महाराष्ट्र में जहरीले कीटनाशक ने ली 20 किसानों की जान : 700 अस्पताल में भर्ती, 25 की गई आंखों की रोशनी

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में पिछले दो महीने में कीटनाशक की चपेट में आकर अबतक 20 किसानों की मौत हो चुकी है। करीब 30 किसानों की हालत गंभीर बनी हुई है। जबकि 25 किसानों की आंखों की रौशनी जा चुकी है। वहीं 700 किसानों का इलाज अभी तक अस्पताल में चल रहा है। जो किसान अस्पताल में भर्ती हैं वो भी उल्टी, दस्त, पेट दर्द, दिखाई न देना जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ये किसान कपास की फसल को कीड़े लगने से बचाने के लिए ‘प्रोफेनोफॉस’ कीटनाशक का इस्तेमाल कर रहे थे। कीटनाशक के उपयोग करते वक़्त किसानों को ये पता नहीं था कि इसको इस्‍तेमाल करते समय किन चीजों का ध्‍यान रखना जरूरी है। इसका इस्तेमाल करने के दौरान किसानों ने ना ही ग्लब्स पहने थे और ना ही अपने चेहरे पर मास्क लगाया था। जिसके चलते जानकारी के अभाव में कई किसान अब अपनी जान गवां चुके हैं।

मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मृतकों के परिवार को दो-दो लाख रुपये मुआवजे का एलान किया है। साथ किसानों की कीटनाशक के कारण हुई मौत के संबंध में जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं।

कीटनाशक छिड़कते वक़्त इन बातों का रखें ध्यान

1. कीटनाशक छिडकने से पहले शरीर का पूरी तरह से ढंका होना जरूरी है।
2. कीटनाशकों का स्प्रे करते वक्त किसानों को मास्क पहनना चाहिए।
3. अगर शरीर पर कोई घाव है तो ये छिड़काव जानलेवा साबित हो सकता है।
4. कीटनाशक का प्रयोग करते समय ये देख लें कि उपकरण में लीकेज तो नहीं है।
6. कीटनाशक को मुंह लगाकर ना खोलें।
7. ध्यान रखें कि कीटनाशक शरीर के किसी अंग में न जाए।
8. ध्यान रखें कि कीटनाशक छिड़कते समय आसपास हवा तेज़ ना चल रही हो।
10. रसायनों को बच्चों, बूढ़ों और पशुओं की पहुंच से दूर रखें।
11. कीटनाशकों के खाली डिब्बों को किसी अन्य काम में इस्तेमाल में ना लें।
12. कीटनाशक छिड़कने के बाद छिड़के गए खेत में किसी व्यक्ति या जानवरों को नहीं जाने देना चाहिए।

कीटनाशक के दुष्प्रभाव से ऐसे करें बचाव

अगर किसी ने कीटनाशक खा लिया है या गलती से मुंह में चला गया है, तो एक गिलास में गुनगुने पानी में दो चम्मच नमक मिलाकर उल्टी करानी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति ने कीटनाशक सूंघ लिया हो, तो जल्दी ही उसे खुले स्थान पर ले जाना चाहिए और शरीर के कपड़े ढीले कर के कृत्रिम श्वास देनी चाहिए।

किसानों ने तो खेतों में बेहतर फसल के लिए इस कीटनाशक का छिड़काव किया था मगर जानकारी का अभाव होने के चलते आज कई किसान इस दुनिया में नहीं हैं। जो किसान किस्मत से बच भी गए हैं वो अपनी आँखों की रौशनी खो चुके हैं। ऐसे में अब ये किसान कैसे अपना और अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे ये सबसे ज़्यादा चिंता का विषय है। जो किसान बच भी गए हैं वो पैसे के अभाव में ठीक तरह से अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। अगर कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले बीज कंपनियो ने किसानों को ठीक से सूचनाएं दी होती और कृषि विभाग ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाई होती इन किसानों की जान बच जाती।

 

 

 

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