‘साड़ी ले लो’ की आवाज लगा, रोजाना ढ़ाई रुपये कमाने वाला शख्स, कैसे बना करोड़ों का मालिक-

बिरेन कुमार बसाक

सच्ची मेहनत और सच्चा हौसला, यहीं ऐसी चाबियां हैं, जो हमारे सपनों को हमारे पास तक ले आती हैं. कोलकाता की गलियों में, कभी ‘साड़ी ले लो’ की आवाज लगाते और साडियों को बेचते हुए. कभी बिरेन कुमार बसाक ने ये नहीं सोचा होगा की कभी रोजाना ढ़ाई रुपये कमाकर, वो करोड़ों रुपये तक पहुंच सकते हैं.

मगर अपनी मेहनत और लगन से हर मुश्किल आसान करने वाले, बिरेन कुमार बसाक कभी अपने कंधे पर साड़ियों को लादकर कोलकाता की गलियों में घूमा करते थे. और ‘साड़ी ले लो’ की आवाज लगाते थे.

एक बुनकर के यहां मात्र 2.50 रुपये में दिहाड़ी पर साड़ी बुनने का काम करते थे. लेकिन अपनी लगन और मेहनत के नतीजे की वजह से बिरेन साड़ी कंपनी के मालिक हैं.

आज बिरेन कुमार बसाक, की साड़ी कंपनी ‘बसाक एंड कंपनी’ का सालान टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का है. इस कंपनी के ख्वाब सजाये बिरेन कुमार ने इस दिशा में पहला कदम 20 साल पहले रखा था. जब बिरेन कुमार ने 6 गज की साड़ी पर रामायण के सात खंडों को उकेरा था. जिसकी तैयार में  बिरेन को 1 साल का वक्त लग गया था. उसके बाद उसको बुनने में 2 साल का वक्त लग गया था. इस साड़ी को बिरेन ने 1996 में तैयार कर लिया. नदिया जिले के एक छोटे से गांव फुलिया के बिरेन कुमार को इस बुनाई के लिए इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ने डॉक्टरेट की उपाधि से नवाजा था. इसके बाद इंग्लैंड की वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनिवर्सिटी ने भी डॉक्टरेट की की उपाधि से नवाजा था.

6 गज में उकेरी इस कलाकृति ने जहां बिरेन को धरातल से आसमान की ऊंचाई तक पहुंचा दिया. वहीं ना जाने कितने ही राष्ट्रीय पुरस्कार, अवॉर्ड, नेशनल मेरिट सर्टिफिकेट से साथ संत कबीर अवॉर्ड दिला चुकी है. इन सबके अलावा इस 6 गज की साड़ी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड, वर्ल्ड यूनिक रिकॉर्ड और इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में इसका नाम दर्ज हो चुका है.

साल 2004 में मुंबई की एक कंपनी ने बिरेन को इस साड़ी के लिए बिरेन को 8 लाख रूपये का ऑफर दिया था, लेकिन बिरेन ने इसे बेचने से मना कर दिया.

8 साल एक बुनकर के यहां दिहाड़ी पर काम करने वाले बिरेन ने अपना बिजनेस शुरू करने के लिए, अपना घर गिरवी रख दिया. जिसके बदले बिरेन को 10 का लोन मिला था. उसके बाद अपने बड़े भाई के साथ मिलकर बिरेन बुनकरों के यहां से साड़ी लाते और उस पर बुनाई करके, कोलकाता बेचने लेकर जाते थे.

साल 1987 में बिरेन ने अपनी पहली साड़ी की दुकान खोली थी. जहां उनकी दुकान में 8 लोग काम करने वाले होते थे. उनके द्वारा बनी साड़ियां लोगों को पसंद आने लगी. जिसके चलते आज बिरेन कंपनी 16 हजार साड़ियां प्रत्येक महीने बेचती है. साथ ही इस कंपनी में आज 24 कर्मचारी काम करते हैं. जिनके अंडर आज 5 हजार बुनकर काम कर रहे हैं. आज उनकी कंपनी का टर्नओवर 50 करोड़ से ज्यादा का हो गया है.

 

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