शर्म करो भारत में तोड़ फोड़ करने वालों, देखो जापान में बस ड्राइवर्स की ये अनोखी हड़ताल

शर्म करो भारत में तोड़ फोड़ करने वालों, जापान में बस ड्राइवर्स की ये अनोखी हड़ताल

 

शर्म करो भारत में तोड़ फोड़ करने वालों, जापान में बस ड्राइवर्स की ये अनोखी हड़ताल  आपने हमारे देश में ऐसे आंदोलन करने वाले उदंडी लोगो को तो देखा ही होगा जो कभी आरक्षण के नाम पर तो कभी किसी बाबा को बचाने के लिए तो कभी अपनी मानगो को पूरा करने के लिए दुकाने घर सरकारी वाहन जला देते हैं तोड़ फोड़ मचा देते हैं यहाँ तक की लोगों की जान तक ले लेते हैं मगर अब में आपको जापान की एक ख़बर के बारे में बताना चाहती हूँ। जिसने पूरी दुनिया जापान की प्रशंसा कर रहा है। जापान में अभी बस ड्राइवर्स की हड़ताल चल रही है लेकिन इस हड़ताल से सीखने वाली बात ये है कि आम आदमी को किसी भी तरह की कोई परेशानी से नहीं गुजरना पड़ रहा है। क्योंकि ड्राइवर्स का हड़ताल करने का तरीका बड़ा ही सभ्य और शालीन है। ये सभी बस ड्राइवर्स ने इस हड़ताल के दौरान वे किसी भी पैसेंजर से कोई किराया नहीं ले रहे हैं। अब यहाँ आप ये देखिए कि बस ड्राइवर्स के किराया ना लेने से प्रशासन को नुकसान हो रहा है। मगर जनता पर आंच भी नहीं आ रही है और ना ही उन्हें किसी भी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। और ये सब बस ड्राइवर्स ने ऐसा इसलिए किया ताकि पैसेंजर्स को कोई दिक्कत न हो।

हड़ताल को लेकर ड्राइवर्स का कहना है कि अगर वो बसें नहीं चलाने का फैसला लेते तो नुकसान जनता का होता। मगर वो जिनका विरोध कर रहे हैं उन्हें तो इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। इसलिए ड्राइवर्स ने जनता को फ्री राइड्स दी जिससे नुकसान प्रशासन का हो ना कि जनता का।

ये हड़ताल पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बड़ी कंपनी रयोबी बस सर्विस ने किया है। दरअसल ये हड़ताल इसलिए की रही है क्योंकि एक महीने पहले ही प्रशासन ने रयोबी बस सर्विस के रूट पर मेगुरिन को अपनी बसें चलाने का लाइसेंस दे दिया था। वहीं रयोबी ने मैनेजमेंट एडमिनिस्ट्रेशन से मेगुरिन के रूट बदलने की अपील भी की थी। पर इस पर कोई सुनवाई नहीं की गई थी जिसके बाद ड्राइवर्स ने ये स्ट्राइक की है। वैसे ये पहली बार नहीं है जब इस तरह की हड़ताल हुई हो। बल्कि 1944 में पहली बार अमेरिका ने इस तरह का हड़ताल रखा था। आपको बता दें कि फ्री राइड स्ट्राइक का यह तरीका पहली बार 74 साल पहले अमेरिका में अपनाया गया था। 1944 में पैसेंजर्स को इस तरह फ्री-राइड देकर इस तरह का हड़ताल की थी. पिछले साल सिडनी और ब्रिसबेन में इस तरह हड़ताल शुरू की गई थी। सिडनी में बस ड्राइवर्स ने मजदूरी के मुद्दे को लेकर ‘फेयर फ्री डेज’ की शुरुआत की थी। अब ज़रा सोचिए कि यही स्ट्राइक अगर भारत में होती तो नज़ारा क्या होता ! यक़ीनन हर भारतीय को इस खबर से सीख जरूर लेनी चाहिए। क्योंकि यहां हड़ताल का मतलब होता है हिंसा आगज़नी तोड़फोड़। जरुरी नहीं है कि आपका अपनी मांगे मनवाने का तरीका हिंसक हो या दूसरों को तकलीफ़ पहुंचा कर आप अपना विरोध दर्ज करवाए। तो अब से अगर किसी आंदोलन या प्रदर्शन में आप भी शामिल होने जा रहे हैं तो एक बार जरूर सोचे और समझे भी !

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