहीं थी वो चाहते थे कि भारत के पूरे उत्तरी क्षेत्र में उन्हें स्वायत्तता मिले। कुल मिलाकर अकालियों की तीन मांगें थीं- चंडीगढ़ पंजाब की ही राजधानी हो, पंजाबी भाषी क्षेत्र पंजाब में शामिल किए जाएं, नदियों के पानी के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय की राय ली जाए। इसके साथ अकाली ये भी चाहते थे कि ‘नहरों के हेडवर्क्स’ और पन-बिजली बनाने के मूलभूत ढांचे का प्रबंधन पंजाब के पास हो, फौज में भर्ती काबिलियत के आधार पर हो और सिखों की भर्ती पर लगी सीमा हटाई जाए साथ ही अखिल भारतीय गुरुद्वारा कानून बनाया जाए। इस मसले पर बात बन जाए और समस्या का समाधान हो जाए इसके लिए इंदिरा गांधी की सरकार और अकालियों के बीच करीब तीन बार बात हुई।
मगर सारी बातचीत फीकी साबित हुई। आखिर एक नाम उभर कर सामने आया जरनैल सिंह भिंडरावाला, जिसकी अगुवाई में सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग होने लगी। सिखों के लिए अलग देश की मांग करने वालों में भिंडरावाले प्रमुख थे। ये पूरा आंदोलन भारत से पंजाब को अलग करके खालिस्तान नाम से एक नए देश बनाने के लिए किया गया था। ये देश की बदकिस्मती नहीं तो और क्या है कि देश की आज़ादी के लिए हिन्दू मुस्लिम सिख सब एकसाथ मिलकर ललड़े और उन्होंने अपना खून बहाया मगर बाद में देश का विभाजन हो गया और मुस्लिमों को पाकिस्तान के रूप में एक अलग देश मिल गया। तो सिख समुदाय को भी लगा कि उनका भी अपना एक अलग देश होना चाहिए।

आखिर 1983 में ये मामला हिंसक रूप लेने लगा और पंजाब पुलिस के डीआईजी एएस अटवाल की हत्या हो गई। इससे तनाव बढ़ गया और उसी साल जालंधर के पास बंदूकधारियों ने पंजाब रोडवेज की बस में चुन-चुनकर हिंदुओं की हत्‍या कर दी। इसके बाद विमान हाईजैक हुए। हालात देख केंद्र सरकार ने राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन लगा दिया। स्‍वर्ण मंदिर में रह रहा भिंडरावाला सरकार के निशाने पर आ गया आख़िर सरकार को ऑप्रेशन ब्लू स्टार चलाना पड़ा।मगर 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार से तीन महीने पहले तक हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 298 हो चुकी थी।

तीन जून को भारतीय सेना अमृतसर में प्रवेश कर गई और स्वर्ण मंदिर को घेर लिया। जिसके बाद शुरू हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार जिसमें भीषण खून-खराबा हुआ। भारत सरकार के श्वेतपत्र के अनुसार इस ऑपरेशन में 83 सैनिक शहीद हुए , 493 चरमपंथी मारे गए, सैकडों घायल हुए और 1592 को गिरफ्तार किया गया। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पांच महीने बाद 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद देशभर में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे। हिंसा, ख़ूनख़राबा, कई लोगों की मौत और देश की प्रधानमंत्री को खोने के बाद कहीं जाकर ये ऑप्रेशन ख़त्म हुआ।

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