Advertising: भोली-भाली जनता को लॉलीपॉप दिखाते विज्ञापन

Advertising

Advertising: फेयर एंड हैंडसम नाम तो सुना ही होगा, अब मीठा खायें बिना शुगर बढ़ाये, सर्दियों वाली फेयरनेस क्रीम, टीवी…..पेपर, मैग्जीन और भी कितना कुछ, हमारे आस पास ऐसी ना जाने कितनी चीजें हैं. जो हम सबको घेरे रहती हैं. कहीं टी.वी के सामने बैठो तो जितनी बड़ी फिल्म नहीं उससे बडे एड ब्रेक, कहीं सोशल मीडिया पर आओ तो जानकारी कम प्रोडक्टस ज्यादा. अगर गौर से देखे तो, हर तरफ मार्केटिंग, हर तरह धंधा. कालाबजारी का, लोगों की सेहत से खेलने का…

एक इंसान जोकि पिछले 6 महीनों से शुगर से पीड़ित है. उसे डॉक्टरों ने मीठा ना खाने की सलाह दी है. लेकिन बाजार में शुगर फ्री बिस्किट मिलता है. शुगर फ्री मिठास मिलती है. वो उसे खरीदता है और जब कुछ दिनों बाद शुगर चेक कराता है तो उसे पता चलता है. मेरा शुगर तो कम ही नहीं हुआ. हालांकि वो इस बात पर गौर नहीं करता, आखिर किस वजह से उसका शुगर इतना ऊपर बढ़ गया है. डॉक्टर की दवा वो समय पर लेता है. नाश्ता से लेकर लंच, ब्रेकफास्ट तक वो सब टाईम पर लेता है. लेकिन उसका शुगर लेवल ऊपर ही है. आखिर क्यों..? ये मालूम नहीं. क्योंकि अभी तक उसने कभी सोचा ही नहीं कि जो शुगर फ्री बिस्किट, जो शुगर फ्री मिठास वो खा रहा है. उसमें भी शुगर है. उस व्यक्ति का ध्यान उधर इसलिए नहीं जाता, क्योंकि टी.वी की एड में शुगर फ्री बिस्किट की एड किसी बड़े एक्टर ने की थी. इतना भरोसा काफी है. उस मिठास पर यकीन करने के लिए कि इससे शुगर ऊपर नहीं होता.
इसी तरह एक महिला जिसका वजन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है. वो टी.वी में आने वाले सीरियल के बाद आये एड ब्रेक में देखती है कि कैसे महज 2 महीने में ही आप अपना वजन घटा सकते हैं. उसको कॉल करती है और वो कंपनी महिला को वजन घटाने के नाम पर कुछ किताबें, कुछ डाईड चार्ट दे देती है. लेकिन वजन जस का तस ही रहता है.

ऐसी ना जाने कितनी चीजें हैं. जो बाजार से लेकर हमारे हकीकती जिंदगी में घर कर चुकी है. सुबह से लेकर शाम तक स्क्रॉल करते हमारे फोन में भी इसी तरह के ही एड दिखते हैं. कभी स्वास्थ्य से संबंधित, कभी अपनी हाईट बनाने से संबंधित. हम इन सब जगह दिखाई जाने वाली चीजें देखते भी हैं और उनके झांसे में आकर उनका इस्तेमाल भी करते हैं. लेकिन अफसोस हमें हमेशा नुकसान ही होता है. हमारे पैसों का, हमारे स्वास्थ्य का….उत्तर प्रदेश के फूड एन्ड ड्रग्स विभाग की मानें तो, ड्रग्स कंट्रोलिंग और लाइसेंसिगं अथॉरिटी के ए के जैन बताते हैं कि, साल 2017-18 में एएससीआई ने कुल 2179 शिकायतें दर्ज कर उन पर कार्रवाई की है. इन शिकायतों में सबसे अधिक समस्या स्वास्थ्य से जुड़ी उत्पादों की रही. जिसमें कुल 874 शिकायतें स्वास्थ्य से, 729 शिकायतें शिक्षा से जबकि खाद्य और पेय पर्दाथों से कुल 298 शिकायतें दर्ज की गई हैं.

वहीं एएससीआई की जनरल सेकरेटरी श्वेता पुरंदरे की मानें तो, “वो कहती हैं जब से हमने मिनिस्ट्री ऑफ आयुष विभाग के साथ एमओयू साइन किया है, हमें काफी रिस्पांस मिल रहा है. मतलब की इन शिकायतों में ईजाफा हो रहा है. क्योंकि अब लोग ऑनलाइन भी अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं. इसके अलावा राज्य स्तर पर भी काम हो रहा है.”

आज की बात करें तो हम हमारे घर पर आने वाले पेपर, मैगजीन को देखें तो, हमें ये साफ दिखाई दे जायेगा कि इनमें ऐसे ना जाने कितने भ्रामक विज्ञापन हैं जो DMR को ढेंगा दिखा रहे हैं. वहीं जब एएससीआई (ASCI) दायर शिकायतों की जांच की तो, एएसीआई ने पाया कि दर्ज शिकायतों में 35% विज्ञापन टी.वी पर आते हैं. जबकि 34% भ्रामक विज्ञापन अखबार, मैगजीन से जबकि 15% भ्रामक विज्ञापन डिजिटल प्लेटफार्म पर दिखाये जाते हैं तो ऐसे में कैसे बच सकते हैं हम इन भ्रामक विज्ञापनों के चंगुल से.

आज आर्थराइटिस, मोटापा कम करने या वजन घटाने बढ़ाने वाले ना जाने कितने प्रोडक्ट हैं. जिनका प्रचार सेलिब्रिटी करते नजर आते हैं. उपभोक्ताओं को प्रलोभित किया जाता है. कभी फोन करके तुरंत बुकिंग करने के लिए प्रेरित किया जाता है. हालांकि इस तरह के उत्पादों को विज्ञापित करना कानूनन जुर्म है.

आज किसी भी बड़े चौराहे, बस से जब आप सफर करते हैं तो आपको किसी ना किसी तांत्रिक किसी बाबा का प्रचार यूं ही दिख जाता है. जोकि पूरी तरह भ्रामक है. लेकिन फिर भी हमारा सिस्टम आज तक इस पर कोई लगाम नहीं लगा पाया है. शाम को जब हम अपने परिवार के साथ टी.वी के सामने बैठते हैं तो उस दौरान ऐसे कुछ एड जरुर दिखाई दे जाते हैं. जिससे हम और हमारे साथ बैठा परिवार का हर सदस्य असहज हो जाता है. हालांकि उन विज्ञापनों का हकीकत से कोई नाता हीं नहीं होता.

आज बालों का झड़ना रोकने से लेकर हाईट बढ़ाने, पतले होने के लिए टी.वी से लेकर हर जगह ऐसे विज्ञापन छाये हुए हैं. जोकि भ्रामक हैं. धोखा हैं. लेकिन ना तो हमारा सिस्टम इस पर कोई नकेल लगा पा रहा है और ना ही हम समझ पा रहे हैं. वीएलसीसी पर्सनल केयर लिमिटेड के एक अंग्रेजी अखबार में छपे विज्ञापन में एक कंपनी ने महज 90 मिनट के अंदर व्यक्ति को स्लिम करने का दावा किया था. जिसको साबित करने के लिए कंपनी को सात दिन का वक्त दिया गया था. हालांकि कंपनी अपने सात दिनों के वक्त में भी अपने किये दावे को साबित नहीं कर पाई और शिकायत को सही मानते हुए कंपनी का विज्ञापन निरस्त कर दिया गया था. क्योंकि यह विज्ञापन एएससीआई कोड के चैप्टर I.1 और I.4 के मुताबिक पूरी तरह भ्रामक और गलत था. इसी तरह ना जाने कितने ही विज्ञापन आज भी पूरी तरह अवैध हैं, गलत हैं. लेकिन इन पर लगाम ना तो लग पा रहे हैं और ना ही ये रूक पा रहे हैं. क्योंकि इन सभी चीजों का प्रचार हमारे समाज के हुक्मरान कर रहे हैं. जिनसे हम सब कुछ सीखते हैं. फिल्मी दुनिया के मशहूर सितारे, जिनके बताये नक्शे कदम पर हम चलते हैं और सोचते हैं कि हम सभी अपने आप को काफी बेहतर महसूस करते हैं, क्योंकि उनका स्टार उनके द्वारा यूज किये जा रहे प्रोडक्ट का विज्ञापन करता है.

हालांकि अगर आपको यदि टेलीविज़न/ अखबार/ मैगज़ीन या फिर कहीं भी कोई आपत्तिजनक विज्ञापन दिखे तो आप इन तरीकों से एएससीआई को शिकायत कर सकते हैं -1. इस नंबर पर अपनी शिकायत व्हाट्सऐप कर सकते हैं – 7710012345

  1. एएससीआई वेबसाइट- https://ascionline.org/index.php/lodge-ur-complaints.html
  2. ईमेल भेज कर- contact@ascionline.org
  3. टोल फ्री नंबर पर कॉल कर के- 1800-22-2724
  4. पोस्ट के ज़रीए- महा सचिव, 717 / बी,औरस चैंबर, एस एस अमृतवार मार्ग, वरली, मुंबई 400018। लैंडमार्क: महिंद्रा टावर्स के पीछे..

 

Grameen News के खबरों को Video रूप मे देखने के लिए ग्रामीण न्यूज़ के YouTube Channel को Subscribe करना ना भूले  ::

https://www.youtube.com/channel/UCPoP0VzRh0g50ZqDMGqv7OQ

Kisan और खेती से जुड़ी हर खबर देखने के लिए Green TV India को Subscribe करना ना भूले ::

https://www.youtube.com/user/Greentvindia1

Green TV India की Website Visit करें :: http://www.greentvindia.com/

 

 

 

0 Comments

Leave a Comment

Login

Welcome! Login in to your account

Remember me Lost your password?

Lost Password